ऱामापीर मंदिर में माघ मेला आज से

 

आस्था के कारण विभाजन के समय पाकिस्तान के खिप्रो से लाई गई थी रामपीर की मूर्ति

By: Nandkishor Sharma

Published: 20 Feb 2021, 11:59 PM IST

जोधपुर. सरदारपुरा 11 वीं सी रोड स्थित रामापीर मंदिर में रविवार से माघ उत्सव मनाया जाएगा। मंदिर के वर्तमान महंत भाऊ कन्हैयालाल ने बताया कि सरकार व प्रशासन के निर्देशानुसार गाइड लाइन की पालना करते हुए धार्मिक आयोजन किए जाएंगे। रविवार को सुबह नवम की ध्वजा मंदिर शिखर पर चढ़ाई जाएगी। इसी कड़ी 23 से 25 फरवरी तक सत्संग-कीर्तन, पल्लव अरदास व सम्मान समारोह का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि रामापीर मंदिर में माघ महीने और भाद्रपद मास में दो बार रामदेव मेले का आयोजन किया जाता हैं जिसमें जोधपुर सहित दुबई, इंडोनेशिया, जकार्ता, पौलेण्ड आदि देशों से भी बाबा के भक्त भी भाग लेते हैं। भाद्रपद मास में नवमी तिथि से त्रयोदशी तक मेला कोरोना महामारी के कारण स्थगित किया गया था।

सर्वधर्म के श्रद्धालुओं के लिए आस्था स्थल
प्रतिष्ठित बाबा रामदेव की मूर्ति भारत के विभाजन के समय 1947 में पाकिस्तान के खिपरो शहर से लाई गई थी। बाबा रामदेव की अनूठी भक्त माता आसरी बाई की लोक देवता रामदेव बाबा के प्रति गहरी आस्था के कारण कई मुश्किलों के बावजूद श्रद्धालुओं के सहयोग से मूर्ति लेकर सर्वप्रथम बाड़मेर पहुंची थी। विभाजन से पहले पाकिस्तान के सिंध के खिपरो में हर साल भाद्रपद मास में होने वाले बाबा रामदेव मेले के दौरान वर्तमान रामापीर मंदिर में स्थापित बाबा रामदेव की मूर्ति का भव्य पूजन और मेला होता था। बाड़मेर से बाद में मूर्ति को 1972 में जोधपुर लाने के बाद कुछ समय तक सरदारपुरा के विभिन्न क्षेत्रों में किराए के घरों में रखा गया। क्षेत्र के 11 वीं सी रोड स्थित मंदिर निर्माण के बाद 1972 में भाऊ रामचन्द्र के सान्निध्य में मूर्ति की विधिवत पुनप्र्राणप्रतिष्ठा की गई। रामापीर मंदिर सिंधी समाज सहित सर्वधर्म के श्रद्धालुओं के लिए आस्था स्थल है। मंदिर में दशकों से अखंड ज्योत प्रज्ज्वलित है।

Nandkishor Sharma Desk
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