अपनों के अंतिम संस्कार के लिए करना पड़ रहा इंतजार, बस-ट्रेनें बंद होने से प्रवाहित नहीं कर पा रहे अस्थि कलश

कोराना के चलते मानो पूरा देश थम सा गया है। आलम यह है कि शहर में ऐसे कई परिवार हैं जिनके अपनों ने हाल ही में अंतिम सांस ली है। दाह संस्कार तो परिजनों ने कर दिया लेकिन कोरोना के कारण आवागमन बंद होने से अपनों का अंतिम संस्कार (अस्थियों को गंगा में प्रवाहित) के लिए इंतजार करना पड़ है।

By: Harshwardhan bhati

Published: 06 Apr 2020, 10:00 AM IST

ओम टेलर/जोधपुर. कोराना के चलते मानो पूरा देश थम सा गया है। आलम यह है कि शहर में ऐसे कई परिवार हैं जिनके अपनों ने हाल ही में अंतिम सांस ली है। दाह संस्कार तो परिजनों ने कर दिया लेकिन कोरोना के कारण आवागमन बंद होने से अपनों का अंतिम संस्कार (अस्थियों को गंगा में प्रवाहित) के लिए इंतजार करना पड़ है। इन परिवारों का कहना है कि अब लॉक डाउन खुलने के इंतजार के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं है। इसलिए अपनों के अस्थि कलश को संभाल कर रखे हुए हैं।

लॉक डाउन समाप्त होने का इंतजार
प्रतापनगर संजय सी कॉलोनी निवासी रोशनलाल पंवार के पिता रणछोड़लाल पंवार (64) की मौत 25 मार्च को हो गई। रोशनलाल पंवार ने बताया कि पिता के शव का दाह संस्कार तो कर दिया लेकिन लॉक डाउन होने से पिता के अस्थि कलश को गंगा में प्रवाहित करने का कार्यक्रम फिलहाल रोक रखा है। अब तो लॉक डाउन खत्म होने के बाद ही हरिद्वार जाने का कार्यक्रम हो सकेगा। इसके चलते पिता के अस्थि कलश को सुरक्षित रखा है।

कर रहे इंतजार
शहर के नया बास पीपली की गली माणक चौक निवासी राजेन्द्र माथुर की पत्नी कल्पना माथुर की 28 मार्च को मौत हो गई थी। कोरोना के कारण शहर से बाहर रहने वाले कई सगे-संबंधी भी अंतिम संस्कार में नहीं आ सके। अंतिम संस्कार जिला प्रशासन एवं कायस्थ समाज के सहयोग से हो गया। लेकिन ट्रेनें-बसें सभी बंद होने के कारण अस्थियां गंगा में प्रवाहित करने का कार्यक्रम अभी रोकना पड़ा। मृतका के पति राजेन्द्र माथुर ने बताया कि लॉक डाउन खुलने के बाद ही अब कुछ हो सकेगा।

लॉक डाउन खुलने का इन्तजार
शहर के रातानाडा पंचवटी कॉलोनी निवासी रामेश्वरसिंह (शर्मा) की बीमारी से तीन अप्रेल की रात को मौत हो गई। उनके पुत्र आनंदकुमार शर्मा ने बताया कि चार अप्रेल को अंतिम संस्कार तो कर लिया लेकिन लॉकडाउन के चलते टे्रनें व बसें बंद हैं। ऐसे में पिता का अस्थि कलश श्मशान घाट में ही लॉकर में रखने पड़े। यातायात के साधन शुरू होने पर उनका अस्थि कलश गंगा में प्रवाहित करने की रस्म पूरी करेंगे।

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