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Makar Sankranti से क्यों भड़कने लगते हैं दिन

मकर संक्रांति का पर्व शुक्रवार को पारम्परिक हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। जोधपुर में मकर संक्रांति की पूर्व संघ्या पर बाजारों में तिल से बनी सामग्री आदि की खरीदारी के लिए Corona के खोौफ के बीच भी काफी भीड़ रही

जोधपुर

Published: January 13, 2022 08:07:10 pm

जोधपुर। क्या आपको पता है संक्रांति के बाद से सर्दी का असर धीरे-धीरे कम क्यों होने लगता है। वैज्ञानिक रूप से देखें तो Makar Sankranti के दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाते हैं। प्रदेश के राजस्थान में तो पारम्परिक रूप से इस कहावत में भी कहा गया है कि तिल तड़क्या, दिन भड़क्या यानी संक्रांति के दिन से सूर्यदेव का तेज Solar Power धीरे धीरे बढ़ने लगता है और दिन के वक्त का तापमान भी इससे चढ़ने लगता है।
Makar Sankranti से क्यों भड़कने लगते हैं दिन
Makar Sankranti से क्यों भड़कने लगते हैं दिन
Makar Sankranti 2022 इस बार शुक्रवार को पारम्परिक हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस दिन मारवाड़ में दान-पुण्य और पवित्र सरोवरों के जल से स्नान करने की परम्परा है। घरों में तिल से बने व्यंजन, दाल के पकोड़े आदि बनाए जाते हैं। बहन-बेटियों के यहां तिल से बने व्यंजन व अन्य उपहार भेजे जाते हैं।
दोपहर 2.28 बजे सूर्य का मकर राशि में प्रवेश

सूर्यदेव मकर राशि में 14 जनवरी को दोपहर 2.28 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे। पारम्परिक स्नेह और मधुरता के पर्व पर सूर्यनगरी में घरों में पकौड़े- गुळगुले और बाजरे का खीच बनाने की परम्परा का भी निर्वहन किया जाएगा। विवाहित पुत्रियों को तिल से बने व्यंजन गजक आदि भेजे जाएंगे। संक्रांति पुण्यकाल में तीर्थ स्नान तथा गुड़ तिल-तेल से निर्मित वस्तुओं,घी व ऊनी वस्त्र के दान का महत्व बताया गया है।
खत्म हो जाएगा मळमास

सूर्य मकर राशि में प्रवेश के साथ ही मळमास भी समाप्त हो जाएगा। ‘मळमास’ समाप्त होने पर एक माह से रूके हुए गृहप्रवेश, मुंडन संस्कार, यज्ञोपवीत, विवाह आदि शुभ कार्य के लिए भी मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। ज्योतिषियों के अनुसार इस बार मकर संक्रांति को रोहिणी नक्षत्र, आनंदादि और ब्रह्म योग बनने से स्नान और दान-पुण्य का फल अनंत गुणा अधिक माना गया है। मकर संक्रांति को पुण्यकाल व तर्पण का उत्तम समय दोपहर 2.43 से शाम 5.45 बजे तक माना गया है। रोहिणी नक्षत्र रात 8.18 बजे तक रहेगा। मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में महिलाओं की ओर से पारम्परिक तेरूंडे की वस्तुओं की खरीदारी के कारण प्रमुख बाजारों में दिन भर रौनक छाई रही।
महिलाएं बांटेगी तेरूंडा

मकर संक्रांति को Jodhpur में व्रती महिलाएं प्रति वर्ष अपने सामथ्र्यनुसार तेरह अलग-अलग तरह की वस्तुएं तेरूंडे के रूप में अपनी निकटतम महिला रिश्तेदारों को भेंट देने की परम्परा का निर्वहन करेंगी। त्रिपोलिया सहित शहर के प्रमुख बाजार में महिलाओं की ओर से पारम्परिक तेरूंडे की वस्तुओं की खरीदारी के चलते रौनक रही।
नवचेतना का संदेश देता है उत्तरायण
Makar Sankranti को सूर्य उत्तरायण का होना शास्त्रों में बेहद शुभ और देवताओं का समय बताया गया है। ज्योतिष डा. अनीष व्यास ने बताया कि महाभारत काल में गंगा पुत्र भीष्म ने छह माह तक बाणों की शैय्या पर लेटकर सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार किया था और मकर संक्रांति के दिन अपने प्राण त्यागे थे। मकर संक्रांति का पर्व जीवन में बदलाव का पर्व है । यह सूर्य के सिर्फ राशि परिवर्तन की तिथि नहीं है, बल्कि जीवन में नवचेतना की ओर बढऩे का संदेश देता है।

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