जोधपुर : टिकट को संग्रह करने के लिए जुड़ा दिल का तार

-कर दिए दो हजार से अधिक दुर्लभ डाक टिकटों का संग्रह
- पांच दशक से बरकरार है प्रेम

By: Arvind Singh Rajpurohit

Published: 10 Mar 2018, 08:54 PM IST


बासनी(जोधपुर). जिंदगी में हर किसी को किसी न किसी प्रकार का शौक होता है चाहे यह शौक गायन का हो , वादन का या फिर कुछ और। इन सबसे हटकर बासनी क्षेत्र में एक व्यक्ति ऐसे भी हैं जिनको डाक टिकट संग्रह करने का शौक है और इसी शौक की बदौलत वे अब तक दो हजार के करीब डाक टिकट का संग्रह कर चुके हैं। सरस्वती नगर के सी सेक्टर में रहने वाले विशन सिंह खींची, ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने भावी पीढ़ी को पुराने दौर के डाक टिकट से रूबरू करने के लिए इस शौक को पाला। आज इनके पास देश ही नहीं विदेशों के डाक टिकटों का संग्रह है। आज के अंक में खींची के शौक की कहानी।

1966 से हुई शुरुआत
खींची बताते हैं कि बात उस समय की है जब वो कक्षा 8 में पढ़ाई करते थे। उस दौरान स्कूल समय में उनके गुरुजी ने पुराने जमाने की दुर्लभ होती वस्तुओं का संग्रह करने के बारे में बताया। इसी बात को गंभीरता से लेते हुए खींची ने मन में डाक टिकटों के संग्रह करने का मानस बनाया। बस तभी से ही सिर पर डाक टिकट संग्रहण का जुनून सिर पर सवार हुआ जो शिक्षा, नौकरी व रिटायरमेंट के बाद भी जारी है।

देश व विदेश तक का है संग्रह
खींची के पास अब तक ब्राजील, आस्ट्रेलिया, अमरीका, चेक गणराज्य सहित विभिन्न देशों के उन डाक टिकटों का संग्रह है जो वर्तमान में विदेशी लोगों के पास भी मिलना मुश्किल है। इनमें से कई नामी हस्तियों पर जारी हुए टिकट हैं तो कई टिकट विदेशी संस्कृति की विशेषताएं बताते हैं। वहीं बात की जाए देश की तो इनके पास टिकटों की भरमार है। भारत में पंचायत राज की स्थापना पर जारी हुए टिकट से लगाकर, नेहरु, शास्त्री सहित विभिन्न हस्तियों पर जारी हुए टिकट हैं।

अब मिलना भी मुश्किल
विशन सिंह के पास डाक टिकटों का जो संग्रह है वैसा वर्तमान में शायद ही किसी और व्यक्ति के पास हो। इसे टिकट के प्रति प्रेम कहें या शौक को पूरा करने का जुनून खींची इन टिकटों को आज भी वैसे ही संभाल कर रखें हुए हैं, जैसे टिकट खरीदते समय थे। उनका कहना है कि वो इन टिकटों का संग्रह इसलिए कर रहे हैं क्योंकि आने वाले पीढिय़ों को इन टिकटों के बारे में व डाक के इतिहास के बारे में बता सकें।

प्राचीन सिक्कों का भी संग्रह
खींची का शौक यहीं समाप्त नहीं हुआ। उनके पास12वीं शताब्दी से पूर्व के समय के प्राचीन सिक्कों का संग्रह हैं। जिनमें से कई तो बहुत ही दुर्लभ हैं। प्राचीन दौर के मुगलकालीन शासन से पूर्व के भी सिक्के इनके पास हैं।
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Arvind Singh Rajpurohit
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