scriptMade fake certificates of silicosis disease for financial assistance | सरकारी आर्थिक सहायता के लिए सिलिकोसिस बीमारी के फर्जी प्रमाण पत्र बनाए, छह गिरफ्तार | Patrika News

सरकारी आर्थिक सहायता के लिए सिलिकोसिस बीमारी के फर्जी प्रमाण पत्र बनाए, छह गिरफ्तार

- एजेंट व ई-मित्र संचालक भी गिरफ्त में

जोधपुर

Updated: December 24, 2021 01:35:07 am

जोधपुर.
देवनगर थाना पुलिस ने सरकार से आर्थिक राहत पाने के लिए सिलिकोसिस बीमारी के फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के मामले में गुरुवार को दो महिलाओं सहित छह जनों को गिरफ्तार किया। इनमें हजारों रुपए के बदले फर्जी दस्तावेज बनाने वाला एक एजेंट व ई-मित्र संचालक भी शामिल है।
थानाधिकारी जयकिशन सोनी ने बताया कि राज्य सरकार सिलिकोसिस पीडि़त को तीन लाख रुपए, 15 सौ रुपए मासिक पेंशन व मृत्यु होने पर परिजन को दो लाख रुपए देती है। यह सरकारी सहायता प्राप्त करने के लिए बीमारी से जुड़े फर्जी प्रमाण पत्र व अन्य दस्तावेज बनाने के मामले में आवेदन भोपालगढ़ के भाकरी में चौकीदारों का बास निवासी निरमा पत्नी उगराराम, छापला निवासी सुमन पत्नी घनश्याम, पालड़ी के नागलवास निवासी गुलाम नबी पुत्र लाल खान व भोपालगढ़ निवासी सलीम पुत्र सद्दीक, आसोप थानान्तर्गत चौकीदारों का बास निवासी एजेंट दिनेश पुत्र मोहनराम बावरी और भोपलागढ़ में कुम्भारा निवासी ई-मित्र संचालक प्रकाश पुत्र भगानराम बावरी को गिरफ्तार किया गया। इनमें दिनेश एजेंट व प्रकाश ई-मित्र संचालक है। शेष चारों ने सिलिकोसिस पीडि़त बनकर प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किए थे। इस कार्रवाई में उप निरीक्षक सोहनलाल, कांस्टेबल राकेश व शिमला शामिल रहे।
आवेदन की जांच में रिकॉर्ड न मिलने पर संदेह
गत 11 सितम्बर को डॉ एनएस मेडिकल कॉलेज की न्यूकोमोन्योसिस बोर्ड के अध्यक्ष डॉ पीसी व्यास ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था। कमला नेहरू वक्ष चिकित्सालय में सिलिकोसिस पीडि़त की जांच कर वर्ष 2013 से प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं। अप्रेल 2018 तक ऑफलाइन प्रमाण पत्र जारी होते थे। इसके बाद ऑनलाइन प्रमाण पत्र जारी किए जाने लगे थे। कुछ माह पूर्व कुछ व्यक्ति टीबी अस्पताल पहुंचे और वर्ष 2016 में सिलिकोसिस पीडि़त होने के प्रमाण पत्र पेश किए थे। उनका कहना था कि प्रमाण पत्र जारी किए जाने के बावजूद आर्थिक सहायता नहीं मिल रही है। इस संबंध में रिकॉर्ड की जांच की गई तो प्रमाण पत्र फर्जी निकले थे।
एक्स-रे जांच में दूसरा व्यक्ति मिला
टीबी अस्पताल के रेडियोग्राफर प्रभारी ने गत 17 अगस्त को बोर्ड को अवगत कराया कि सिलिकोसिस जांच के दौरान एक व्यक्ति ने अपने दस्तावेज जमा कराए थे। फिर जब एक्स-रे कराया गया तो उसकी जगह कोई दूसरा व्यक्ति पाया गया था। निरमा, सुमन, गुलाब नबी व सलीम के प्रमाण पत्र जाली निकले थे।
ऑफलाइन समयावधि के बनवाए फर्जी प्रमाण पत्र
दिनेश सिलिकोसिस मरीजों के वेलफेयर से जुड़े ट्रस्ट में बतौर स्वयं सेवक कार्य करता है। सरकारी सहायता का लाभ उठाने के लालच में उसने अन्य आरोपियों से सम्पर्क किया था। फर्जी प्रमाण पत्र जारी कराने के लिए तैयार किया था। ई-मित्र संचालक प्रकाश से फर्जी दस्तावेज व प्रमाण पत्र बनवाए थे। उसने वर्ष 2016 के प्रमाण पत्र बनवाए थे। जब प्रमाण पत्र ऑफलाइन बनते थे। एजेंट दिनेश व प्रकाश के बनाए प्रमाण पत्र लेकर आरोपी टीबी अस्पताल पहुंचे और न्यूमोकोन्यासिस बोर्ड के समक्ष पेश किए थे। जो जांच में फर्जी पाए गए थे।
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