#Ramazan 2019 : प्रचंड गर्मी में रख रहे हैं रोजे, ईदुल फित्र की तैयारियां शुरू

MI Zahir

Publish: May, 29 2019 06:39:43 PM (IST)

Jodhpur, Jodhpur, Rajasthan, India

जोधपुर. इस बार तेज गर्मी के बावजूद रहमतों व बरकतों के महीने रमजान में हर उम्र के रोजेदार अकीदत के साथ रोजे रख रहे हैं। रमजान के तीसरे अशरे में इबादत पर जोर है और शबे कद्र के दौरान रात को जाग कर भी इबादत की जा रही है। मुस्लिम बहुल इलाकों और मस्जिदों में इबादत की जा रही है। नमाज के अलावा तरावीह की विशेष नमाज पढ़ी जा रही है तो कुरान शरीफ की तिलावत पर भी जोर है।

कपडे़ खरीदने व सिलवाने का सिलसिला शुरू

इसके अलावा विदा हरे रहे रमजान में जक़ात,खैऱात व फितरा के रूप में देने के लिए प्रेरित व संकलन करने के उद्देश्श्य से मदरसों व यतीमखानों की ऑटो में माइक लगी गाडि़यां मुस्लिम बहुल इलाकों में घूम रही हैं। रमजान का महीना विदा होने में कुछ दिन रह गए हैं। वहीं जुमातुल-विदा और ईद की तैयारियां शुरू हो गई हैं। महिलाओं व बच्चों के अलविदा जुमा और ईद पर पहने जाने वाले रेडिमेड व बिना सिले कपडे़ खरीदने व सिलवाने का सिलसिला शुरू हो गया है।

--आलिमों की नजर में रमजान--
पड़ोसियों से अच्छा व्यवहार करें
रमजान में पड़ोसियों से अच्छा व्यवहार करना, गरीबों को रोजा रखवाना और रोजा खुलवाना इस्लाम की तालीम है। लड़ाई-झगड़़ों से बचना, किसी को जुबान से या हाथ से तकलीफ न पहुंचाना ही रोजे का पैगाम है। दिन में रोजा रखना और रात को ज्यादा से ज्यादा नफिल नमाज पढऩा और कुरआन की तिलावत करना रोजे का पैगाम है। जकात देना और गरीबों की मदद करना, कुरआन की तालीम और इस्लाम का पैगाम है। यह सबक हमें रमजान की आमद से मिलता है।

- मौलाना शेर मोहम्मद रिजवी

मुफ्ती-ए-आजम राजस्थान
जोधपुर

रोजा इन्सान को एक दूसरे से जोड़ता
रोजे का फलसफा यह है कि हर इंसान, चाहे वो अमीर हो या गरीब, छोटा हो या बड़ा, फकीर हो या सुल्तान, जब अल्लाह की रजा के लिए उसके हुक्म के मुताबिक रोजा रखेगा तो अल्लाह बन्दे पर बरकतों की बारिश करेगा। अल्लाह तआला इस महीने में सच्चे दिल से इबादत करने वाले गुनाहगारों के गुनाह माफ फरमाता है। रोजा इन्सान को एक दूसरे से जोड़ता है। मेरी युवा वर्ग से अपील है कि वो इस मुबारक महीने में फि जूल वक्त जाया न करें और ज्यादा से ज्यादा इबादत में मशगूल रह कर स्वयं अपनी, परिवार, समाज व देश की खुशहाली और तरक्की के लिए दुआएं करें।

-काजी मोहम्मद तैयब अंसारी

शहर खतीब व पेश इमाम

जो गुनाह से चूके, वो मिट जाते हैं

हजरत रसूले अकरम सल्ललाहु अलैहि वसल्लम फरमाते है कि जिसने रमजान शरीफ में राजे रखे और उसकी हदों को पहचाना, यानि जिस तरह रखने चाहिये उसी तरह रखे, जिससे बचना चाहिए उसे बचा, तो जो कुछ गुनाह पहले कर चूका है वो रोजे रखने से अल्लाह तआला मिटा देता है। आदमी के हर नेक का बदला 10 से 700 गुना तक दिया जाता है। इफ्तार (रोजा खोलने का समय) के वक्त रोजेदार की हर जाइज दुआ कबूल होती है।

- मौलाना फिदा रसूल बरकाती

खतीब व पेश इमाम, जामा मस्जिद, जोधपुर

अल्लाह की बड़ाई बोलो

कुराने करीम में अल्लाह तआला फरमाता है ‘ रमजान के महीने में कुरआन उतरा, लोगों की हिदायत और रहनुमाई फैसले की रोशन बातें, तो तुम में जो कोई यह महीना पाए, जरूर इसके रोजे रखे और जो बीमार या सफर में हों तो उतने रोजे, और दिनों में रखें, अल्लाह तआला तुम पर आसानी चाहता है और तुम पर दुश्वारी नहीं चाहता और इसलिए कि तुम गिनती करो 29 या 30। अल्लाह की बड़ाई बोलो, इस पर कि उसने तुम्हें हिदायत की और कहीं तुम हकगुजार हो।

-सय्यद वाहिद अली

शहर काजी, जोधपुर

 

 

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