इन सड़कों को पसंद नहीं ये बंटवारा

- कहीं टूटे तो कहीं सड़कों की ऊंचाई बढने से जमींदोज हुए डिवाइडर

By: Sawaisingh Rathore

Published: 12 Nov 2017, 06:43 PM IST

चौपासनी (जोधपुर). आमतौर पर डिवाइडर दो सड़कों को विभाजित करने सहित यातायात व्यवस्था को सुगम बनाए रखने में काम आता है लेकिन शहर के दक्षिणी-पश्चिमी क्षेत्र में ये डिवाइडर सड़कों को जोडऩे का काम कर रहे हैं। सड़कों के मध्य कहीं पर डिवाइडर क्षतिग्रस्त हैं तो कहीं सड़कों की ऊंचाई बढने से ये डिवाइडर सड़क के बराबर ही रह गए हंै। सड़क और डिवाइडर की ऊंचाई बराबर होने से वाहन चालक शार्टकट के चक्कर में डिवाइडर के ऊपर से वाहन निकालने के प्रयास में कई बार हादसों का शिकार होते हैं। कुछ स्थानों पर सड़कों की चौड़ाई और यातायात व्यवस्था को देखते हुए डिवाइडर बनाने की जरूरत है लेकिन वहां भी बेरिकेट या सफेद पट्टी से ही काम चलाया जा रहा है।

जगह-जगह से हैं टूटे
शहर के बासनी और चौपासनी क्षेत्र में कई स्थानों पर डिवाइडर टूटे हुए हंै। कई बार हादसों के बाद क्षतिग्रस्त डिवाइडर की समय पर मरम्मत नहीं हो पाती है। वाहनों के सड़क पार करने के दौरान असावधानी के कारण अधिकतर डिवाइडर कोनों से टूटे हुए हैं। कई बार विद्युत पोल की मरम्मत आदि के लिए डिवाइडर को तोड़कर काम किया जाता है लेकिन इसके बाद डिवाइडर को यथास्थिति में ही छोड़कर चले जाने से ये सड़क हादसों का सबब बनते हैं। अमृता देवी सर्किल के पास बने ब्रिज पर लाइटों की मरम्मत के बाद डिवाइडर का मलबा सड़क पर ही छोड़ दिया गया है, जिससे वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

शार्टकट के लिए तोड़ डाले डिवाइडर
एक तरफ जहां डिवाइडर हादसों सहित अन्य कारणों से क्षतिग्रस्त हुए हैं वहीं कुछ स्थानों पर इन्हें लोगों ने भी शार्टकट के चक्कर में तोड़ डाला है। शार्टकट के चक्कर में जगह-जगह से तोड़े ये डिवाइडर हादसों का कारण बनते जा रहे हैं। कुछ व्यापारिक प्रतिष्ठान और दुकानदार भी अपने फायदों के लिए डिवाइडर को तोड़ रहे हैं ताकि ग्राहक घूमकर आने के चक्कर में किसी अन्य दुकान पर न चले जाए। बारहवीं रोड की ओर जाने वाली सड़क के डिवाइडर पर पौधों की सुरक्षा के लिए लोहे की जालियां लगी है लेकिन लोगों ने शार्टकट के चक्कर में इसे भी तोड़ डाला है।

सड़क का लेवल तो बढ गया लेकिन डिवाइडर वही
सड़क पर निर्माण कार्य और उखड़ी सड़कों पर बार-बार पेच वर्क होने से सड़कों का लेवल तो बढ़ गया है लेकिन डिवाइडर की ऊंचाई नहीं बढाई गई है। ये डिवाइडर सड़कों की ऊंचाई का स्तर बढने से सड़कों के बराबर तो कहीं इससे भी नीचे रह गए हैं। डिवाइडर का लेवल सड़क के बराबर होने के कारण वाहन चालक डिवाइडर के ऊपर से वाहनों को लेकर गलत दिशा में आ जाते हैं। ऐसे में एक तरफा चल रहे वाहनों के सामने अचानक वाहन आने से हादसे की आशंका बढ़ जाती है। न्यू पावर हाउस बिजलीघर के पास सड़क पर डिवाइडर की ऊंचाई सड़क के स्तर तक ही रह गई है।

कहीं बेरिकेट्स से चल रहा काम
शहर में कुछ सड़कों की चौड़ाई को देखते हुए डिवाइडर की आवश्यकता महसूस की जा रही है लेकिन प्रशासन महज इन सड़कों पर कहीं डिवाइडिंग पट्टी तो कहीं बेरिकेट रखकर ही काम चला रहा है। डीजल शेड रोड पर यातायात दबाव अधिक रहता है लेकिन यहां बेरिकेट से ही जुगाड़ चल रहा है। ये बेरिकेट 50-60 मीटर की आपसी दूरी पर लगाए गए हैं, इस कारण वाहन चालक इनसे टकराकर चोटिल भी हो रहे हैं। वहीं कभी-कभी पशुओं के गिरने से भी ये बेरिकेट वाहन चालकों के लिए राह में रोड़े बनते हैं।

Sawaisingh Rathore
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