राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भेंट किए जाएंगे जोधपुर हैंडीक्राफ्ट के ईसर-गवर, राष्ट्रपति भवन की बनेगी शान

राष्ट्रपति को 24 कैरेट शुद्ध सोने के बर्क से तैयार की हुई गवर-ईसर की प्रतिमा भेंट की जाएगी। यह बर्क जितना पुराना होता जाएगा, उतनी ही उसकी चमक बढ़ती जाएगी। करीब 1 फुट बड़ी प्रतिमा को आम की लकड़ी से तैयार किया गया है।

अमित दवे/जोधपुर. मान-सम्मान और अपणायत के लिए जोधपुर का विशेष स्थान है। देश के राष्ट्रपति की जोधपुर यात्रा में इस परंपरा को बरकरार रखा जाएगा। जोधपुर का हैण्डीक्राफ्ट विश्व में अपनी अलग पहचान बना चुका है। अब जोधपुरी हैण्डीक्राफ्ट राष्ट्रपति भवन की शान बनेगा। राष्ट्रपति को जोधपुर यात्रा के दौरान शनिवार को होने वाले एक कार्यक्रम में हस्तनिर्मित गवर-ईसर (शिव-पार्वती का प्रतीक) की प्रतिमा भेंट की जाएगी।

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राष्ट्रपति को 24 कैरेट शुद्ध सोने के बर्क से तैयार की हुई गवर-ईसर की प्रतिमा भेंट की जाएगी। यह बर्क जितना पुराना होता जाएगा, उतनी ही उसकी चमक बढ़ती जाएगी। करीब 1 फुट बड़ी प्रतिमा को आम की लकड़ी से तैयार किया गया है। इस लकड़ी की यह खासियत है कि कई सालों बाद भी इसमें दरारें नहीं आएगी और मजबूती बरकरार रहेगी। इन प्रतिमाओं को 2 कारीगरों ने विशेष कलात्मक कारीगरी व रंगों के संयोजन से आकर्षक बनाया है। कारीगरों ने इन प्रतिमाओं को एक माह में तैयार किया है।

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सात समन्दर पार भी जाती हैं प्रतिमाएं
गणगौर के त्योहार की प्रतीक गवर-ईसर (शिव-गौरी) की पवित्र गाथा की गंूज सात समन्दर पार विदेशों में भी है। लकड़ी के हैण्डीक्राफ्ट उत्पादों के निर्यात के लिए विश्वविख्यात जोधपुर से अन्य उत्पादों के साथ गवर-ईसर की प्रतिमाएं भी निर्यात होती हैं। विशेषकर आम की लकड़ी से तैयार प्रतिमाओं में गवर माता की विभिन्न मुद्राएं झलकती हैं। अमरीका, आस्ट्रेलिया, इटली, फ्रांस, जापान, इंग्लैण्ड, कनाड़ा व गल्फ सहित करीब 30 से अधिक देशों में इनका निर्यात किया जा रहा है।

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इनका कहना है
गर्व की बातयह मेरे लिए गर्व का विषय है कि राष्ट्रपति को भेंट की जाने वाली गवर-ईसर की प्रतिमा बनाने का मौका मिला। प्रतिमा को सोने के बर्क और विशेष कारीगरी से तैयार किया गया है।
- मनीष अबानी, निर्यातक

Harshwardhan bhati
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