राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में कहा... आरक्षण की सिफारिश आयोग ने की, जिसे मानने को सरकार बाध्य है

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में कहा... आरक्षण की सिफारिश आयोग ने की, जिसे मानने को सरकार बाध्य है

Harshwardhan Singh Bhati | Updated: 08 Aug 2019, 02:18:50 PM (IST) Jodhpur, Jodhpur, Rajasthan, India

गुर्जर सहित पांच जातियों को अलग से 5 प्रतिशत आरक्षण पर राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में कहा है कि इन जातियों को अलग से आरक्षण के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग ने सिफारिश की, जिसे मानने के लिए राज्य सरकार बाध्य है।

जोधपुर/जयपुर. गुर्जर सहित पांच जातियों को अलग से 5 प्रतिशत आरक्षण पर राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में कहा है कि इन जातियों को अलग से आरक्षण के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग ने सिफारिश की, जिसे मानने के लिए राज्य सरकार बाध्य है। सुनवाई 20 अगस्त तक टालते हुए कोर्ट ने इस मामले में मेरिट पर सुनवाई की मंशा जाहिर की है। मुख्य न्यायाधीश एस रविन्द्र भट्ट व न्यायाधीश विनीत कुमार माथुर की खण्डपीठ ने अरविन्द शर्मा की जनहित याचिका पर बुधवार को यह आदेश दिया।

कोर्ट में एक घंटा 20 मिनट तक राज्य सरकार का पक्ष रखा, लेकिन समय कम होने के कारण कोर्ट को सुनवाई टालनी पड़ी। मुख्य न्यायाधीश भट्ट ने कहा कि वे इस मामले में आगे की सुनवाई जयपुर में करेंगे। हालांकि 20 अगस्त को भी सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग से ही होने की संभावना है, क्योंकि न्यायाधीश माथुर संभवतया जोधपुर में ही रहेंगे। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई देखने के लिए बुधवार को भी वकीलों का क्रेज बना रहा, हालांकि वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई का बुधवार को तीसरा दिन था।

महाधिवक्ता ने कहा, न्यायिक समीक्षा की सीमा है
बुधवार को महाधिवक्ता एम एस सिंघवी ने राज्य सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि जस्टिस एस के गर्ग की उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने पांच जातियों के बारे में विस्तृत अध्ययन किया और उसके आधार पर ही रिपोर्ट दी। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने इसी कमेटी के अध्ययन के आधार पर इन जातियों को अलग से आरक्षण की सिफारिश की। आयोग की इस सिफारिश को मानने के लिए राज्य सरकार बाध्य है।

उन्होंने कहा कि कमेटी व आयोग की रिपोर्ट को याचिका में चुनौती नहीं दी गई है। हालांकि राज्य सरकार ने कोर्ट में इनकी रिपोर्ट पेश कर दी है। यह रिपोर्ट पेश होने के बाद याचिकाकर्ता ने रिपोर्ट को चुनौती दी। इस पर कोर्ट ने कहा, मामले में मेरिट पर सुनवाई की जाएगी। महाधिवक्ता सिंघवी ने न्यायिक समीक्षा के मामले में न्यायालय की सीमा को लेकर सुप्रीम कोर्ट सहित विभिन्न न्यायालयों के फैसले भी पेश किए।

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