मदर्स डे विशेष : लॉकडाउन में अनाथ बच्चों पर ममता लुटाने गृहमाताओं ने छोड़ दिया अपना घर-परिवार

अनूठी दस मदर्स पिछले 48 दिनों से अपने बच्चों, पति, सास ससुर को छोड़कर भारत के नए उज्ज्वल भविष्य को चमकाने में जुटी हैं। उन्हें इस बात का रंज नहीं कि वे अपने घर नहीं जा पाई बल्कि उन्हें इस बात की खुशी है कि उन्होने अपनी योग्यता और समय का सदुपयोग भारत के भविष्य के लिए किया।

By: Harshwardhan bhati

Published: 10 May 2020, 02:56 PM IST

नंदकिशोर सारस्वत/जोधपुर. अनूठी दस मदर्स पिछले 48 दिनों से अपने बच्चों, पति, सास ससुर को छोड़कर भारत के नए उज्ज्वल भविष्य को चमकाने में जुटी हैं। उन्हें इस बात का रंज नहीं कि वे अपने घर नहीं जा पाई बल्कि उन्हें इस बात की खुशी है कि उन्होने अपनी योग्यता और समय का सदुपयोग भारत के भविष्य के लिए किया। चौपासनी हाउसिंग बोर्ड स्थित नवजीवन संस्थान में तीन-तीन शिफ्ट में अनाथ शिशुओं पर अपना ममत्व लुटाने वाली गृहमाताएं बच्चों को नहलाने, दूध पिलाने और पालने में झुलाने से लेकर अल्पहार भोजन देने की सेवा में 24 घंटे जुटी है।

international mother's day : women feeding their milk to orphans

प्रधानमंत्री की ओर से लॉकडाउन की घोषणा होते ही संस्थान के संरक्षक व प्रभारी राजेन्द्र परिहार संस्थान परिसर पहुंचे और गृह माताओं से कहा वे खुद सपत्नीक कुछ दिनों के लिए 24 घंटे संस्थान में ही रहकर बच्चों को संभालेंगे। संस्थान परिसर में मौजूद 10 गृहमाताओं ने भी बच्चों के लिए लॉक डाउन में सहर्ष परिसर में 24 घंटे रहकर सेवा करने का निर्णय लिया। अपने खुद के बच्चों को पीहर तो कुछ मदर्स ने सास-ससुर और पति को बच्चों की जिम्मेदारी सौंपी। वर्तमान में दो नवजात उम्मेद अस्पताल में भर्ती हंै जहां दो मदर्स कई तरह की तकलीफों के बावजूद 24 घंटे देखरेख कर रही है। संस्थान संचालक राजेन्द्र परिहार ने बताया कि संस्थान में वर्तमान में कुल 59 बालक बालिकाएं है।

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संस्थान में यू होता है अनाथ बालक का प्रवेश
अविवाहित माताएं या उनके संबंधी नवजात शिशुओं को संस्थान में गुप्त रूप से छोड़ सके इसके लिए नवजीवन संस्थान के सामने अहाते में एक पालना स्थापित किया गया है। जब कभी कोई संस्थान के पालने में शिशु को छोड़ता है तो शिशु के भार के दबाव से विद्युत स्विच दबता है और कार्यालय में विद्युत घंटी बजने लगती है। घंटी सुनते ही संस्थान की गृहमाता पालने तक आती है और उसमें लेटे हुए शिशु को लेकर उसकी स्वच्छता और शारीरिक जांच के लिए कमरे में ले जाती है। नामकरण के बाद उसका नाम रजिस्टर में अंकित कर उसे संस्था की एम्बुलेंस में चिकित्सालय ले जाकर जांच की जाती है।

Harshwardhan bhati Desk
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