विवादों और जेडीए की फाइलों का है याराना... पहले भी गायब हो चुकी है फाइलें

- छह साल पहले चोरी हुई थी फाइलें

- छह माह से नहीं बढ़ी जांच

 

By: Avinash Kewaliya

Updated: 19 Jan 2019, 03:45 PM IST

Jodhpur, Jodhpur, Rajasthan, India

जोधपुर.
जोधपुर विकास प्राधिकरण में हाल ही में एक बैठक के बाद संबंधित रिकॉर्ड को मुख्यालय तलब करने और जांच के मामले ने एक नए विवाद को जन्म दिया। लेकिन जेडीए में निर्माण कार्य व फाइलों का विवादों से पुराना नाता रहा है। करीब छह साल पहले निर्माण कार्यों से संबंधित जो फाइलें चोरी हुई वह प्रकरण आज तक जांच में ही चल रहा है। ऐसे में नए विवाद व प्रकरण की जांच भी सवालों के घेरे में है।

जेडीए प्रशासन की ओर से 2007-08 से लेकर 2012-13 के बीच फाइलें चोरी होने के दो मामले दर्ज करवाए गए थे। इनमें 10 पत्रावलियां लेखा शाखा की और 102 निर्माण शाखा से संबंधित थी। इनमें कई पत्रावलियां मेजरमेंट बुक (एमबी) थी जो कि निर्माण के बाद का हिसाब-किताब अभियंता भरते हैं। इस संबंध में दो अलग-अलग प्रकरण रातानाडा पुलिस थाने में दर्ज करवाए गए थे। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जांच ही ठंडे बस्ते में

निर्माण में गड़बडिय़ों की आशंका के कारण ही यह पत्रावलियां संदेह के दायरे में थी। एमबी गायब होने के कारण निर्माण कार्यों का हिसाब भी नहीं देखा जा सका। महत्वपूर्ण मामले की जांच में न तो पुलिस प्रशासन ने कोई रुचि दिखाई और न ही जेडीए प्रबंधन की ओर से प्रयास हुए।
एसीबी ने की 125 फाइलों की जांच

जेडीए के पूर्व अध्यक्ष राजेन्द्र सोलंकी के कार्यकाल के समय की 125 फाइलों की जांच एसीबी ने की थी। उस प्रकरण में गिरफ्तारियां हुई और मामला न्यायालय में विचाराधीन है। लेकिन इसके अलावा पुलिस में दर्ज प्रकरणों की किसी प्रकार की जांच आगे नहीं बढ़ी।
कांग्रेस सरकार के समय की फाइलों की हुई थी जांच

यह जो फाइलें गायब हुई और उसके प्रकरण कांग्रेस सरकार के समय में हुए कार्यों के थे। वर्ष 2013 में सरकार बदलते ही भाजपा सरकार ने जेडीए में जांच कराई। अब भाजपा सरकार के समय हुए कार्यों की जांच के लिए जवाब तलब किए गए। लेकिन जांच पूरी होने और कार्रवाई होने पर अब भी संशय बना हुआ है।
बयान पर ही अटकी है जांच

रातानाडा थाने के कार्यवाहक प्रभारी व प्रशिशु आरपीएस खींवसिंह बताते हैं कि इस मामले में अब तक जांच चल रही है। जेडीए के अधिकारियों को जांच के लिए तलब कर रखा है। खास बात यह है कि पिछले नौ माह से यह बयान ही नहीं हो पा रहे हैं।

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