scriptOne university, two MA, one in 2 years and the other in 3 years | एक विवि, दो एमए, एक 2 साल में दूसरी 3 साल में | Patrika News

एक विवि, दो एमए, एक 2 साल में दूसरी 3 साल में

- जेएनवीयू के खुद के कैंपस में सेमेस्टर सिस्टम, सम्बद्ध महाविद्यालयों में वार्षिक पद्धति
- केएन कॉलेज में ढाई से 3 साल में पीजी, सोमानी सहित अन्य महाविद्यालयों में २ साल में पीजी

जोधपुर

Updated: December 24, 2021 03:34:20 pm

जोधपुर. जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में बंद होने की कगार पर पहुंच रहे कला संकाय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम (मास्टर ऑफ आट्र्स) के पीछे बड़ी वजह विश्वविद्यालय की ओर से लागू की गई असमान परीक्षा पद्धति है। व्यास विश्वविद्यालय के खुद के विभागों में क्रेडिट बेस्ट चॉइस सिस्टम (सीबीसीएस) के चलते सेमेस्टर सिस्टम से परीक्षाएं होती है वहीं जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, पाली और जालोर के संबद्ध महाविद्यालयों में वार्षिक पद्धति से परीक्षाएं ली जाती है। सेमेस्टर सिस्टम में परीक्षाएं 6 महीने से लेकर 1 साल तक देरी से चलती है यानी कमला नेहरू महिला महाविद्यालय में प्रवेश लेकर एमए करने वाली छात्रा को स्नातकोत्तर की डिग्री करने में न्यूनतम ढाई साल लगते हैं। कई बार ३ से साढे तीन साल में डिग्री मिलती है वहीं पीजी महिला महाविद्यालय जैसे सम्बद्ध महाविद्यालयों में 2 साल में ही छात्रा को स्नातकोत्तर की डिग्री मिल जाती है। केएन कॉलेज की छात्रा को साल में चार सेमेस्टर परीक्षाओं के अलावा आंतरिक मूल्यांकन, क्विज, प्रजेंटेशन सहित कई अन्य छोटी मोटी परीक्षाएं देनी पड़ती है जबकि सम्बद्ध महाविद्यालयों विद्यार्थियों को 2 साल में २ वार्षिक परीक्षाएं देकर आसानी से पीजी की डिग्री मिल जाती है।
एक विवि, दो एमए, एक 2 साल में दूसरी 3 साल में
एक विवि, दो एमए, एक 2 साल में दूसरी 3 साल में
निजी महाविद्यालयों के विरोध के कारण लागू नहीं किया
तत्कालीन कुलपति डॉ आरपी सिंह ने राजभवन के निर्देश से वर्ष 2016-17 में पूरे विश्वविद्यालय में सीबीसीएस पद्धति लागू की थी लेकिन निजी महाविद्यालयों के विरोध के चलते वहां वार्षिक पद्धति को पुन: लागू कर दिया। यही कारण है कि गत 5 वर्ष में निजी महाविद्यालयों के विद्यार्थियों की संख्या कम नहीं हुई है जबकि खुद जेएनवीयू के कला संकाय के विभिन्न विभागों में विद्यार्थियों की संख्या लगातार घट रही है।
पूरे साल परीक्षा में लगे रहते हैं जेएनवीयू के शिक्षक
सेमेस्टर सिस्टम और वार्षिक पद्धति के लिए अलग-अलग परीक्षाएं करवाई जाती है। इनके अलग-अलग प्रश्नपत्र बनते हैं। इसी के चलते जेएनवीयू के शिक्षक पूरे साल परीक्षाओं में लगे रहते हैं।
एमकॉम और एमएससी में सेमेस्टर सफल तो एमए में क्यों नहीं
- एमए में अब दिसम्बर में प्रवेश हो रहे हैं, जबकि एमएससी में नवम्बर में खत्म हो गए।
- कला संकाय सेमेस्टर का प्रस्तावित कार्यक्रम बमुश्किल जारी करते हैं, जबकि विज्ञान व वाणिज्य में अप टू डेट रहते हैं।
- कला संकाय से स्कोपस स्तरीय शोध पत्र प्रकाशित नहीं हो रहे हैं। यूजीसी इन्हीं प्रकाशनों को ‘नैक’ के आकलन में मानता है।
- कला संकाय के विभिन्न विभागों में कक्षाएं ही नहीं लगती। कई विभागों में तो इक्का-दुक्का शिक्षक है जो विभागीय कार्यों में ही रहते हैं।
- कला संकाय में एक बार प्रवेश लेने के बाद फिर से सीधे परीक्षा देने ही छात्र आते हैं। यहां पढ़ाई का भी माहौल नहीं है।

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