scriptSide effects in the heart of diabetic children will be easily caught | आसानी से पकड़ में आएंगे डायबिटीक बच्चों के ह्रदय में हो रहे दुष्प्रभाव | Patrika News

आसानी से पकड़ में आएंगे डायबिटीक बच्चों के ह्रदय में हो रहे दुष्प्रभाव

 

 

 

रिसर्च पेरिस में हुई यूरोपियन सोसायटी ऑफ कार्डियोलॉजी कांग्रेस में भी प्रस्तुत किया गया

जोधपुर

Published: December 27, 2021 11:19:38 pm

जोधपुर. जन्मजात मधुमेह (डायबिटीज) रोग से ग्रसित बच्चों में दिल की बीमारी की आशंका का पता अब आसानी से लगाया जा सकेगा। एसजीपीजीआई लखनऊ के चिकित्सकों ने कैंसर पीडि़तों की कीमोथैरेपी के दौरान अपनाई जाने वाली एलवी स्ट्रेन पद्धति की मदद से डायबिटीक बच्चों पर अनुसंधान के बाद इनकेहृदय पर हो रहे दुष्प्रभावों की पहचान को आसान बना दिया है। इस पद्धति की मदद से चिकित्सक इकोकार्डियोग्राफी के जरिए एलवी स्ट्रेन मूवमेंट को देखकर भविष्य के खतरे को पहचान लेते हैं।
आसानी से पकड़ में आएंगे डायबिटीक बच्चों के ह्रदय में हो रहे दुष्प्रभाव
आसानी से पकड़ में आएंगे डायबिटीक बच्चों के ह्रदय में हो रहे दुष्प्रभाव
इस विषय पर एसजीपीजीआई लखनऊ में हाल ही 75 बच्चों पर रिसर्च किया गया। इसमें एसजीपीजीआइ लखनऊ के एचओडी डॉ. आदित्य कपूर, एम्स जोधपुर के कार्डियोलॉजिस्ट असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अतुल कौशिक, एसजीपीजीआइ लखनऊ की की एंड्रोकॉनोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. प्रीति शामिल थी। टाइप-1 डायबिटीज में पाया गया कि शूगर एलवी स्ट्रेन को प्रभावित करता है। 75 बच्चों में से 50 टाइप-1 डायबिटीज के बच्चों को शामिल किया गया। इसमें 25 डायबिटीज कंट्रोल बच्चे लिए गए। टाइप-1 डायबिटीक बच्चों में पाया गया कि दिल के अलग-अलग हिस्सों में स्ट्रेन का प्रभावित थी।
भांप सकते हैं खतरा

कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. कौशिक के अनुसारजन्मजात मधुमेह रोग से ग्रसित बच्चों में इको की एलवी स्ट्रेन पद्धति से हार्ट को संभावित खतरे परखने का अनुमान लगाया जाता है। इसमें चिकित्सक बच्चों के हृदय आने वाले दिनों में पडऩे वाले दुष्प्रभावों को देख सकते है। इस पद्धति का इस्तेमाल कैंसर रोगियों को कीमोथैरेपी देने के दौरान भी किया जाता है।
यूं लगाते हैं अनुमान

दरअसल, इसमें 'स्ट्रेनÓ हार्ट की मांसपेशियों की फैलाव व सिकुडऩे की क्षमता होती है। उस क्षमता को मापने का तरीका एलवी स्ट्रेन पद्धति से देखा जाता है। एलवी स्ट्रेन के प्रभाव से ही हार्ट का सिकुडऩा व फैलना कम हो जाता है। इससे हार्ट इफैक्ट के अवसर देख लिए जाते है। वर्तमान में किसी का हार्ट नॉमर्ल है, लेकिन स्ट्रेन बिगड़ा हुआ है तो आगामी खतरे का भी अंदाज लगाया जा सकता है। यह रिसर्च पेरिस में हुई यूरोपियन सोसायटी ऑफ कार्डियोलॉजी कांग्रेस में भी प्रस्तुत किया गया था। वहां इसे खासी सराहना मिली।

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