रेजीडेंट्स हड़ताल: प्रशासन का सख्त कदम, 76 इनसर्विस रेजीडेंट रिलीव

रेजीडेंट्स हड़ताल:  प्रशासन का सख्त कदम, 76 इनसर्विस रेजीडेंट रिलीव
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एसएन मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट्स की हड़ताल जारी है। कॉलेज को एक-दो दिन में नए चिकित्सक मिलने की उम्मीद है। उधर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए 76 इनसर्विस रेजीडेंट्स को रिलीव कर दिया।

परीक्षा प्रणाली के विरोध में सोमवार रात से हड़ताल पर गए एसएन मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट्स में से 76 इनसर्विस रेजीडेंट्स को मंगलवार को रिलीव कर दिया गया। चिकित्सा मंत्री राजेन्द्र राठौड़ के निर्देश के बाद कॉलेज प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया। वहीं हड़ताल में शामिल फ्रे शर्स रेजीडेंट्स के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करने की तैयारी कर ली गई है। साथ ही चिकित्सा मंत्री ने एसएन मेडिकल कॉलेज को एक-दो दिन में 250 नए चिकित्सक उपलब्ध कराने की बात कही है।

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उधर, रेजीडेंट हड़ताल की वजह से मंगलवार को मेडिकल कॉलेज के तीनों अस्पतालों (एमजीएच, एमडीएमएच और उम्मेद अस्पताल) में चिकित्सा व्यवस्थाएं चरमराई रहीं। रेजीडेंट हड़ताल के चलते तीनों अस्पतालों में सिर्फ इमरजेंसी ऑपरेशन हुए और करीब 62 ऑपरेशन टालने पड़े। रेजीडेंट हड़ताल की वजह से सीनियर डॉक्टर्स ने आउटडोर आदि की व्यवस्थाएं सम्भालीं। हड़ताल के चलते कई मरीजों की छुट्टी कर दी गई।

मंत्री के निर्देश पर सख्त कार्रवाई

प्रदेश के सभी 6 मेडिकल कॉलेजों के रेजीडेंट्स के हड़ताल पर जाने के बाद मंगलवार दोपहर को चिकित्सा मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने सभी मेडिकल कॉलेज प्राचार्यों की वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें हड़ताल पर गए इनसर्विस रेजीडेंट्स को तुरंत रिलीव करने और फ्रेशर्स रेजीडेंट्स को टर्मिनेट करने के निर्देश जारी किए। साथ ही हाल ही में भर्ती किए गए नए चिकित्सकों में से 250 चिकित्सक जोधपुर को भेजने की भी बात कही।

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मरीजों की लम्बी कतार, दो-तीन चिकित्सक करते रहे उपचार

महात्मा गांधी अस्पताल के मेडिकल आउटडोर में मंगलवार करीब दोपहर 12:10 बजे मरीजों की लम्बी कतार लगी हुई थी। आउटडोर मरीजों की भीड़ से भरा हुआ था। वहीं आउटडोर में दो-तीन चिकित्सक ही मरीजों की स्वास्थ्य जांच व परामर्श देते नजर आए। वहीं मथुरादास माथुर अस्पताल के सर्जिकल आउटडोर में चिकित्सकों की कुर्सियां खाली पड़ी थीं और कई मरीज इंतजार में बैठे नजर आए।

 

नर्सिंग स्टाफ के भरोसे रहे मरीजरेजीडेंट हड़ताल के चलते एमडीएमएच का ट्रोमा सेंटर और सर्जिकल वार्ड में मंगलवार दोपहर 2 बजे बाद मरीजों को अटेंड करने के लिए सिर्फ नर्सिंग स्टाफ ही नजर आया। यहां कोई सीनियर डॉक्टर मौजूद नहीं दिखा। वहीं ट्रोमा ऑब्जर्वेशन वार्ड के सभी बेड खाली नजर आए।

उम्मेद अस्पताल का शिशु गहन चिकित्सा इकाई

उम्मेद अस्पताल के प्रथम तल पर स्थित शिशु गहन चिकित्सा इकाई में मंगलवार दोपहर को न तो कोई नर्सिंग स्टाफ मौजूद मिला और न ही डॉक्टर। ऐसे में यहां परिजन ही अपने बीमार बच्चों की देखरेख करते नजर आए।

बदलाव का सर्कुलर नहीं, फिर कैसा विरोध

रेजीडेंट डॉक्टर्स परीक्षा प्रणाली में बदलाव कर थीसिस व उत्तर पुस्तिकाएं जांचने के लिए बाहर भेजने के मामले को लेकर विरोध कर रहे हैं, लेकिन एसएन मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. एएल भाट का कहना है कि परीक्षा का पैटर्न एमसीआई निर्धारित करती है। 

एमसीआई के पैटर्न के आधार पर ही यूनिवर्सिटी को परीक्षा आयोजित करनी होती है। राज्य सरकार का इसमें कोई रोल नहीं होता। एमसीआई के नियमानुसार ही परीक्षा आयोजित की जाएगी। वैसे भी हमारे पास परीक्षा प्रणाली में बदलाव को लेकर कोई सर्कुलर नहीं आया है।

अनुशासन में नहीं रहने वालों पर सख्त कार्रवाई

आदेशानुसार मेडिकल कॉलेज के 76 इनसर्विज रेजीडेंट्स को रिलीव कर निदेशालय में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए हैं। हड़ताल में शामिल फ्रेशर्स की लिस्ट भी तैयार की जा रही है। सरकार के निर्देशानुसार जो रेजीडेंट अनुशासन में नहीं रहेंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। रेजीडेंट्स द्वारा एक घंटे का नोटिस देकर हड़ताल पर जाना गलत था। 

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सरकार ने एसएन मेडिकल कॉलेज को एक-दो दिन में 250 नए चिकित्सक उपलब्ध कराने की बात कही है। परीक्षा प्रणाली को लेकर एमसीआई की ओर से हमारे पास कोई सर्कुलर नहीं आया है। वैसे भी एमसीआई जो भी नियम लागू करेगी उनके अनुसार ही हमें परीक्षा आयोजित करनी है। -डॉ. एएल भाट, प्राचार्य एवं नियंत्रक, एसएन मेडिकल कॉलेज, जोधपुर 

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