"साथ आई थी अब अकेली कैसे जाऊं?"

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| Publish: Jan, 16 2015 11:56:00 AM (IST) Jodhpur, Rajasthan, India

जोधपुर।आमजन की सुरक्षा के लिए ड्यूटी करते समय हमलावरों से लड़कर जान गंवाने वाला एएस...

जोधपुर।आमजन की सुरक्षा के लिए ड्यूटी करते समय हमलावरों से लड़कर जान गंवाने वाला एएसआई अपने परिवार में सबसे छोटा था। उसकी मृृत्यु का पता लगते ही परिजनों पर दुख का पहाड़ सा टूट पड़ा। बासनी थाने के सरकारी क्वार्टर में रहने वाली पत्नी की आंखों से अश्रूधारा बहने लगी।


वह रोते हुए बार-बार कह रही थी, "मैं अपने पति के साथ यहां आई थी, अब अकेले कैसे घर जाऊं?" भाई ने बहन को बच्चों की तरफ ध्यान दिलाते हुए ढाढ़स बंधाने का प्रयास किया, लेकिन वह खुद अपने आंसू नहीं रोक पाया। फिर अपनी बहन व दो बच्चों को वह कार से गांव लेकर रवाना हो गया। क्वार्टर में रहने वाले अन्य महिलाओं ने भी दिलासा दी, लेकिन उनकी आंखें रो-रोकर लाल हो रही थी।

"पिता व बड़े भाई से ली थी प्रेरणा"


एएसआई के बड़े भाई मनोज कुमार ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वे तीन भाई हैं। सबसे बड़ा भाई कंवरसिंह पुलिस में हैड कांस्टेबल रहे चुके हैं। जबकि पिता रामेश्वरलाल भी आरएसी में जवान थे। पिता की प्रेरणा से ही मंझले बेटै राजेश कुमार ने पुलिस सेवा में ज्वॉइन की थी। राजेश पत्नी पुष्पा, तेरह वर्षीय पुत्री प्रीति, स्नेहा व छह वर्षीय पुत्र आदित्य के साथ जोधपुर में रह रहा था।

विरोध के स्वर भी


एमडीएम अस्पताल की मोर्चरी के बाहर परिचितों ने कुछ विरोध जताया। उन्होंने मृतक के परिजनों को दिल्ली सरकार की तरह दिए गए एक करोड़ रूपए के पैकेज की मांग की। तब तक उन्होंने शव उठाने से इनकार भी कर दिया, लेकिन मृतक के भाई व अन्य परिजनों ने कोई विरोध नहीं जताया। विधायक सूर्यकांता व्यास भी यहां पहुंची।

पदोन्नति से बना एएसआई


पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक एएसआई राजेश कुमार मीणा की बतौर सिपाही 28 जुलाई 1993 में पुलिस में जोधपुर में भर्ती हुआ था। 20 वर्ष व पांच माह की नौकरी के दौरान वह हैड कांस्टेबल और फिर एक वर्ष पहले ही एएसआई पद पर पदोन्नत हुआ। वह साढ़े सात वर्ष डीआईजी रिजर्व फोर्स, साढ़े चार वर्ष तक बासनी, छह वर्ष तक यातायात, कुछ समय पुलिस लाइन, दुर्घटना थाना, मण्डोर, शास्त्रीनगर व उदयमंदिर थाने में तैनात रह चुका है। पोस्टमार्टम के बाद एम्बुलेंस से कॉफिन में शव रातानाडा स्थित पुलिस लाइन लाया गया, जहां तिरंगे झण्डे में लिपटे शव को राष्ट्रीय गार्ड से सलामी दी गई।


महापौर रामेश्वर दाधीच, डीसीपी अजयपाल लाम्बा व राहुल बारहठ, पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) राहुल प्रकाश, लूनी विधायक जोगाराम पटेल, एडीसीपी केसरसिंह शेखावत व सतीशचन्द्र जांगिड सहित सभी अधिकारियों व जवानों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए।

एएसआई को शहीद के समकक्ष पैकेज



(डीसीपी अजयपाल लाम्बा के अनुसार)
एएसआई को शहीद का दर्जा मिलेगा
परिजनों को बीस लाख रूपए का मुआवजा।
विशेष पेंशन अवार्ड व पे-प्रोटेक्शन। यानि एएसआई के सेवानिवृत्त होने तक की अवधि का सम्पूर्ण वेतन, पदोन्नति व अन्य परिलाभ।
एक आश्रित को सरकारी नौकरी।
पुलिस कल्याण निधि से एक लाख रूपए।
सामूहिक दुर्घटना बीमा।
आरपीबीएफ के तहत तीस हजार रूपए। जीपीएफ, ग्रेच्युटी आदि।
राजस्थान पुलिस कार्मिक कल्याण कोष से बीस हजार रूपए।

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