scriptNow nomadic will get caste certificate | रंग लाई मुहिम, अब घुमन्तु के बनेंगे जाति प्रमाण पत्र | Patrika News

रंग लाई मुहिम, अब घुमन्तु के बनेंगे जाति प्रमाण पत्र

राज्य में विमुक्त, घुमन्तु एवं अद्र्धघुमन्तु जाति पहचान प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में सरकार ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार विमुक्त, घुमन्तु एवं अद्र्धघुमन्तु जनों को जाति प्रमाण पत्र के अभाव में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। पात्रता के बावजूद वे इनसे वंचित हैं। ऐसे में अब इनके जाति प्रमाण पत्र जारी किए जा सकेंगे। सभी ई-मित्र केन्द्रों पर यह व्यवस्था उपलब्ध रहेगी।

जोधपुर

Published: December 23, 2021 12:18:39 am

जोधपुर . राज्य में विमुक्त, घुमन्तु एवं अद्र्धघुमन्तु जाति पहचान प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में सरकार ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं।


राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार विमुक्त, घुमन्तु एवं अद्र्धघुमन्तु जनों को जाति प्रमाण पत्र के अभाव में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। पात्रता के बावजूद वे इनसे वंचित हैं। ऐसे में अब इनके जाति प्रमाण पत्र जारी किए जा सकेंगे। सभी ई-मित्र केन्द्रों पर यह व्यवस्था उपलब्ध रहेगी। तहसीलदार अपने डिजिटल हस्ताक्षर से आवेदन के दस दिनों के भीतर प्रमाण पत्र जारी करेंगे। वहीं जाति की पुष्टि राजस्व रिकॉर्ड, शैक्षणिक प्रमाण पत्र या पंचायत व नगर पालिका के रिकॉर्ड से की जा सकेगी।
रंग लाई मुहिम, अब घुमन्तु के बनेंगे जाति प्रमाण पत्र
रंग लाई मुहिम, अब घुमन्तु के बनेंगे जाति प्रमाण पत्र
उल्लेखनीय है कि बांसवाड़ा की वाग्धारा संस्थान ने ऐसे घुमन्तु लोगों को सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए सरकार से मांग की थी। राजस्थान से मध्यप्रदेश और गुजरात जाने वाले चरवाहे बागड़ के बांसवाड़ा और डुंगरपुर क्षेत्र में ठहराव करते हैं। कई चरवाहे उदयपुर जिले को भी ठिकाना बनाते हैं। एक नई पहल करते हुए बांसवाड़ा के वाग्धारा संस्थान ने इस बार दीपावली इन चरवाहों के साथ भी मनाई। संस्था सचिव जयेश जोशी के अनुसार इन घुमन्तु परिवारों को विभिन्न सरकारी योजनाओं से लाभान्वित करने की मांग राज्य सरकार से की गई थी।
इसलिए की मांग

राज्य सरकार से मांग है कि जिन गडरियों के पास राशन कार्ड उपलब्ध है तो उन्हें राज्य के प्रत्येक जिले से राशन उपलब्ध कराया जा सकता है। विशेष अभियान चलाकर इन्हें पेंशन और अन्य खाद्यान्न सुरक्षा की योजनाओं से जोड़ा जाना चाहिए।
जिस खेत में पशु, खेतमालिक देता है राशि

जिस खेत में भेड़ों को बिठाया जाता है, खेत मालिक उसके पेटे इन्हें कुछ राशि देते हैं। कहते हैं कि भेड़ जिस खेत में बैठती है, उस खेत की मिट्टी उपजाऊ हो जाती है। भेड़ों के मल मूत्र से खेती की जमीन को 5 वर्षों तक उपजाऊ किया जा सकता है।
बच्चों को कराया मुक्त

एक समय पहले देवासी समाज के लोग (गडरिए ) वागड़ के बच्चों को अनुबंध पर रखते और उनसे मवेशी चरवाते। कई बच्चे काल का ग्रास भी बन गए। इसे लेकर वाग्धारा की ओर से संचालित चाइल्ड लाइन 1098 ने प्रदेश स्तर पर अभियान चलाया और बच्चों को इनसे मुक्त कराने में अहम भागीदारी निभाई। चाइल्डलाइन के जिला समन्वयक परमेश पाटीदार ने बताया कि इस तरफ अभी भी टीम कार्यरत है।

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