scriptLast Somvati Amavasya of this year on 30th May | इस साल की अंतिम सोमवती अमावस्या 30 मई को....जानें क्या है महत्व | Patrika News

इस साल की अंतिम सोमवती अमावस्या 30 मई को....जानें क्या है महत्व

सुकर्मा व धृति योग से बढ़ा वट सावित्री व्रत का महत्व

 

जोधपुर

Published: May 17, 2022 01:21:35 pm

जोधपुर. इस साल 30 मई सोमवार को पड़ने वाली सोमवती अमावस्या वर्ष 2022 की अंतिम सोमवती अमावस्या होगी। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और पीपल के पेड़ की परिक्रमा करती हैं। इसीलिए शास्त्रों में इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत की भी संज्ञा दी गयी है। 30 मई को ही वट अमावस्या यानी बरगद अमावस्या भी है। आखिरी सोमवती अमावस्या के दिन सुकर्मा व धृति योग का शुभ संयोग बन रहा है। खास बात यह है कि इस दिन वट सावित्री व्रत भी रखा जाएगा। इस साल 2022 में पहली सोमवती अमावस्या 31 जनवरी को थी और दूसरी सोमवती अमावस्या 30 मई को पड़ रही है। इसके बाद इस साल कोई भी सोमवती अमावस्या नहीं आएगी। जिसके कारण इस अमावस्या का महत्व और बढ़ रहा है। ज्योतिष शास्त्र में सुकर्मा योग को शुभ योगों में गिना जाता है। मान्यता है कि इस योग में किए गए कार्यों में सफलता जरूर मिलती है। यह योग भी 30 मई को हो रहा है। सोमवती अमावस्या के दिन धृति योग किसी भवन एवं स्थान का शिलान्यास, भूमि पूजन या नींव पत्थर रखने के लिए उत्तम माना गया है।
इस साल की अंतिम सोमवती अमावस्या 30 मई को....जानें क्या है महत्व
इस साल की अंतिम सोमवती अमावस्या 30 मई को....जानें क्या है महत्व
सौभाग्य की प्राप्ति के लिए होता है पूजन

सोमवती अमावस्या के दिन सुहागिनें पीपल के वृक्ष की पूजा करती हैं। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।सोमवती अमावस्या के दिन भगवान शंकर की विधिवत पूजा की जाती है। मान्यता है कि भगवान शिव की पूजा करने से चंद्रमा मजबूत होता है। दिवंगत पूर्वजों के नाम का तर्पण व दान करना शुभ माना जाता है।
सोमवती अमावस्या तिथि

अमावस्या तिथि प्रारम्भ - 29 मई रविवार, दोपहर 2:54 से

अमावस्या तिथि समाप्त - 30 मई ,2022, सोमवार शाम 4:59 पर

सारे व्रतों में वट सावित्री व्रत को प्रभावी
ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले सारे व्रतों में वट सावित्री व्रत को प्रभावी माना जाता है। जिसमें सौभाग्यवती महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सभी प्रकार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इस दिन जल से वटवृक्ष को सींचकर उसके तने के चारों ओर कच्चा धागा लपेटकर परिक्रमा कर पति के लंबे उम्र की कामना की जाती है। ज्योतिष अनीष व्यास ने बताया कि व्रत में सत्यवान और सावित्री की कथा का श्रवण किया जाता है।

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