सुमित्रा ने पति की मौत के बाद हार नहीं मानते हुए तोड़ी हर जंजीर


- एक बार फिर रूकी पढ़ाई शुरू कर बनी व्याख्याता
- एक साथ 3 जगह मजदूरी कर बेटे को एम्स में लगाया

By: Jay Kumar

Published: 30 Jan 2021, 04:43 PM IST

Jodhpur, Jodhpur, Rajasthan, India

जयकुमार भाटी/जोधपुर. कहते है.. मां के कदमों में जन्नत ही नहीं, बल्कि उसके वजूद में सारा जहां छिपा होता है। यह मां ही है जो अपने बच्चों के लिए दुनिया की हर जंजीर तोडऩे का हौसला रखती है। इसी तरह के हौसले से लबरेज एक मां का नाम है जोधपुर की सुमित्रा चौहान जिसने अपने बच्चों को खुशियां देने के लिए कदम-कदम पर न सिर्फ संघर्ष किया, बल्कि अपने पति की मौत के बाद भी हार नहीं मानते हुए एक साथ तीन जगह काम करने के साथ अपनी रूकी पढ़ाई वापस शुरू की और फिर वह वक्त आया जब मुश्किलों व परेशानियों ने इस मां के सामने घुटने टेक दिए। यह इस मां के संघर्ष का ही कमाल है कि उम्र के दूसरे पड़ाव में शिक्षा की ओर कदम बढ़ाया और एमए बीएड कर इतिहास की व्याख्याता लगने के साथ सफलता की नई मिसाल कायम की। आज उसका बड़ा बेटा एम्स में कार्यरत है, वहीं दूसरा बेटा केन्द्रीय विद्यालय में पढ़ रहा हैं।

बच्चों के भविष्य के लिए शुरू की पढ़ाई
सुमित्रा ने बताया कि छोटी उम्र में विवाह होने के बाद जब पति के साथ बच्चों के भविष्य के सपने संजोने लगी तभी बिमारी के चलते फरवरी 2012 में मेरे पति का निधन हो गया। इसके बाद में काफी टूट गई थी। फिर सोचा कि अगर मैंने हार मान ली, तो बच्चों का भविष्य खराब हो जाएगा। जीवन से संघर्ष करने का अपना फैसला जारी रखा और प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने के साथ अपनी रूकी पढ़ाई वापस शुरू कर एमए बीएड किया। मैंने अपने दोनों बेटों को भी पढ़ाने-लिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मैंने स्कूल से बचे हुए समय में शहर के एक एनजीओ में भी काम करने के साथ घर पर कशीदाकारी व फॉल लगाने का काम भी शुरू किया। जीवन से कठोर संघर्ष करने का परिणाम है कि वर्ष 2017 में मेरा चयन व्याख्याता ‘इतिहास’ के लिए हुआ और मेरे बड़े बेटे को एम्स में नौकरी मिल गई। अब मैं सातवीं कक्षा में पढऩे वाले छोटे बेटे को कामयाब होता देखना चाहती हूं।

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