Pesrsonality development गुरु अरविंद भट्ट बता रहे हैं पर्सनैलिटी डवलपमेंट टिप्स:

MI Zahir

Publish: Apr, 17 2019 04:22:22 PM (IST) | Updated: Apr, 17 2019 04:22:23 PM (IST)

Jodhpur, Jodhpur, Rajasthan, India

एम आई जाहिर/जोधपुर. टाइम सेविंग मैनेजमेंट + सेल्फ कमिटमेंट + टारगेट = मिशन सक्सेस। पर्सनैलिटी डवलपमेंट ( Pesrsonality development ) गुरु व वरिष्ठ रंगकर्मी अरविंद भट्ट ( Arvind bhutt ) आपको बता रहे हैं कि आपके लिए यह कितना आसान है। जानिए उन्हीं के शब्दों में:

मनमोहक शब्द है पर्सनैलिटी डवलपमेंट

पर्सनैलिटी डवलपमेंट गुरु अरविंद भट्ट ने बताया कि बड़ा ही मनमोहक शब्द है पर्सनैलिटी डवलपमेंट 'व्यक्तित्व विकास ( Pesrsonality development ) । व्यक्तित्व के दो आयाम होते हैं : बाहरी व्यक्तित्व और आंतरिक व्यक्तित्व। इन दोनों आयामों के भी दो प्रकार होते हैं : आनुवांशिक और वातावरण जनित। अनुवांशिक व्यक्तित्व चूंकि हमारे नियंत्रण में नहीं है इसलिए इस विषय में यहां चर्चा नहीं करूंगा। वातावरण जनित आंतरिक एवं बाहरी व्यक्तित्व में सोच, नजरिया, ज्ञान, शरीर सौष्ठव, चाल ढाल, वेशभूषा वाक कौशल और अन्यान्य व्यवहार कौशल को समाविष्ट किया जाता है। इन सभी गुणों का विकास ही व्यक्तित्व विकास है।

सफलता की आकांक्षा की पूर्ति

उन्होंने बताया कि व्यक्तित्व विकास का उद्देश्य है - सफलता की आकांक्षा की पूर्ति। सफलता को कोई एक परिभाषा देना कठिन है। अलग-अलग लोगों के लिए सफलता का अर्थ अलग-अलग होगा। राजनीतिक रूप से महत्वाकांक्षी युवक के लिए राष्ट्रीय। अंतरराष्ट्रीय स्तर का नेतृत्व कर पाना सफलता होगा। विद्यार्थी की सफलता परीक्षा में अच्छे अंक लाने में निहित होगी। बॉलीवुड कलाकार के लिए 100 करोड़ क्लब में शामिल होना संन्यासी के लिए आध्यात्मिक चरमोत्कर्ष सफलता होगी।

लक्ष्यों को प्राप्त करना होगा

भट्ट ने बताया कि एक बात निश्चित है कि ' अपने स्वयं के लक्ष्यों की प्राप्ति ही सफलता होती है। अत: सफल होने के लिये लक्ष्यों को प्राप्त करना होगा। लक्ष्यविहीन जीवन जीने के लिए लक्ष्य पूर्व निश्चित होना चाहिए। थोड़ी सी बात विद्यार्थियों के लिए कर लें। विद्यार्थियों के तात्कालिक और दूरगामी दोनों लक्ष्य स्पष्ट होने चाहिए। जैसे -मुझे कक्षा बारहवीं अच्छे नंबरों से उत्तीर्णं करनी है। यह सही लक्ष्य नहीं है। सही लक्ष्य है- मुझे बारहवीं कक्षा में 88 प्रतिशत अंक लाने हैं। इसके अतिरिक्त लक्ष्य पूर्ति की समय सीमा भी निश्चित होनी चाहिए। जैसे -मैं 5 किलो वजन कम करना चाहता हूं- यह सही लक्ष्य नहीं है। सही लक्ष्य है- मुझे 45 दिन में 5 किलो वजन कम करना है। सिर्फ लक्ष्य निश्चित कर लेने से सफलता मिलती तो आनंद आ जाता। किंतु ऐसा होता नहीं है।

कार्ययोजना भी बनानी होती है

उन्होंने बताया कि लक्ष्य पूर्ति के लिए कार्ययोजना भी बनानी होती है। कार्ययोजना क्रियान्वित भी करनी होती है। लक्ष्यों को छोटे-छोटे लक्ष्यों में बांट कर प्रत्येक छोटे लक्ष्य की समय सीमा तय करनी होगी। ढेरों अनावश्यक गतिविधियों से खुद को मुक्त करना होगा। छोटी सी सलाह देता हूं विद्यार्थियों को-20 मिनट नींद में कटौती करें, 20 मिनट टीवी मोबाइल से कम करें और 20 मिनट 'निकम्मी हथाई यानी फालतू की गपशप में से बचाएं तो प्रतिदिन 60 मिनट यानी एक घंटा बचा लेंगे। आपके अगले 60 वर्षों में बचत होगी कुल 40 हजार मिनटों की। लीजिए सफलता का मंत्र हुआ- सुनियोजित समय प्रबंधन से लक्ष्य प्राप्त करना।

 

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