एक दिव्यांगों की मां, दूसरी बेसहारा बुजुर्गों की बेटी

एक दिव्यांगों की मां, दूसरी बेसहारा बुजुर्गों की बेटी
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अपने लिए जीए तो क्या जीए, तू जी एे जमाने के लिए। अपने लिए तो सभी जीते हैं, मजा तो तब है कि जब दूसरों के लिए जीया जाए। सूर्यनगरी शहर में कुछ समाजसेवी एेसे हैं जिन्होंने अपनी एक अलग पहचान कायम की है। उन्होंने अपना जीवन दूसरों के लिए ही जीया और परायों को अपना बना लिया। उनमें एक रिश्ता कायम हो गया।

एमआई जाहिर/जोधपुर

जोधपुर. अपणायत का शहर जोधपुर प्रेम और सेवा की भावना से लबरेज है। यह विशेषता ही इस शहर की पहचान और परंपराओं की विरासत है। शहर में कुछ समाजसेवकों ने परायों और जरूरतमंदों के साथ एक भावनात्मक रिश्ता बना कर उन्हें अपना बना लिया है। 

दरकते रिश्तों के इस दौर में 

कोई अनाथों के पिता की हैसियत रखता है, कोई महिला दृष्टिबाधितों की मां, तो कोई बेसहारा बुजुर्गों की बेटी मानी जाती है। टूटते परिवारों और दरकते रिश्तों के इस दौर में सनसिटी की एेसी दो महिलाओं से परिचय करवाते हैं, जो अलग-अलग कर्म क्षेत्र में मां और बेटी के रूप में जानी जाती हैं।

ममता की मूरत प्यारी सी सूरत

दिव्यांगों व दृष्टिबाधितों के लिए ममता की मूरत और प्यारी सी सूरत का नाम है 76 वर्षीया सुशीला बोहरा। जब उन्होंने देखा कि दिव्यांगों और विशेषकर दृष्टिहीनों के लिए कोई आवासीय विद्यालय नहीं है, तब उन्होंने नेत्रहीन  विकास संस्थान की स्थापना की। 

लाखों का पैकेज पा रहे

कम उम्र में पति पारसमल बोहरा के निधन के बाद वर्ष 1962 में सेवा की प्रबल इच्छा के साथ विधवाओं और दिव्यांग महिलाओं की बेहतरी के लिए अपने कैरियर की शुरुआत की। सेवा के कारण महिला व बाल विकास विभाग व जिला महिला विकास अभिकरण से भी जुड़ी रहीं। उनकी सेवा भावना के कारण ही आज कई दृष्टिबाधित प्राइवेट सेक्टर में लाखों का पैकेज पा रहे हैं, तो कई दृष्टिबाधित सरकारी नौकरी कर रहे हैं।

सेवा की पर्याय

कमला नेहरू नगर स्थित नेत्रहीन विकास संस्थान की संचालिका सुशीला मूक-बधिर बच्चों के अध्ययन और आवास में अहम भूमिका निभाती हैं। वे विमंदित छात्र-छात्राओं के लिए निशुल्क शिक्षा का इंतजाम करती हैं। बोर्डिंग में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग से व्यवस्था है। 

सैकड़ों विद्यार्थी अध्ययन कर चुके 

उन्होंने केवल दो दृष्टिहीनों से यह संस्थान शुरू किया था। आज यहां सैकड़ों विद्यार्थी अध्ययन कर चुके हैं। वे दृष्टिबाधितों के लिए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी का भी प्रबंंध करती हैं और उनका विवाह भी करवाती हैं। 


इसके अलावा विधवाओं और जरूरतमंद महिलाओं के लिए रोजगार का भी इंतजाम करती हैं। उनकी इस सेवा भावना के कारण दृष्टिबाधित विद्यार्थी उन्हें मां मानते हैं और वे भी विद्यार्थियों पर ममता लुटाती हैं।

संस्थान को पुरस्कार

शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री व चार शिक्षकों को राष्ट्रपति से सम्मान मिल चुका है। यहां के छात्र छात्राओं को स्कूली ही नही,राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर भी कई बार पदक और पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 

इन विद्यार्थियों को शिक्षा संगीत प्रतियोगिताओं और खेल के क्षेत्र में तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राज्य अमरीका में आयोजित पैरा ओलंपिक खेलों में 5 पदक भी मिल चुके हैं। हाल ही लायंस क्लब इंटरनेशनल से सम्मानित किया जा चुका है। 


उनकी संस्था को संयुक्त राष्ट्र संघ ने सन 2010 में दुनिया का सबसे अच्छा एनजीओ घोषित किया। उन्हें मारवाड़ रत्न, जिमखाना महिला शक्ति पुरस्कार, जोधपुर गौरव अलंकरण आदि जिला व राज्य सम्म्मान से नवाजा जा चुका है।

असहाय वृद्धों की लाडली बिटिया रानी

बेसहारा बुजुर्गों की लाडली बिटिया रानी की हैसियत रखने वाली अनुराधा आडवाणी ने जब देखा कि लोग अपने बूढ़े मां-बाप को या तो छोड़ देते हैं या घर छोडऩे के लिए मजबूर कर देते हैं, तब उनके लिए प्यार और दुलार से भरा घर का सपना देखा। 

एेसा घर, जहां उनके खाने-पीने और रहने का इंतजाम हो, उनकी सेवा हो और हर तरह से हर काम उनके मुताबिक ही हो। तब उन्होंने एक बड़ा घर बनाया, जिसे अनुबंध वृ़द्धजन कुटीर नाम दिया। आज कई बुजुर्ग उनके हाथ से ही खाना खासैकड़ों विद्यार्थी अध्ययन कर चुके ते हैं और प्रेम के रिश्ते की डोर देखें कि जब तक एक नजर उन्हें न देख लें, तब तक चैन नहीं पड़ता। 

वे इलाज के लिए उन्हें अस्पताल भी ले जाती हैं। ये बुजुर्ग सेवा से इतने खुश हुए कि उन्हें बेटी का दर्जा दे दिया और इस तरह वे इन सबकी बेटी हो गईं।

क्या है खूबी ?

समाज कल्याण विभाग के पास करोड़ों की लागत से बना अपना खुद का वृद्धाश्रम है, लेकिन वहां बुजुर्गों के रहने की कोई व्यवस्था नहीं है। जो काम इस विभाग को करना चाहिए था, वह अनुराधा आडवाणी ने कर दिखाया है।

उन्होंने 14 वर्ष पूर्व 'अनुबंध वृद्धजन कुटीर बनाया। यहां 12 हॉल, 6 कपल्स रूम हैं और उनमें 75 बुजुर्ग रहते हैं। वे हर व्रत-त्योहार, जन्मदिन व सालगिरह से लेकर अंतिम संस्कार तक सभी व्यवस्थाएं करती हैं। यहां सैकड़ों बुजुर्ग रह चुके हैं।

अनुराधा आडवाणी : कुछ और पहलू

वे अंग्रेजी व हिन्दी उद्घोषिका, कम्पेअर व एन्कर हैं और यूजीसी ईएमएमआरसी के लगभग 300 वृतचित्रों में अपनी आवाज़ दे चुकी हैं। एक अंग्रेजी फिल्म के अलावा कई टीवी सीरियलों व फिल्मों और कई नाटकों में अभिनय कर चुकी हैं। 

मधुर संचालन के लिए उन्हें 'सरस्वती-पुत्री और सेवा के लिए बेसहारों की बेटी आदि सम्मान से नवाजा ग़या है। वहीं समाजसेवा के लिए शहर, प्रदेश और प्रदेश के बाहर भी कई सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।


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