आज भी जोधपुर में सुरक्षित है मेवाड़ के सेनापति की छतरी

Jitendra Singh Rathore

Publish: Feb, 26 2018 11:37:00 AM (IST)

Jodhpur, Rajasthan, India

mausoleum of meawer's commander still safe

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मंडोर. जोधपुर के संस्थापक और मारवाड़ के शासक राव जोधा से युद्ध कर करीब एक दशक तक मारवाड़ राज्य पर कब्जा करने वाले मेवाड़ के जांबाज सेनापति अहाडा हिंगोला की छतरी आज भी मंडोर के बालसमंद झील के पास मौजूद है। मेवाड़ के सेनापति के शौर्य व बहादुरी की स्मृति को चिरस्थाई रखने के लिए बालसमंद झील के ऊपर एक भव्य छतरी का निर्माण विक्रम संवत 1511 में करवाया गया था। बाद में इस छतरी व वीर सेनापति के महत्व को इतिहास के पन्नों में दर्ज कराने के लिए राव जोधा के पीढ़ी दर पीढ़ी वंशजों के साथ महाराजा सर प्रतापसिंह ने मारवाड़ महकमे का कार्य देखने वाले अधीक्षक ठाकुर गुमानसिंह खींची से शोध करवाकर अहाडा हिंगोला की छतरी का पुन: जीर्णोंद्धार करवाया। छतरी में संगमरमर का शिलालेख भी है। इस पर अहाड़ा हिंगोला का संक्षिप्त विवरण अंकित है। जब प्राकृतिक आपदाओं से इस छतरी का स्वरूप बिगडऩे लगा तो मारवाड़ राजपरिवार के सदस्यों ने इसे फि र से भव्य धरोहर के रूप में बनाए रखने के लिए अंग्रेज इंजीनियर मिस्टर लिकआयर्ड स्कैल्टन को विक्रम संवत 1969 को यह कार्य सौंपा था। इसके बाद यह छतरी जस की तस है। बालसमंद झील के पहाड़ों के बीच बनी छतरी आज भी सुरक्षित है।

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