जोधपुर के अभिभावक हुए अपने मासूमों के लिए चितिंत, इस शर्मनाक घटना से सहमा शहर..

हरियाणा के गुरुग्राम स्थित निजी स्कूल में मासूम छात्र की हत्या के बाद जोधपुर के अभिभावकों की चिंताएं बढ़ गई हैं....

By: mahesh ojha

Updated: 11 Sep 2017, 04:14 PM IST

जोधपुर. हरियाणा के गुरुग्राम स्थित निजी स्कूल में मासूम छात्र की हत्या के बाद जोधपुर के अभिभावकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। स्कूलों की ओर से किए गए सुरक्षा इंतजाम, विद्यालय परिसर में बच्चों की सुरक्षा, बालवाहिनियों में बच्चों के सफर सहित अन्य सुरक्षा प्रबंधों पर सवाल उठने लगे हैं। स्कूलों द्वारा फीस के नाम पर मोटी रकम वसूलने के बावजूद बच्चे खतरे के साए में पढ़ाई कर रहे हैं। स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं। सुबह जब बच्चा घर से स्कूल के लिए निकलता है, तो वह बालवाहिनी चालक के भरोसे ही रहता है। बालवाहिनी में कोई भी स्कूल का प्रतिनिधि नहीं होता। बालवाहिनियों में ट्रेकर, सीसीटीवी जैसी सुविधाएं नहीं होती। जोधपुर में तो हजारों बच्चें रोजाना ऑटो चालक के भरोसे ही स्कूल जाते हैं, जो और भी खतरनाक है। वर्ष २०१५ में जोधपुर में स्कूल छात्रा के साथ बस चालक द्वारा दुष्कर्म करने की घटना हो चुकी है। बावजूद इसके स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर खास प्रबंध नहीं किए गए। घर से निकलने से स्कूल तक बच्चे का धणी-धोरी कोई नहीं है।

 

सूर्यनगरी में स्कूली छात्र-छात्राओं की सुरक्षा पर प्रस्तुत है संवाददाता चैनराज भाटी की रिपोर्ट-

 

- न सीसीटीवी न सुरक्षा, बालवाहिनियों में ट्रेकर भी नहीं

- ऑटो चालकों के भरोसे ही स्कूल जाते हैं हजारों बच्चे- गुरुग्राम की घटना के बाद जोधपुर के अभिभावक भी चिंतित- जोधपुर में हो चुकी है छात्रा के साथ दुष्कर्म की घटना

- केवल भारी-भरकम फीस का ख्याल, बच्चों की सुरक्षा की परवाह नहीं


गुरुग्राम से जुदा नहीं सूर्य नगरी के स्कूलों के हालजोधपुर के अधिकांश स्कूल बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं दिख रहे हैं। गली-मोहल्लों में चलने वाले स्कूलों में सीसीटीवी नहीं होने से स्कूल परिसर में बच्चे के साथ कब-क्या घटित हो जाए, पता ही नहीं चलता। स्कूलों के टॉयलेट क्षेत्र की ओर बच्चों के साथ कोई अटेंडेंट नहीं आता-जाता। अधिकांश स्कूलों में बिना रोक-टोक बच्चे से कोई भी व्यक्ति बिना पहचान के मिल सकता है। कई सिटी बसें ही बालवाहिनियों के रूप में इस्तेमाल हो रही हैं। इनमें स्पीडगर्वनर भी नहीं हैं। बालवाहिनियों में सीसीटीवी तो दूर की बात, लोहे की जालियां तक नहीं होती। ओवरलोड बालवाहिनियों में बच्चों को ठूंसकर बैठाया जाता है। ऑटो चालक ही बच्चों को स्कूल से घर लाता ले जाता है। सुरक्षा का पूरा जिम्मा उस पर ही रहता है, जबकि चालक की प्रोफाइल ना स्कूल के पास नहीं रहती और ना ही परिवार के पास।

 

जोधपुर में हो चुकी हैं घटनाएं

- जोधपुर के शिकारगढ़ क्षेत्र में स्कूल बस चालक द्वारा अगस्त २०१५ में पांच साल की एक बच्ची से दुष्कर्म किए जाने का मामला सामने आया था। बच्ची की मां ने रातानाडा पुलिस थाने में चालक के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज करवाया था।- दिसम्बर २०१५ में बालवाहिनी के नाम पर ओवरलोड छात्रों को ले जा रही सिटीबस डीपीएस चौराहे पर पलट गई थी। हादसे में जिया नाम की मासूम छात्रा का हाथ कट गया था। हाईकोर्ट ने इस पर प्रसंज्ञान लेते हुए खराब हालत में चल रही बालवाहिनियों पर कार्रवाई करने के आदेश दिए थे।

स्कूल में सुरक्षित स्थान होना जरूरीस्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए नियम और कानून हैं। इनके अनुसार सभी स्कूलों को अपने स्कूल में भगदड़ होने पर, जिसमें अचानक आग लग जाने, हमले से लेकर भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदाएं हो सकती हैं। एेसे में स्कूल में किसी सुरक्षित स्थान का होना अनिवार्य है। स्कूल भवन भी सुरक्षित होना चाहिए। खेल के मैदान में डॉक्टर और चोट लगने पर इलाज की व्यवस्था होनी चाहिए। बिजली से सुरक्षा की व्यवस्था, बच्चों को टूर पर ले जाते हैं, तो माता-पिता में से किसी एक से लिखित अनुमति लेना जरूरी है। स्कूल में बिना रेलिंग की सीढि़यां नहीं हो सकतीं, ऑपरेटर के बिना लिफ्ट नहीं चल सकती, लैब में रसायन, बर्नर से हादसा होने पर इमरजेंसी इंतजाम जरूरी है।

 

यह भी तय हो
- अच्छे बर्ताव व प्रशिक्षित हो बालवाहिनी चालक और परिचालक

- स्कूल के भीतर सर्विलांस स्क्वॉड हो, जो बच्चों का रखे नजर
- बालवाहिनियों में हो ट्रेकर सिस्टम

- बालवाहिनी में सीसीटीवी कैमरा लगा हो

- पैनिक बटन व स्कूल का जिम्मेदार व्यक्ति साथ हो- बच्चों को अभिभावकों के नाम, पता व फोन नम्बर याद करवाए

 

स्कूल मैनेजमैंट के लिए यह है कानून

बच्चों को मारना-पीटना, स्कूल के मैदान में सजापूर्वक दौडऩा, प्रताडि़त करना, घंटों तक घुटनों के बल बिठाए रखना, चिकोटी काटना और थप्पड़ मारना सहित बच्चों को स्कूल में दी जाने वाली इस प्रकार की सजाओं पर सन् 2000 में कोर्ट ने रोक लगा दी थी। यह आदेश भी जारी किया था कि स्कूल में किसी घटना के चलते बच्चे की मौत हो जाए, चोट लग जाए या अस्पताल में भर्ती हो तो स्कूल प्रबंधन को ही इसके लिए जिम्मेदार माना जाएगा और उस पर आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। बच्चों की सुरक्षा के लिए 2012 में एक कानून बनाया गया, जिसके चलते यदि बच्चे के साथ कोई भी यौन शोषण करते पाया जाता है तो उसे सजा और जुर्माना देना होगा।

 

डीईओ माध्यमिक (प्रथम) विनोदकुमार शर्मा से सीधी बात

सवाल- निजी व सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर क्या नियम है?

जवाब- बच्चों को सुरक्षित लाना और ले जाना, उनकी यातायात व्यवस्था पर नजर रखना, संस्था प्रधान और मैनेजमेंट कमेटी का कार्य है। बच्चों को परेशानी नहीं होनी चाहिए। यह सभी की जिम्मेदारी है।


सवाल- दोनों जगह सुरक्षा को लेकर क्या इंतजाम है?जवाब- जिला कलक्टर के निर्देशन में बैठक होती है। इसके लिए दिशा-निर्देश जारी होते है। वाहन की व्यवस्था से लेकर अन्य सुविधाओं पर चर्चा होती है।

 

सवाल- क्या आप कभी स्कूलों की जांच करने जाते है?

जवाब- हां, हम व्यवस्थाएं जांचने के लिए जाते हैं। जल्द ही हम जिला कलक्टर से निवेदन कर जिला स्तरीय बैठक बुलाएंगे। फिर से और पूरी समीक्षा करेंगे।

 

सवाल- कुछ अप्रिय घटना हो जाए तो जिम्मेदार कौन है?

जवाब- हम घटना नहीं होने देंगे। प्रशासन व विभाग का काम घटना रोकना है। इसके लिए पूरी व्यवस्था रहेगी।

 

सवाल- बालवाहिनियां बिना ट्रेकर व सीसीटीवी के चलती हैं। आपने जांच की या कोई शिकायत यातायात पुलिस को दी?

जवाब- मैंने अभी ज्वॉइन किया है, पहली बैठक हुई है। कोई अव्यवस्था है, तो उसको खत्म करवाएंगे।

 

प्रश्न- अधिकांश स्कूलों में सीसीटीवी नहीं है, कोई निर्देश कभी निकाले क्या?

जवाब- संस्था प्रधानों की बैठक लेंगे। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आवश्यक कदम उठाएंगे।

 

सवाल- अब क्या प्लान है?

जवाब- जोधपुर में एेसी घटना न हो, सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे।

 

 

'बिल्डिंग के लिए हो लाइफ गार्डÓ

स्कूलों में लाइफगार्ड होने चाहिए। जो पूरे दिन स्कूल का और बच्चों का निरीक्षण करते रहे। जो विशेषकर टॉयलेट के आस-पास ध्यान रखे, क्योंकि ज्यादात्तर बदमाशी टॉयलेट में होती है। स्कूल संचालक नया सत्र शुरू होते ही एक चालक के नंबर दे देते है, साल के अंत तक चार बार ड्राइवर बदल जाते हंै।

- राजेश व्यास, अभिभावक

 

'हर स्कूल में काउंसलर होÓ

हर स्कूल में एक काउंसलर होना चाहिए। सीसीटीवी कैमरे औसतन सभी बड़े स्कूलों में हैं। सीसीटीवी कैमरे से मुसीबत हल नहीं होगी। जुर्म नहीं रुकेगा। जुर्म रोकने के लिए काउंसलर होना चाहिए। अभिभावकों की शिकायत पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

- बृजेश शर्मा, स्कूल एज्यूकेशन व सीबीएसई एक्सपर्ट

 

'सुरक्षा के पूरे इंतजाम जरूरीÓ

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए। हर स्कूल में आने-जाने का रिकॉर्ड इंद्राज होना चाहिए। चाहे वह स्टाफ हो या फिर दूसरा और कोई। सभी के आने-जाने की जानकारी रिकॉर्ड में रहे। बच्चे के स्कूल में प्रवेश करने और परिसर निकलने और घर पहुंचने तक की जानकारी अभिभावकों के मोबाइल पर आनी चाहिए।

- दिलीप जैन, अभिभावक

 

 

आंकड़ों में जोधपुर की स्कूलें व विद्यार्थी

३४२५- सरकारी स्कूल

२०००- निजी स्कूलें

६ लाख- निजी व सरकारी स्कूल में विद्यार्थी

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