‘स्काडा’ करेगा फैक्ट्रियों के डिस्चार्ज पानी की मॉनिटरिंग, लगाए जा रहे हैं इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फ्लो मीटर

‘स्काडा’ करेगा फैक्ट्रियों के डिस्चार्ज पानी की मॉनिटरिंग, लगाए जा रहे हैं इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फ्लो मीटर

Harshwardhan Singh Bhati | Publish: Aug, 08 2019 01:14:14 PM (IST) Jodhpur, Jodhpur, Rajasthan, India

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की फटकार व निरन्तर दिए जा रहे निर्देशों की पालना में जोधपुर में अब औद्योगिक इकाइयों से डिस्चार्ज होने वाले प्रदूषित पानी की मॉनिटरिंग शुरू की गई है।

अमित दवे/जोधपुर. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की फटकार व निरन्तर दिए जा रहे निर्देशों की पालना में जोधपुर में अब औद्योगिक इकाइयों से डिस्चार्ज होने वाले प्रदूषित पानी की मॉनिटरिंग शुरू की गई है। एनजीटी के करीब एक वर्ष पूर्व दिए आदेश को गंभीरता से लेते हुए अब सभी टेक्सटाइल व स्टील इकाइयों में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फ्लो मीटर लगाए जा चुके हैं। इन इकाइयों में लगे सभी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फ्लो मीटर्स को सुपरवाइजरी कंट्रोल एण्ड डाटा एक्वीजिशन (स्काडा) से जोड़ा गया है। जिसकी मॉनिटरिंग जोधपुर प्रदूषण निवारण ट्रस्ट (जेपीएनटी) में लगे जीपीआरएस सिस्टम से हो रही है। इससे इकाइयों से निस्तारित होने वाले प्रदूषित पानी की मात्रा की निगरानी की जाएगी।

अनुमति से ज्यादा पानी होते ही बंद होगा
जेपीएनटी में लगे मुख्य सर्वर के द्वारा इकाइयों से छोड़े जाने वाले पानी की गणना जीपीआरएस से की जाएगी। इकाइयों में लगे स्काडा युक्त पैनल बोर्ड में स्विच होगा, जिसकी मॉनिटरिंग जेपीएनटी द्वारा की जाएगी। अगर पानी निकासी में निर्धारित अनुमति से ज्यादा पानी निकासी की जाएगी तो जेपीएनटी में लगे जीपीआरएस मुख्य सर्वर से उक्त इकाई के पम्प की बिजली स्वत: कट जाएगी। उदाहरण के लिए, यदि किसी इकाई को 100 किलोलीटर प्रतिदिन (केएलडी) की अनुमति है। अगर उद्यमी इससे ज्यादा प्रदूषित पानी निकालने की कोशिश करेगा तो जेपीएनटी से स्वत: उसका पंप बंद हो जाएगा।

इनका कहना है

इकाइयों में इलेक्ट्रॉनिक फ्लो मीटर को स्काडा पैनल से जोड़ा जा चुका है। इसकी मॉनिटरिंग जेपीनएटी में होगी। उम्मीद है निर्धारित मात्रा से ज्यादा फ्लो हो रहे पानी पर अंकुश लगेगा। इसके अलावा जेपीएनटी में एमवीआर तकनीक का प्लांट लगाने का प्रयास कर रहे है। इसमें पूरे औद्योगिक क्षेत्र के लिए 20 एमएलडी पानी डिस्चार्ज के लिए करीब 200 करोड़ का प्लांट लगेगा। इस तकनीक में पानी का वाष्पीकरण होगा। इसकी भाप से बन जाएगा और अशुद्धि अलग हो जाएगी।
जसराज बोथरा, मैनेजिंग ट्रस्टी, जेपीएनटी

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