vidio बेसहारा बच्चियों की मदद के लिए बढ़े कई हाथ

Manish Panwar

Publish: Mar, 11 2018 10:27:11 PM (IST)

Jodhpur, Rajasthan, India

 

भोपालगढ़. अपने मां-बाप के दुर्घटना में निधन के बाद बेसहारा हुई मेघवालों के बास की मासूम बच्चियों कुसुम व दीपिका की मार्मिक खबर राजस्थान पत्रिका में पढऩे के मदद के लिए कस्बे के कई लोग आगे आए हैं। वहीं स्थानीय प्रशासन ने भी इन बच्चियों को केन्द्र व राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित करने के लिए कवायद शुरु की है। इन बच्चियों के लिए अब तक दो लाख रुपए से ज्यादा की आर्थिक मदद की घोषणा की जा चुकी है। युवा सोशल मीडिया पर मदद के लिए और राशि जुटाने का प्रयास कर रहे है।

मदद के लिए उठे कई हाथ

इस खबर के प्रकाशन के बाद उपखंड अधिकारी डॉ. रामानंद शर्मा ने ग्रामसेवक के माध्यम से पीडि़त परिवार की स्थिति की रिपोर्ट और आवश्यक प्रमाण पत्रों की सूची मंगवाई है, ताकि इन बच्चियों व बूढ़े दादा-दादी को केंद्र व राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जा सके। इसके साथ ही पूर्व सांसद बद्रीराम जाखड़ ने भी इन दोनों बच्चियों के नाम २५-२५ हजार की एफडी करवाने की घोषणा की है। जबकि स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता एवं राजीव गांधी युवा क्लब भोपालगढ़ के संस्थापक अध्यक्ष शिवकरण सैनी ने भी दोनों बच्चियों के नाम से केंद्र सरकार की सुकन्या समृद्धि योजना में खाता खुलवाकर प्रतिमाह अपनी ओर से राशि जमा करवाने की घोषणा की है। साथ ही इस योजना में अन्य लोगों को भी जोड़कर प्रतिमाह जमा करवाई जाने वाली राशि को बढ़ाने का संकल्प किया है। जिससे कि इन बालिकाओं के बालिग होने तक सुकन्या समृद्धि योजना में समुचित राशि एकत्रित हो सके।
सोशल मीडिया से जुटा रहे हैं सहयोग

वहीं दूसरी ओर युवा कार्यकर्ता एवं शिक्षक गणपतराम मेघवाल नाड़सर ने भी व्हाट्सअप पर 'कुसुम-दीपिका सहायता कोषÓ नाम से एक ग्रुप बनाया है और उसमें लोगों से इन बच्चियों के सहयोग के लिए आह्वान किया है। जिसके तहत शनिवार शाम 6 बजे तक करीब 100 से अधिक लोगों ने लगभग एक लाख से अधिक की राशि देने की घोषणा की है और कई लोगों ने नकद राशि भी जमा करवाई है। वहीं कस्बे के बरसों तक सरपंच रहे वरिष्ठ किसान नेता स्वर्गीय लक्ष्मणराम चौधरी की पुत्री एवं कर्मचारी नेता यशोदा चौधरी ने भी इन दोनों बच्चियों के घर जाकर इनकी सार-संभाल की और अपने कर्मचारी साथियों से सोशल मिडिया के माध्यम से सहयोग राशि जुटाने की कवायद शुरू की है। जिसके तहत उन्होंने अब तक करीब 5० हजार रुपए की राशि इन बच्चियों के लिए जुटाई है। वहीं कई अन्य भामाशाहों ने भी इन बच्चियों के सहयोग के लिए पहल करने के साथ ही उनके परिजनों से संपर्क किया है। स्थानीय मेघवाल समाज एवं कई स्वयंसेवी संगठनों ने राजस्थान पत्रिका का आभार जताया है।

राजस्थान पत्रिका ने बयां किया था दर्द-

गौरतलब है, कि राजस्थान पत्रिका ने अपने शनिवार के अंक में 'न रहमतों का साया, न ममता का आंचलÓ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर कस्बे के मेघवालों के बास निवासी इन बिन मां-बाप की अबोध बच्चियों को एक सड़क हादसे में एक ही पल में इनके माता-पिता की दर्दनाक मौत के बाद मिले जीवन भर के दर्द को बयां किया था। जिसमें बताया गया कि कस्बे के मेघवालों के मोहल्ले में रहने वाले तीस वर्षीय युवक ओमप्रकाश मेघवाल व उनकी पत्नी धापूदेवी की होली की रात एक सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई थी और इस हादसे के समय उनके साथ मौजूद दो मासूम बच्चियां कुसुम व दीपिका कुदरत की मेहरबानी से जिंदा बच गई। मां-बाप का साया गंवाकर अनाथ हो चुकी इन दोनों बच्चियों को पालन-पोषण कर बड़ा करने का भार उसके बूढ़े दादा के कंधों पर पड़ गया है जिनके न तो कमाई है न ही कमाने की ताकत।

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