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बेटियों ने बॉर्डर पर भी मनवाया लोहा

-कॉम्बेट ड्यूटी से नाइट पेट्रोल तक करती हैं महिलाएं

जोधपुर

Published: October 26, 2021 06:04:22 pm

सुरेश व्यास/ जोधपुर। सशस्त्र सेनाओं की तरह सरहद की चौकसी में भी देश की बेटियां अपना लोहा मनवाने लगी है। आज से करीब 14 साल पहले पहली बार सीमा सुरक्षा बल में भर्ती हुई बेटियां सिर्फ सीमा से सटे खेतों में महिला किसानों की तलाशी आदि का काम करती थी, लेकिन आज इन्हें पाकिस्तान से सटी समूची सीमा पर हाथों में हथियार उठाए, सीमा की सुरक्षा करते हुए देखा जा सकता है। अब ये नारी शक्ति बॉर्डर पर नाइट पेट्रोलिंग ही नहीं, हर तरह की कॉम्बेट ड्यूटी, सीमा पार से किसी अप्रिय परिस्थिति या आतंकी निरोधी ऑपरेशन में भी भूमिका निभाने में सक्षम हो चुकी है। हाल ही पंजाब से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बीएसएफ की महिला बटालियन में शामिल सीमा प्रहरियों ने एक पाकिस्तानी ड्रोन को फायरिंग कर मार भगाया।
बेटियों ने बॉर्डर पर भी मनवाया लोहा
राजस्थान से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ऊंटों पर बैठकर गश्त करती बेटियां।
राजस्थान से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा की विषम भौगोलिक परिस्थितयां भी देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाली बेटियों का हौसला नहीं डिगा सकी। चाहे गर्मी में लू के थपेड़े हो या 50 डिग्री से ज्यादा तापमान, सर्दी में हाड़कम्पा देने वाली माइनस 2 से 4 डिग्री तापमान वाली ठंड और बारिश से पहले आने वाले रेतीले बवंडरों के बीच जैसलमेर, बाड़मेर व बीकानेर से सटी घने रेगिस्तान वाली सीमा पर पुरुषों की तरह महिला सिपाही भी पैदल या ऊंटों पर बैठकर गश्त करती हैं। हाथों में अत्याधुनिक इन्सास राइफल्स और नाइट पेट्रोलिंग के दौरान हैंड हैंडल्ड थर्मल डिवाइस (एचएचटीआई) जैसे सर्विलांस इक्यूपमेंट के साथ घने अंधेरे में भी अकेले सीमा पर निकलने में ये बहादुर बेटियां नहीं हिचकती।
हर काम में हैं माहिर
बीएसएफ राजस्थान सीमांत मुख्यालय के महानिरीक्षक पंकज गूमर कहते हैं कि ये बहादुर बेटियों ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बेहतरीन कार्यकुशलता दिखाई है। ये जरूरत पड़ने पर हथियार चलाकर किसी भी प्रतिकूल परिस्थिति का माकूल जवाब देने में भी सक्षम हैं।
तलाशी से शुरू हुआ था सफर
बीएसएफ में पहली बार 2008 में महिला बटालियन बनी थी। राजस्थान सीमा पर तैनात महिला रिक्रूट्स को सबसे पहले श्रीगंगानगर से सटी सीमा पर स्थित खेतों में आने-जाने वाली महिलाओं की तलाशी में लगाया गया था। अब ये पुरुषों के बराबर हर ड्यूटी में लगाई जाने लगी हैं।
सिपाही हीं नहीं, अफसर भी
बीएसएफ में सिपाही ही नहीं, हर कैडर में महिलाओं की भर्ती हो रही है। बीकानेर की बेटी तनुश्री पारीक 2017 बीएसएफ की पहली महिला अधिकारी बनी। महिलाएं आज इंस्पेक्टर से डिप्टी कमांडेंट की रैंक तक पहुंच चुकी है। केंद्र सरकार ने हर अर्दधसैनिक बल में पांच प्रतिशत महिलाओं की भर्ती का फैसला किया था, इसके बाद महिलाओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अकेले बीएसएफ में अब तक 8 से 10 हजार महिलाओं को भर्ती किया गया है।
मेरी यूनिट ही मेरा परिवार
यह सही है कि हम लोग परिवार से काफी दूर बॉर्डर पर तैनात है लेकिन हमें इसकी कभी कमी महसूस नहीं होती। हमारी यूनिट ही मेरा परिवार है। ड्यूटी के समय और ड्यूटी के बाद भी हम लोग बेहतर तालमेल के साथ रहते हैं। हमारा परिवार भी इस बात पर गर्व करता है कि बॉर्डर की सुरक्षा हमारे हाथों में है। जब भी जरूरत होती है हम छुट्टी लेकर परिवार से मिलने जा सकते हैं।
- सविता, पश्चिम सीमा पर तैनात सब-इंस्पेक्टर

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