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संकुचित धमनी को बिना चीर फाड़ निडल पंचर से खोला

locationजोधपुरPublished: Nov 14, 2022 10:52:15 pm

Submitted by:

Abhishek Bissa


एमडीएमएच व मेदांता के चिकित्सकों ने किया ऑपरेशन

संकुचित धमनी को बिना चीर फाड़ निडल पंचर ***** से खोला
संकुचित धमनी को बिना चीर फाड़ निडल पंचर ***** से खोला

जोधपुर. मथुरादास माथुर अस्पताल (एमडीएमएच) के नवनिर्मित उत्कर्ष कार्डियोथोरेसिक विभाग में एंडोवस्कुलर तकनीक से खून की बंद धमनियों को खोलने का ऑपरेशन एमडीएमएच एवं मेदांता के चिकित्सकों की टीम ने संयुक्त रूप से किया। इस प्रक्रिया में बिना चीर फाड़ के प्रभावित हिस्से में खून की बंद तथा संकुचित हुई धमनी को निडल पंचर ***** से खोला गया।
सीटीवीएस विभागाध्यक्ष डॉ. सुभाष बलारा ने बताया कि 41 वर्षीय नोरतमल, 55 वर्षीय पुखराज और 79 वर्षीय हेमाराम गत छह माह से पैरों में दर्द, सूजन तथा उंगलियों के कालेपन की परेशानी से ग्रसित थे। मरीज तथा उनके परिजन ने बताया कि दवाइयों से लाभ नहीं मिलने की स्थिति में मरीजों को मथुरादास माथुर अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक विभाग में भर्ती किया गया। जहां उनका पूर्ण स्वास्थ्य परीक्षण तथा सीटी एंजियोग्राफी कराने के बाद ऑपरेशन का निर्णय लिया गया।
मेदांता अस्पताल दिल्ली के डॉ. वीरेंद्र के शेरोन ने बताया कि एंडोवस्कुलर प्रक्रिया के दौरान रक्त वाहिका में निडिल ***** के जरिए इमेज गाइडेड तार तथा बलून से बंद हिस्से को खोला तथा उस हिस्से में स्टेंट डाल दिया जाता है, जिससे संकुचित हुई धमनी में खून का बहाव वापस शुरू हो जाता है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के पश्चात मरीजों का इलाज सीटीआइसीयू में हुआ। अगले दिन वाइटल पैरामीटर्स को इवेलुएट करने के पश्चात मरीजों को वार्ड में शिफ्ट किया गया। मरीजों की स्थिति पहले से काफी सुधार है और वह दर्द से निजात पा चुके हैं।
यह थे टीम में
डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल व नियंत्रक डॉ. दिलीप कच्छवाह व एमडीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित ने टीम को बधाई दी। कॉलेज के प्रवक्ता डॉ जयराम रावतानी ने बताया कि यह ऑपरेशन मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना के तहत नि:शुल्क किया गया। डॉ विरेंद्र, कार्डियोथोरेसिक विभाग के डॉ बलारा, सहायक आचार्य डॉ अभिनव सिंह एनेस्थीसिया विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ राकेश करनावत व सहआचार्य डॉ शिखा सोनी (सह आचार्य) भी इस ऑपरेशन में शामिल रहे।
हाथ-पांव काटने की आ जाती है नौबत
डॉ अभिनव सिंह ने बताया कि पेरीफेरल वैस्कुलर डिजीज मस्तिष्क व हृदय के बाहर मौजूद रक्त वाहिकाओं व धमनियों को प्रभावित करती है। ज्यादातर मामलों में धमनियों में कठोर वसा जमा हो जाने के कारण परिणाम गंभीर है। समय पर इलाज ना मिले तो रक्त वाहिकाओं में क्लॉट, क्रिटिकल इस्कीमिया और गैंगरीन तक होने लगता है, जिसके कारण पैर या हाथ को काटने की नौबत आ जाती है। समय रहते इलाज अत्यंत आवश्यक है।

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