सोलर पैनल से दिल्ली की सरकारी स्कूलों का बिजली बिल हो गया शून्य, जोधपुर में भी हों प्रयास

सोलर पैनल से दिल्ली की सरकारी स्कूलों का बिजली बिल हो गया शून्य, जोधपुर में भी हों प्रयास

Harshwardhan Singh Bhati | Updated: 14 Jun 2019, 03:52:04 PM (IST) Jodhpur, Jodhpur, Rajasthan, India

जधानी जयपुर सहित प्रदेश के अन्य शहरों व कस्बों में भी इसी तर्ज पर काम हो सकता है।

जयपुर/जोधपुर. सूरज की रोशनी से बिजली उत्पादन के लिए पड़ौसी राज्य नजीर साबित हो रहे हैं। इसमें दिल्ली मुख्य रूप से शामिल है लेकिन राजस्थान में नौकरशाह केवल निजी कंपनियों के भरोसे बैठे हैं। दिल्ली में सरकारी स्कूल की इमारतों पर सोलर पैनल लगाकर कई किलोवॉट उर्जा उत्पादन किया जा रहा है। एक स्कूल में 35 हजार रुपए का बिल शून्य पर आ गया। बल्कि, उपभोग से ज्यादा बिजली उत्पादन कर ग्रिड में बेच दी गई।

राजधानी जयपुर सहित प्रदेश के अन्य शहरों व कस्बों में भी इसी तर्ज पर काम हो सकता है। यहां कई सरकारी स्कूल संचालित हो रहे हैं। इसमें 400 वर्गगज से लेकर 8 बीघा जमीन पर स्कूल संचालित हो रहे हैं। विषय विशेषज्ञों के मुताबिक यहां सोलर पैनल से बिजली उत्पादन किया जाए तो ज्यादातर स्कूल में 75 से 80 फीसदी बिजली तो इसी से मिल जाएगी। मात्र 20 प्रतिशत बिजली का बिल चुकाना होगा। गंभीर यह है कि यहां एक भी सरकारी स्कूल ऐसा नहीं है जो नजीर बना हो। सरकार इस तरफ ध्यान ही नहीं दे रही।

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इस तरह समझें
प्राइमरी स्कूल के अनुसार
- 2 किलोवॉट क्षमता के लिए 200 से 250 वर्गफीट एरिया चाहिए।
- 2 किलोवॉट क्षमता के सोलर पैनल से प्रतिदिन 8 यूनिट और सालभर में 3000 यूनिट बिजली बनती है।
- एक प्राइमरी स्कूल में 5 पंखे चलते हैं। 60 वॉट का एक पंखा हैए ऐसे में एक घंटे में विद्युत खपत 300 वॉट हुई। कम से कम 6 घंटे पंखे चलते हैं तो 1.5 यूनिट बिजली खपत होगी।
- इसी स्कूल में 20 ट्यूबलाइट जलती है (40 वॉट की एक) तो 800 वॉट प्रति घंटे खपत। 6 घंटे के हिसाब से 4.80 यूनिट की विद्युत खपत।
- पानी की मोटर या फिर अन्य उपकरण संचालन हो तो भी 2 से 3 यूनिट की खपत।
- ऐसे में कुल 9.3 यूनिट की बिजली खपत प्रतिदिन होगी।
- दो किलोवॉट क्षमता के सोलर पैनल से प्रतिदिन 8 यूनिट बिजली मिलेगी तो उस स्कूल की ग्रिड से मिलने वाली बिजली की खपत 1.3 यूनिट ही रह जाएगी। यानि, 80 फीसदी से भी ज्यादा बिजली बिल में बचत हो सकती है।

अभी इतना आ रहा बिल
5 बीघा में परिसर फैला हो और 2 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत होंं ऐसे स्कूलों में हर माह करीब 10 हजार रुपए का बिजली बिल आ रहा है। वहीं, प्राइमरी से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर के स्कूलों में 1500 से 6 हजार रुपए तक का बिल है।

सौर उर्जा की जरूरत
- दिल्ली बना नजीर, अब यहां भी सरकार करे पहले
- अभी 1 हजार से 10 हजार प्रतिमाह आ रहा एक स्कूल का बिल
- आ सकता सौर उर्जा से बिजली का बिल भी शून्य पर
- 400 वर्गगज से 8 बीघा तक क्षेत्रफल में फैले हैं स्कूल

दिल्ली में शुरुआत
दिल्ली सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत 21 स्कूलों में सोलर पैनल लगाए, जहां से सौर उर्जा से मिलने वाली बिजली के बाद बिल शुल्क में 80 फीसदी तक कमी हो गई। एक स्कूल तो ऐसा है जहां बिजली बिल 35 हजार से सीधा शून्य पर पहुंच गया। इसके बाद सरकार ने यहां 500 स्कूलों में सोलर पैनल लगाने का निर्णय किया है। 100 स्कूलों में काम शुरू हो गया है। शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ट्विट भी कर चुके हैं।

इनका कहना है
हम भी इस पर मंथन कर रहे हैं, लेकिन इसमें ज्यादातर स्कूल भवन शामिल हों इसके लिए वित्तीय संसाधनों की जरूरत है। इस आधार पर प्रोजेक्ट बनाकर केन्द्र सरकार को भेजेंगे।

गोविन्द सिंह डोटासरा, शिक्षा राज्य मंत्री

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