पश्चिमी भारत को जोधपुर से मिलेगी नेविगेशन सेवाएं, डाटा ट्रांसमिशन और रियल टाइम लोकेशन की मिलेगी बेहतरीन जानकारी

पश्चिमी भारत को जोधपुर से मिलेगी नेविगेशन सेवाएं, डाटा ट्रांसमिशन और रियल टाइम लोकेशन की मिलेगी बेहतरीन जानकारी

Harshwardhan Singh Bhati | Updated: 04 Jun 2019, 10:40:29 AM (IST) Jodhpur, Jodhpur, Rajasthan, India

सात उपग्रहों की मदद से देशवासियों को मिलेगी रियल टाइम पॉजिशन की जानकारी

 

गजेंद्र सिंह दहिया/जोधपुर. देशवासियों को इस साल के अंत तक देशी जीपीएस सिस्टम यानी नाविक (नेविगेशन विद् इंडियन कंस्टिलेशन) की सेवाएं अपने मोबाइल पर मिलने की उम्मीद है। नाविक को ऑपरेट करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की ओर से बनाए पांच अर्थ स्टेशन में जोधपुर भी शामिल है। जोधपुर से देश के पश्चिमी हिस्से में नेविगेशन सेवाएं मिलेगी। जोधपुर में इसके लिए ट्रायल शुरू हो चुका है।

सेटेलाइट से डाटा ट्रांसमिशन और रियल टाइम लोकेशन की बेहतरीन जानकारी मिल रही है। भारतीय नाविक सिस्टम अमरीकी जीपीएस से बेहतर है क्योंकि जीपीएस की सटीकता 25 से 30 मीटर आ रही है जबकि नाविक 5 मीटर तक सटीक स्थिति दे रहा है। जोधपुर में इसरो क्षेत्रीय केंद्र में वैज्ञानिकों को अपने उपकरणों पर नाविक की सेवाएं बेहतर मिल रही है।

क्या है नाविक

भारत ने नेविगेशन सिस्टम यानी रियल टाइम जानकारी के लिए स्वयं का सेटेलाइट सिस्टम विकसित किया है। इसके लिए भारत ने सात सेटेलाइट पृथ्वी की कक्षा में छोड़े हैं। इसका नाम आइआरएनएसएस (इंडियन रीजनल नेविगेशन सेटेलाइट सिस्टम) या नाविक रखा गया है। पहला सेटेलाइट 2013 में आइआरएनएसएस-1 ए छोड़ा गया। इसके बाद लगातार सात सेटेलाइट छोड़े गए।

आइआरएनएसएस-1 एच सेटेलाइट असफल हो जाने के बाद इसरो को पिछले साल अप्रेल में नया सेटेलाइट आइआरएनएसएस-1आइ छोडऩा पड़ा। अब सातों सेटेलाइट बेहतरीन तरीके से काम कर रहे हैं। सेटेलाइट से पृथ्वी पर डाटा संग्रहण के लिए देश में पांच अर्थ स्टेशन बनाए हैं। पश्चिम में जोधपुर, पूर्व में मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग, उत्तर में लखनऊ, मध्य में भोपाल, दक्षिण में बेंगलूरू है।

मोबाइल चिप कम्पनी से वार्ता अंतिम दौर में
इसरो की मोबाइल चिप बनाने वाली कम्पनी के साथ वार्ता अंतिम दौर में चल रही है। नाविक सेवाओं के लिए विशेष बैण्ड एल-5 में चिप बनाई जाएगी। मोबाइल निर्माता कम्पनी यह चिप मोबाइल में स्थापित करेगी, जिसके बाद उपभोक्ताओं को मोबाइल पर नाविक का नेटवर्क नजर आने लगेगा। वर्तमान में मोबाइल कम्पनियां अमरीकी जीपीएस, यूरोप का गेलेलियो, चीन की बायडू और रूस की ग्लोसनास नेविगेशन सिस्टम की चिप बनाकर डालती है।

भारत में अधिकांश उपभोक्ता अमरीकी नेविगेशन सिस्टम यानी जीपीएस का उपयोग करते हैं। मोबाइल में नाविक आने के बाद जीपीएस की जरूरत नहीं पडेग़ी। इसकी रेंज भारत से 1500 किलोमीटर की परिधि तक होगी, जिसमें पाकिस्तान व चीन के साथ अधिकांश पड़ौसी देश दायरे में आएंगे।

कैब सीधे घर तक, फ्लाइट भी शॉर्ट कट
- वर्तमान में देश में कई फ्लाइट लंबे रास्ते से होकर गुजरती है। नेविगेशन सिस्टम बेहतर होने से फ्लाइट रूट छोटा हो जाएगा और यात्रियों का समय बचेगा।
- वर्तमान में कई गली-मौहल्लों में टैक्सी व कैब नेविगेशन में सटीकता में कमी की वजह से सही जगह नहीं पहुंच पाते, नाविक से कैब भी सटीकता से आपके घर तक आ जाएगी।
- भारतीय नौका, पोत और बड़े जहाजों को भी बेहतर सूचनाएं मिलेगी।

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