किस्मत का दंश: मां और जिंदगी ने छोड़ा साथ, मौत के बाद भी नहीं मिला सुकून...

किस्मत का दंश: मां और जिंदगी ने छोड़ा साथ, मौत के बाद भी नहीं मिला सुकून...
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एक नवजात मासूम बालिका को किस्मत का एेसा दंश लगा कि उसे मौत के बाद भी सुकून नहीं मिला। बेदर्द मां ने तो पहले ही बिसरा दिया। गंभीर हाल में संघर्ष कर रही बच्ची का साथ जिंदगी ने भी छोड़ दिया। जानें क्यों मर कर भी उसे सुकून नहीं मिल पाया...

पहले मां ने बिसराया और मासूम नवजात (बच्ची) को सोमवार देर रात को पालना गृह में छोड़ दिया गया। नाजुक हालत में उम्मेद अस्पताल पहुंची नवजात का जिंदगी ने भी साथ छोड़ दिया और मंगलवार सुबह 6 बजे उसकी मौत हो गई। इस पर भी किस्मत का दंश थमा नहीं और मासूम नवजात का शव 9 घंटे तक उम्मेद अस्पताल में उपेक्षित रखा रहा। 

अस्पताल प्रशासन की सूचना के काफी देर बाद दोपहर को पुलिस अस्पताल पहुंची और नवजात के शव को लेकर एमजीएच मोर्चरी पहुंची। अब नवजात का शव मोर्चरी में रखा गया है। पुलिस कार्रवाई पूरी होने के बाद ही नवजात की अंत्येष्टि हो पाएगी।

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असल में पावटा जिला अस्पताल के पालना गृह में सोमवार करीब रात 10:30 बजे नवजात छोड़ी गई। नवजात की हालत गम्भीर थी, ऐसे में यहां प्रारम्भिक उपचार के बाद उम्मेद अस्पताल रैफर कर दिया गया।

वहां उपचार के दौरान मंगलवार सुबह 6 बजे नवजात की मौत हो गई। उसके बाद अस्पताल प्रशासन और पुलिस प्रशासन के बीच आपसी बातचीत के बावजूद नवजात का शव दोपहर करीब ढाई बजे तक अस्पताल में ही रखा रहा। बाद में पुलिस पहुंची और नवजात के शव को एमजीएच मोर्चरी में लेजाकर रख दिया, लेकिन अंत्येष्टि नहीं हो पाई। अब पुलिस कार्रवाई के बाद ही अंत्येष्टि हो पाएगी।

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ये है नियम

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के नियमानुसार पालने में मृत बच्चा पाए जाने अथवा इलाज के दौरान मृत्यु हो जाने की स्थिति में पुलिस चौकी/थाना में शीघ्र ही सूचना दी जाए। पोस्टमार्टम के बाद बच्चे की मृत देह को सीबीआरएस को सुपुर्द करते हुए सीडब्ल्यूसी को भी सूचित किया जाए। ऐसी स्थिति में शव का अंतिम संस्कार सीबीआरएस द्वारा किया जाएगा। सीबाीआरएस न होने की स्थिति में सीडब्ल्यूसी द्वारा इसकी व्यवस्था की जाएगी।

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समय पर नहीं पहुंची पुलिस

हमने नवजात की मृत्यु के तुरंत बाद अंतिम संस्कार के लिए हिन्दू सेवा मण्डल के कार्यकर्ताओं को बुला लिया था और बाल कल्याण विभाग को भी सूचित कर दिया था। हिन्दू सेवा मण्डल के कार्यकर्ता लावारिस मौत होने की वजह से पुलिस की अनुमति मांग रहे थे। पुलिस को सूचना भी कर दी थी लेकिन काफी इंतजार के बाद पुलिस नहीं पहुंची। दोपहर को पुलिस अस्पताल पहुंची और शव को एमजीएच मोर्चरी लेकर गई। पुलिस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम संस्कार हो पाएगा। -डॉ. कमलेश मूथा, उपअधीक्षक, उम्मेद अस्पताल, जोधपुर।

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