राजस्थान हाईकोर्ट की फटकार के बाद प्रशासन ने दिखाई चुस्ती, मंडोर के हाल जानने पहुंचे कलक्टर

Harshwardhan Singh Bhati

Updated: 21 Oct 2019, 10:20:44 AM (IST)

Jodhpur, Jodhpur, Rajasthan, India

वीडियो : गौतम उडेलिया/जोधपुर. ऐतिहासिक स्थल मंडोर अर्से से दुदर्शा का दंश झेल रहा है। कभी अपने उद्यान के लिए प्रख्यात रहा यह स्थान अब अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। प्रशासनिक उदासीनता का शिकार मंडोर उद्यान के इस हाल पर राजस्थान हाईकोर्ट ने फटकार लगाई थी। साथ ही इस संबंध में राज्य सरकार ने उद्यान के रखरखाव के लिए राशि भी स्वीकृत की है। इसके तहत सोमवार को प्रशासनिक अमला हरकत में नजर आया। जिला कलक्टर राजपुरोहित ने कई अधिकारियों सहित इस उद्यान का निरीक्षण किया। साथ ही इसकी दशा सुधारने के लिए रूपरेखा तैयार करने की बात कही है।

उल्लेखनीय है कि बीते महीने राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को शहर के ऐतिहासिक मंडोर उद्यान के कायाकल्प के लिए 13 करोड़ रुपए के प्रस्तावों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट एवं ले-आउट पेश करने के निर्देश दिए थे। वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा तथा न्यायाधीश विनित कुमार माथुर की खंडपीठ मेंं याचिकाकर्ता रणछोड़ सिंह परिहार द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिक्ता करणसिंह राजपुरोहित व सहयोगी रजत अरोड़ा ने कोर्ट के पूर्ववर्ती आदेश की पालना में 13 करोड़ के खर्च से करवाए जाने वाले कार्यों का ब्यौरा पेश किया था। जिस पर खंडपीठ ने कहा कि खर्च का तखमीना नहीं बल्कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट व ग्राउंड वर्क समझने के लिए उसे मंडोर उद्यान के ले-आउट पर दर्शाते हुए पेश करें। याची के अधिवक्ता राजवेंद्र सारस्वत ने कोर्ट को बताया कि मंडोर उद्यान में पुरा महत्व के स्मारक हैं, उनके संरक्षण व मूल स्वरूप पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने 5 सितंबर को मंडोर उद्यान में विकास एवं रखरखाव कार्यों के लिए 13 करोड़ रुपए की स्वीकृति जारी की थी।

Show More

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned