scriptMessage carrier pigeons now become carriers of diseases, know how | संदेश वाहक कबूतर अब बने बीमारियों के वाहक, जानिए कैसे | Patrika News

संदेश वाहक कबूतर अब बने बीमारियों के वाहक, जानिए कैसे


हर सप्ताह चार-पांच मरीज मिल रहे

जोधपुर

Published: April 22, 2022 08:54:07 pm

जोधपुर. आपको जानकर हैरानी होगी कि हमारे आसपास कबूतरों का डेरा बीमार कर सकता है। किसी जमाने में संदेशवाहक के रूप में पहचान रखने वाले कबूतर अब बीमारियों के वाहक बन गए हैं। ये कबूतर क्रोनिक हाइपर सेंसिटीविटी न्यूमोनाइटिस बीमारी कर रहे है। ये बीमारी खतरे की घंटी इसलिए बन रही हैं कि इसका कहीं न कहीं सीधा असर हमारे वातावरण से जुड़ रहा है।
संदेश वाहक कबूतर अब बने बीमारियों के वाहक, जानिए कैसे
संदेश वाहक कबूतर अब बने बीमारियों के वाहक, जानिए कैसे
कबूतरों के बीच में रहना भारी पड़ रहा भारी

क्रोनिक हाइपर सेंसिटिवीटी न्यूमोनाइटिस में सालों से मरीज धूल व सूखी बीटाें के संपर्क में आता रहता है, उसे क्रोनिक एचपी भी कहा जाता है। भीतरी शहर के ज्यादातर भाग में लोगों की छतों व मोहल्लों में कबूतरों का डेरा रहता है। शहर की कई बावडि़यों में कबूतरों का डेरा है। यहां कई लोग बीमार होकर अस्पताल पहुंच रहे है। यहां के मरीज सालों तक कबूतरों के पंखों व सूखी बीटों से एक्सपोज हो रहे है। इस बीमारी में इलाज लंबा चलता है।
50 फीसदी मरीजों में क्रोनिक एचपी मिल रहा
डॉ. अंकित बताते हैं कि इन बीमारियों में धीरे-धीरे फेफड़े सिकुड़ते है। क्रोनिक एचपी सबसे मुख्य कारण है। जोधपुर संभाग में इंटरस्टीशियल लंग डिजीज (आइएलडी) के 50 फीसदी मरीजों में क्रोनिक एचपी मिलता है। जो फेफड़ों की बीमारी का मुख्य कारण है। गांवों के लोग खेतों में धूल के संपर्क में आने से बीमार पड़ रहे है। लक्षण में लोगों को सूखी खांसी होने के साथ फेफड़े सिकुड़ते रहते है। शहर में पक्षियों के नजदीक रहने वाले लोग बीमार पड़ रहे है। जिसमें ज्यादातर भीतरी भाग के लोग शामिल हैं।

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