झुलसाने वाला सूरज चमका सकता है प्रदेश की सूरत, राजस्थान के पास है सौर ऊर्जा की ताकत

झुलसाने वाला सूरज चमका सकता है प्रदेश की सूरत, राजस्थान के पास है सौर ऊर्जा की ताकत

Harshwardhan Singh Bhati | Publish: Jun, 14 2019 04:38:12 PM (IST) | Updated: Jun, 14 2019 04:52:36 PM (IST) Jodhpur, Jodhpur, Rajasthan, India

थोड़ी सी जागरुकता और सक्रियता दिखाएं तो आने वाले 10 सालों में यही सौर ऊर्जा हमारे देश को विश्व में अव्वल बना सकती है।

अविनाश केवलिया/जोधपुर. आग उगलता सूरज हमें झुलसा रहा है लेकिन सूरज की यही किरणें हमारे प्रदेश का भाग्य चमका सकती है। सौर ऊर्जा हमारे प्रदेश के पास एक ऐसी ताकत है जिसका सही उपयोग किया जाए तो न सिर्फ राजस्थान देश में चमकता हीरा साबित हो सकता है बल्कि देश को भी विश्व में अव्वल बनाया जा सकता है। जिस सूरज की तपन से हम परेशान होते हैं यही तपन हमारे विकास की नई इबारत लिख सकता है। पिछले कुछ सालों में जब से हमने इस ओर सोचना शुरू किया तो बदले में सूरज ने भी हमें बहुत कुछ दिया है। आज भी अब प्रदेश में जरूरत की करीब 15-20 प्रतिशत बिजली इसी सौर ऊर्जा से बना रहे हैं। थोड़ी सी जागरुकता और सक्रियता दिखाएं तो आने वाले 10 सालों में यही सौर ऊर्जा हमारे देश को विश्व में अव्वल बना सकती है।

विश्व में हम यहां खड़े हैं

1. चीन को पछाडऩा बड़ी चुनौती
सोलर जनरेशन में चीन सबसे बड़ा नाम है। करीब 150 गीगावाट के सोलर जनरेशन के प्लांट चीन में लगे हैं। यूएसए और जापान जैसे देश भी भारत से आगे हैं। हमारे देश में वर्तमान में 28 गीगावाट बिजली जनरेशन के प्लांट लगे हुए हैं।

2. 2022 का लक्ष्य
सोलर जनरेशन में भारत ने वर्ष 2022 तक 100 गीगावाट बिजली जनरेशन के प्लांट लगाने का लक्ष्य रखा है। इसमें राजस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका है।

3. 2028 में बन सकते हैं अव्वल
यदि 2022 में हम 100 गीगावाट का लक्ष्य अर्जित कर सकते हैं तो इसके बाद 2028 तक हम विश्व में सोलर जनरेशन में सबसे बड़ा नाम होंगे।

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राजस्थान का योगदान

- 28 गीगावाट से अधिक क्षमता के सोलर बिजली जनरेशन प्लांट देशभर में लगे हैं।
- 3 गीगावाट प्रति घंटा बिजली का उत्पादन राजस्थान में फिलहाल हो रहा है। जो कि करीब 10 प्रतिशत है।
- 6 गीगावाट से अधिक बिजली बनाकर कर्नाटक देश में अव्वल है।
- राजस्थान का देश में तीसरा स्थान है। तेलंगाना राजस्थान से आगे हैं।
- 15.20 प्रतिशत प्रदेश की डिमांड की बिजली सोलर जनरेशन से बन रही है।

सौर ऊर्जा का उत्पादन

- 150 लाख यूनिट प्रतिदिन उत्पादन हो रहा है राज्य में
- 2500 मेगावाट प्रतिदिन तक उत्पादन क्षमता के प्लांट संचालित हैं यहां

पवन ऊर्जा का उत्पादन
- 200 लाख यूनिट प्रतिदिन उत्पादन हो रहा है राज्य में
- 4400 मेगावाट प्रतिदिन तक उत्पादन क्षमता के प्लांट संचालित हैं यहां

राजस्थान में ऐसे बन रही है बिजली
1. छबड़ा थर्मल पावर प्लांट- 2320 मेगावाट
2. कोटा सुपर थर्मल प्लांट- 1240 मेगावाट
3. धौलपुर कंबाइंड साईकल पावर स्टेशन - 330 मेगावाट
4. गिरल लिग्नाइट थर्मल पॉवर स्टेशन - 250 मेगावाट
5. सूरतगढ़ सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन - 1500 मेगावाट
6. कालीसिंध थर्मल पॉवर स्टेशम, झालावाड़ - 1200 मेगावाट
7. रामगढ़ गैस थर्मल पॉवर स्टेशन - 273.50 मेगावाट
8. माही हैडल, बांसवाड़ा - 163.85 मेगावाट
9. सोलर जनरेशन - 2.5-3 हजार मेगावाट

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यों समझें प्रदेश में सौर ऊर्जा
- 11-12 हजार मेगावाट ऑवर एमडब्ल्यूएच के करीब जरूरत होती है प्रदेश में बिजली की।
- 8-9 हजार एमडब्ल्यूएच के संयंत्र प्रदेश में लगे हुए हैं।
- 2 से 3 हजार एमडब्ल्यूएच बिजली की आपूर्ति पड़ौसी प्रदेश के ग्रिड से होती है।
- 2.5-3 हजार एमडब्ल्यूएच बिजली सौर ऊर्जा से बन रही है।
(आंकड़े औसत में है, जो कि प्रतिघंटे बदलते रहते हैं)

 

सोलर पैनल ऐसे कम करेगा जेब का भार
- एक किलोवाट का रूफ टॉप सोलर सिस्टम प्रतिदिन औसतन 4 यूनिट बिजली जनरेट करता है।
- एक माह में सोलर सिस्टम से 120 यूनिट से अधिक बिजली बनती है।
- एक सामान्य चार कमरे के मकान की बिजली खपत 300-350 यूनिट प्रतिमाह मानी जाती है।
- 120 यूनिट का खर्च सोलर कम कर देगा।
- ऐसे में सोलर सिस्टम लगे मकान को अभी आ रहे बिल में एक तिहाई रियायत मिल सकती है।

एक्सपर्ट व्यू

जरूरत इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने की है
अभी सोलर जनरेशन में हम देश में तीसरे स्थान पर आते हैं। भड़ला सोलर प्लांट में इतनी क्षमता है तो वह प्रदेश की जरूरत की आधी बिजली बना सकता है। लेकिन सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर इस प्रकार का नहीं है कि वह पूरी बिजली का उपयोग कर सके। देश में राजस्थान और प्रदेश में भी पश्चिमी क्षेत्र में पूरे साल में अधिकांश सन्नी डेज (सूरज की रोशनी) होते हैं। ऐसे में यहां सोलर जनरेशन काफी अधिक है। बाहर से कंपनियां पश्चिमी राजस्थान में सोलर प्लांट इंस्टॉलेशन के लिए आ रही है। 3 साल में राजस्थान का सोलर जनरेशन तीन गुना हो गया है। भड़ला जैसा एक सोलर प्लांट और आ जाए तो राजस्थान प्रदेश में नम्बर एक होगा। राजस्थान में वह क्षमता है जो हमारे देश को सोलर जनरेशन में पहला स्थान दिला सकता है।

- एच.एस पंवार, सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता, राजस्थान विद्युत प्रसारण निगम व सोलर एक्सपर्ट

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