जोधपुर से सीखें...सिरमौर बनना, तोड़ी परम्पराएं, बेटी को दिलाया मान तो मिला सम्मान

जोधपुर से सीखें...सिरमौर बनना, तोड़ी परम्पराएं, बेटी को दिलाया मान तो मिला सम्मान

Sikander Pareek | Updated: 14 Jul 2019, 09:10:33 PM (IST) Jodhpur, Rajasthan, India

जोधपुर में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ...अभियान में लीक से हटकर कार्य

जोधपुर। लीक से हटकर कार्य करेंगे तो एक पहचान बनेगी। कार्य में हमेशा नयापन होना चाहिए। अक्सर यह सुना होगा, लेकिन जोधपुर जिले ने इसे साबित कर दिखाया है बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ...अभियान में। यह मुहिम देश भर में चली। राजस्थान में भी हर जिले का इसमें योगदान रहा। सबने अपनी तरफ से अच्छा करने का प्रयास किया, लेकिन जोधपुर में कार्य लीक से हटकर हुआ। उसी का ही परिणाम है कि लिंगानुपात यहां दस फीसदी अंकों के साथ बढ़ा और जोधपुर ने प्रदेश को मान बढ़ा दिया। राजस्थान को सर्वश्रेष्ठ राज्य चुना गया, अब अगस्त में यहां के कलक्टर नवाजे जाएंगे।
वर्ष 2011 से अब तक 45 अंकों की बढ़त
वर्ष 2011 में जारी जनसंख्या के आंकड़ों में जोधपुर में लिंगानुपात 915 था। जिला टॉप-5 तो दूर रहा, टॉप-10 में भी नहीं था। आंकड़ा धीरे धीरे बढ़ा। अब यहां लिंगानुपात 960 तक पहुंच गया है। यानी 45 अंकों की सीधी बढ़ोतरी।
यह किए गए नवाचार
- रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम में बारां को पछाड़ा
- काम नहीं करने पर एक दिन का मानदेय काटा
- आशा सहयोगिनियों के लिए एक घंटे कार्य की अनिवार्यता
- उम्मेद अस्पताल में कन्या जन्म पर थालियां बजाई गई।
- बेटी को जन्म देने वाली माताओं का सम्मान किया। उन्हें चांदी के सिक्के प्रदान किए गए।
- बेटी जन्म पर सरकार की ओर से प्रोत्साहित करने वाली सरकारी योजनाओं में आवेदन का सरलीकरण किया गया।
- जननी सुरक्षा योजना का लाभ शीघ्र देने की व्यवस्था की गई।
- शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। रैलियां निकाली गई।
- बालिका जन्म पर ढूंढोत्सव की परम्परा शुरू की गई
- शहर के अधिकांश ऑटो पर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के नारे लिखवाए गए
- अधिकारियों को आंगनबाड़ी केन्द्रों का माह में पांच निरीक्षण करने थे लेकिन यह आंकड़ा यहां प्रतिमाह 90 तक किया।

कई समाज-संगठन भी आए
- श्रीमाली ब्राह्मण समाज ने बेटी जन्म पर बेटी के नाम 2100 रुपए की एफडी करवाने का निर्णय किया।
- नारवा की ढाणी गंडेरो में बेटी जन्म पर न केवल थाली बजाई गई बल्कि पीहर और ससुराल पक्ष की ओर से मां को पीली चुनर ओढ़ाई गई।
- पुष्करणा ब्राह्मण समाज में पहली संतान बेटी हो या बेटा, सामूहिक भोज का आयोजन शुरू हुआ

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