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jodhpur hospital: तीनों अस्पतालों की सफाई पर 6.22 करोड़ रुपए खर्च, ये हालात देखकर कैसे माने


अभियान: स्वच्छ अस्पताल और स्वस्थ मरीज

जोधपुर

Published: March 21, 2022 07:55:58 pm


फैक्ट फाइल

एमडीएम अस्पताल में सफाई पर सालाना व्यय-25000000

उम्मेद अस्पताल- 19200000

महात्मा गांधी संलग्न चिकित्सालय- 18000000

जोधपुर. डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज संबद्ध अस्पतालाें में सफाई के नाम पर सालाना लगभग 6 करोड़ 22 लाख रुपए व्यय किए जा रहे है। अफसोस हैं कि इसके बावजूद यहां साफ-सफाई नजर नहीं आती। शौचालयों की बात की जाए तो मरीज व उनके परिजन अंदर घुसना तक पसंद नहीं करते, लेकिन ये मरीजों की मजबूरी हैं कि उन्हें शौचालय का इस्तेमाल करना पड़ता है। जबकि कई मरीजों के परिजनों को बाहर पैसे देकर सुलभ कॉम्पलैक्स का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इन अव्यवस्थाओं को लेकर अस्पताल प्रशासन भी जिम्मेदार ठेकेदारों पर किसी प्रकार का एक्शन नहीं ले रहे।
jodhpur hospital: तीनों अस्पतालों की सफाई पर 6.22 करोड़ रुपए खर्च, ये हालात देखकर कैसे माने
jodhpur hospital: तीनों अस्पतालों की सफाई पर 6.22 करोड़ रुपए खर्च, ये हालात देखकर कैसे माने
मथुरादास माथुर अस्पताल, महात्मा गांधी अस्पताल और उम्मेद तीनों अस्पतालों में शौचालय में गंदगी दिखना और बदबू आना आम बात है। करोड़ों रुपए खर्च के बावजूद भी सरकार इन समस्याओं से निजात नहीं दिला पाई। अस्पताल के स्टाफ स्वयं कहते हैं कि सफाईकर्मी रगड़कर कभी भी सफाई नहीं करते। इस कारण दाग रह जाते हैं। जबकि मरीज अस्पतालों में स्वस्थ होने आते है, ऐसे में उन्हें गंदगी के कारण दूसरे बैक्टिरिया से सामना करना पड़ रहा है।स्टाफ के बाथरूम सफाई से लबरेज
वहीं अस्पताल में डॉक्टर्स व नर्सिंग स्टाफ के बाथरूम में सफाई भरपूर है। यहां अंदर फिनाइल की खुशबू आदि भी होती है। यहां सफाई नहीं होती तो स्टाफ शिकायतें कर सफाई करवा देता है। जबकि मरीज-परिजनों की यहां सुनवाई तक नहीं होती। जबकि दूसरी ओर मरीजों के बाथरूम में पैर रखने तक की जगह नही है। वहीं मरीजों के स्नानघर भी साफ नहीं है। इनमें भी जोरदार बदबू आती है।
लोग भी नहीं अवेयर

सरकारी अस्पतालों के बाथरूम गंदगी से अटे पड़े है। इसका मुख्य कारण लोगों की भी जागरूकता की कमी है। कई बार लोग अस्पतालाें के फर्श पर खाने के खाली पैकेट व बिना दरी-पट्टी बिछाए खाने की झूठन छोड़ देते है। शौचालयों में पान-गुटखे की पीक तक थूक देते हैं।
एम्स से सिखने की जरूरत

साफ-सफाई व मेंटेनेंस को लेकर एम्स काफी सजग है। इन अस्पतालाें को एम्स से सिखने की भी जरूरत है। जबकि यहां बायोवेस्ट निस्तारण भी ढंग से किया जाता है। इस बात को बायोवेस्ट उठाने वाली कंपनी भी मानती है। इस मामले में लोगों के समक्ष एम्स की छवि भी बढि़या है।
इनका कहना हैं....जो कमी है, उसे सुधारा जाएगा। इसमें जनता की भी भागीदारी चाहिए। लोग अस्पताल में गंदगी नहीं करे व पीक आदि न थूकें। सभी मिलकर ही अस्पताल को साफ-सुथरा रख पाएंगे।

- डॉ. एसएस राठौड़, प्रिंसिपल, डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज

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