जोधपुर में 500 से अधिक जोड़े बने जिंदगी के हमसफर

भड़ली नवमी को नौ रेखी सावे ने तोड़ा आखातीज का रिकॉर्ड

By: Nandkishor Sharma

Published: 29 Jun 2020, 09:59 PM IST

जोधपुर. भड़ली नवमी को नौ रेखी सावा होने के कारण सोमवार को जोधपुर सहित समूचे मारवाड़ में वैवाहिक आयोजनों की धूम रही। अक्षय तृतीया के समतुल्य अबूझ मुहूर्त के रूप में मान्य भड़ली नवमी के सावे ने कोरोनाकाल में पिछली आखातीज का रिकॉर्ड तोड़ दिया। अनलॉक 1 की नई गाइडलाइन में मिली पाबंदियों के साथ छूट के चलते जोधपुर जिले में अबूझ मुहूर्त आखातीज को स्थगित विवाह सहित करीब 500 से अधिक जोड़े परिणय सूत्र में बंधकर जिंदगी के हमसफर बने। सोमवार सुबह से शहर के विभिन्न जगहों और ग्रामीण क्षेत्रों में विवाह आयोजन की धूम देर शाम तक अनवरत जारी रही।

जोधपुर की दो विशेष बेटियों की भी भावपूर्ण विदाई
चौपासनी हाउसिंग बोर्ड स्थित नवजीवन संस्थान की दो बेटियों सोनू और बसंती का पाणिग्रहण संस्कार और विदाई प्रियांश सोमानी व गौरव जैन के साथ सोशल डिस्टेंसिंग की पालना के साथ की गई। चौपासनी हाउसिंग बोर्ड 17 ई सेक्टर स्थित सारस्वत समाज भवन परिसर में बेटियों के कन्यादान की रस्म जोधपुर के मिठाई व्यवसाई आशीष अग्रवाल और उत्तम मेहता ने निभाई। आशीर्वाद देने के लिए केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत, पूर्व महापौर घनश्याम ओझा, नवजीवन संस्थान संचालक राजेन्द्र परिहार, शोभा परिहार, समाजसेवी आरके ओझा, बीडी गुप्ता आदि पहुंचे। इससे पूर्व शहर के प्रतापनगर और चौपासनी हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र से अलग अलग बारातें सीमित बारातियों के साथ सुबह 11 बजे विवाह स्थल पहुंचने पर सैनिटाइज छिड़काव के साथ मास्क देकर उनका स्वागत किया गया। आर्यसमाज के पंडितों के सान्निध्य में पाणिग्रहण संस्कार के बाद सोनू और बसंती को नवजीवन संस्थान लाया गया जहां मौजूद सभी संस्थान के बच्चों की मौजूदगी में दोपहर 2 बजे तुलसी के पौधे देकर जोड़ों को विदाई दी गई। उल्लेखनीय है सगी बहनें सोनू और बसंती का लालन पोषण शिशुवस्था से नवजीवन संस्थान में हुआ है। संस्थान में उन बच्चों का लालन.पालन होता है जिनके माता पिता न जाने किस मजबूरी में अपने बच्चों को सड़कों के किनारेए निर्जन स्थल अथवा समाज की मर्यादा के डर से फैंक देते है।

पारिवारिक सामूहिक विवाह भी
भड़ली नवमी के अबूझ सावा होने से जोधपुर जिले में कई जगह पारिवारिक सामूहिक विवाह का नजारा भी देखने को मिला जिसमें एक ही परिवार की 2 से 4 बेटियों का विवाह संपन्न हुआ। पूरा दिन शुभ होने के कारण पाणिग्रहण संस्कार और बेटियों को विदाई देने का क्रम देर रात अनवरत जारी रहा। हालांकि अधिकांश विवाह कार्यक्रम में ढोल-शहनाई-डीजे की गूंज नदारद रही। कबीर नगर क्षेत्र में मेघवाल परिवार की चार बेटियों का विवाह हुआ जिसमें रात करीब 9 बजे बारात को विदाई दी गई।

Nandkishor Sharma Desk
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