जेएनवीयू छात्रसंघ चुनाव : सांयकालीन संस्थान के अध्यक्ष देरावर सिंह निर्वाचित, शोध प्रतिनिधि पद पर श्रवण कुमार

Harshwardhan Bhati | Publish: Sep, 11 2018 01:51:55 PM (IST) Jodhpur, Rajasthan, India

विवि में महज 46.22 फीसदी ही वोट पड़े जो पिछले साल की तुलना में तीन फीसदी कम है।

जोधपुर। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के परिणाम आने शुरू हो गए हैं। विवि के सांयकालीन संस्थान का पहला परिणाम घोषित किया गया है। इसमें अध्यक्ष पद पर देरावर सिंह ने जीत हासिल की है। सांयकालीन संस्थान उपाध्यक्ष पद पर राघवेंद्र सिंह पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। महासचिव पद पर कुल भान सिंह ने महेश चौधरी को 400 वोटों से हरा कर जीत हासिल की है। हालांकि कुलभान सिंह को विश्वविद्यालय ने अभी कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। वहीं शोध प्रतिनिधि पद पर अर्थशास्त्र विषय के शोधार्थी श्रवण कुमार ने बाजी मारी है। एलएलबी तृतीय वर्ष कक्षा प्रतिनिधि के रूप में श्रवण भांबू जीते श्रवण ने सौरभकांत व्यास और लक्ष्मण सिंह को हराया। एलएलबी के द्वितीय वर्ष के कक्षा प्रतिनिधि का चुनाव सुदर्शन चौधरी ने जीता। सुदर्शन ने रेखा चौधरी और लतिका फिलिप्स को हराया। प्रथम वर्ष के कक्षा प्रतिनिधि का चुनाव इंद्रवीर सिंह ने जीता है। परिणामों के आने का क्रम धीरे-धीरे तेज होता जा रहा है।

में मतदान के बाद सभी 41 मतदान बूथों से 245 मतपेटियों को एकत्रित करके एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज में बनाए गए स्ट्रॉंग रूम में कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है। मतगणना मंगलवार सुबह 11 बजे शुरू हो चुकी है। शाम तक सभी प्रत्याशियों के परिणाम आने की उम्मीद जताई जा रही है। इस दौरान सायंकालीन अध्ययन संस्थान के संस्थान अध्यक्ष पद के प्रत्याशी देरावर सिंह और संस्थान के संस्थान महासचिव पद के प्रत्याशी कुलभान सिंह को विश्वविद्यालय के मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रोफेसर अवधेश शर्मा ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दोनों प्रत्याशियों के संबंध में निर्वाचन कार्यालय को सोमवार को शिकायत मिली थी कि उन्होंने रविवार देर रात कैंपस में अपने पोस्टर या बैनर चिपका दिए थे। मतदान से हैंड वर्क पहले पोस्टर चिपकाने को लेकर उनसे जवाब मांगा गया है। निर्वाचन अधिकारी ने उनसे तत्काल जवाब देने को कहा है। मंगलवार सुबह 9 बजे से एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज से 84 मतपेटियों को संबंधित संकायों के लिए रवाना किया गया था। विवि में महज 46.22 फीसदी ही वोट पड़े जो पिछले साल की तुलना में तीन फीसदी कम है।

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