scriptPolice kept closed 5 months in fake case, will have to pay 5 lakh fine | पुलिस ने झूठे मामले में पांच माह बंद रखा, देना होगा 5 लाख जुर्माना | Patrika News

पुलिस ने झूठे मामले में पांच माह बंद रखा, देना होगा 5 लाख जुर्माना

- राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग ने नौ साल पुराने मामले में बुजुर्ग को दिलाया हर्जाना

जोधपुर

Updated: December 29, 2021 11:55:12 am

जोधपुर.
राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने अफीम के 3 किलो दूध के साथ वृद्ध को षड्यंत्र के तहत फंसाने के मामले में पुलिस स्टेशन जाम्बा के तत्कालीन थानाधिकारी उप निरीक्षक सीताराम व दो कांस्टेबल को दोषी माना है। आयोग ने राज्य सरकार को दो माह में पीडि़त वृद्ध को पांच लाख रुपए मुआवजा देने की अनुशंषा की गई।
पुलिस ने झूठे मामले में पांच माह बंद रखा, देना होगा 5 लाख जुर्माना
पुलिस ने झूठे मामले में पांच माह बंद रखा, देना होगा 5 लाख जुर्माना
आयोग के निजी सचिव गणपत शर्मा ने मंगलवार को इस बारे में आदेश जारी किए। इसके तहत जाम्बा थानान्तर्गत सुरपुरा के बजरंग नगर निवासी भाकरराम (70) पुत्र लाखाराम बिश्नोई को पांच लाख रुपए मुआवजा दिया जाएगा। राज्य सरकार को यह मुआवजा दो माह में देना होगा। इसके बाद राज्य सरकार एसआइ व जाम्बा के तत्कालीन थानाधिकारी सीताराम के वेतन से दो लाख व कांस्टेबल भगवानाराम व करनाराम के वेतन से एक-एक लाख रुपए कटौती करेगी। इतना ही नहीं, तीनों पुलिसकर्मी पांच साल तक किसी भी थाने में नियुक्त नहीं किए जा सकेंगे। षड्यंत्र के तहत वृद्ध को एनडीपीएस एक्ट में गिरफ्तार करने की जांच में तीनों को दोषी बताने वाले पुलिस अधिकारियों को गणतंत्र दिवस पर पुरस्कृत करने की अनुशंषा की गई है।
पांच महीने जेल में रहने के बाद बरी
तत्कालीन जाम्बा थानाधिकारी ने फरवरी 2012 में वृद्ध के घर से अफीम का तीन किलो दूध जब्त होने पर एनडीपीएस एक्ट में एफआइआर दर्ज की थी। भाकरराम (70) पुत्र लाखाराम बिश्नोई को गिरफ्तार किया गया था। एनडीपीएस एक्ट मामलात की विशेष अदालत ने रिहा करने के आदेश दिए थे।
पहले पुलिस, फिर कोर्ट से बरी, 5 माह रहा जेल में
एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच की थी। जिसमें यह साबित हुआ था कि पुलिस ने षड्यंत्र के तहत गलत मामला दर्ज किया था। 9 जुलाई 2012 को आइजी रेंज व 10 जुलाई 2012 को एसपी (ग्रामीण) के आदेश भाकरराम के खिलाफ षड्यंत्र रचकर मामला दर्ज करना माना गया था। इस निष्कर्ष पर एनडीपीएस कोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 169 के तहत रिहाई के आदेश दिए थे। वृद्ध को 27 फरवरी से 20 जुलाई 2012 तक पांच माह जेल में बंद रखा गया था।
तीन व एक-एक साल की वेतन वृद्धि रोकी
26 सितम्बर को आयोग के समक्ष परिवाद पेश किया गया था। 6 नवम्बर 2021 को आइजी रेंज से तथ्यात्मक जांच तलब की गई थी। तीनों पुलिसकर्मियों को 16/18 सीसीए नोटिस जारी कर जांच की गई थी। तत्कालीन थानाधिकारी के तीन व दोनों कांस्टेबल की एक-एक साल की वेतन वृद्धि अवरूद्ध की गई थी।

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