VIDEO : महिलाओं और बच्चों को शिकार बना रहा स्वाइन फ्लू, जोधपुर में दिनोंदिन बढ़ रहा मौत का आंकड़ा

Harshwardhan Singh Bhati | Publish: Feb, 02 2018 12:42:59 PM (IST) Jodhpur, Rajasthan, India

स्वाइन फ्लू से संभागभर में ८३ रोगी आए सामने, इनमें से ४५ जोधपुर के

कुणाल पुरोहित/जोधपुर. तेजी से फैले स्वाइन फ्लू ने इस साल छोटे बच्चों और महिलाओं को अपना शिकार बनाया। इस साल अभी तक तकरीबन ८३ नए रोगी सामने आए। इसमें से ३८ महिलाएं और १० बच्चे शामिल हंै। मौत का आंकड़ा भी काफी हैरान कर देने वाला है। इस बीमारी की चपेट में आने से इस साल २१ लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। जोधपुर में स्वाइन फ्लू ने साल २००९ में अगस्त-सितंबर माह में प्रवेश किया था। उम्मेद अस्पताल की रेजिडेंट डॉक्टर भी स्वाइन फ्लू पॉजिटिव आ चुकी हैं। हालांकि इसमें कोई एक विशेष क्षेत्र सामने नहीं आया है, जहां से स्वाइन फ्लू के सबसे ज्यादा मरीज आए हो।

 

दस बच्चों में हुई स्वाइन फ्लू की पुष्टि


स्वाइन फ्लू से इस साल अभी तक दस बच्चे भी इस बीमारी का शिकार हो गए। इनमें पांच बच्चे और पांच बच्चियां चपेट में आए हैं। इसमें १५ दिन की बच्ची से लेकर पांच साल तक के बच्चे शामिल हैं। चिकित्सा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक १० में से नौ स्वाइन फ्लू के नए रोगी जोधपुर शहर व उसके आस-पास के क्षेत्रों के हैं।

 

११ महिलाएं हुई स्वाइन फ्लू की शिकार


संभाग भर में स्वाइन फ्लू से हुई मौतों की संख्या २१ के आस-पास है। इसमें ११ महिलाओं ने इस बीमारी के आगे घुटने टेक दिए। इसमें दो पाली, एक जैसलमेर और जिले की महिला ने इलाज के दौरान दम तोड़ा।

 

२३ सेंपल, ४ नए रोगी और १ की मौत


इस साल अभी तक स्वाइन फ्लू की चपेट में आने से २१ जानें चली गई। जबकि ८३ नए रोगी सामने आए। गुरुवार को फिर मेडिकल कॉलेज की माइक्रो बायलॉजी लैब में जांच के लिए २३ नमूने गए। इसमें चार नए मरीजों में स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि हुई। जानकारी के अनुसार माणक चौक निवासी (५३) वर्षीय व्यक्ति, बाड़मेर जिले की निवासी (६५) वर्षीय महिला, जोधपुर के वैशाली नगर निवासी (२७) वर्षीय महिला व जोधपुर के पावटा सी रोड निवासी (२९) वर्षीय महिला में स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि हुई। जबकि नागौर जिले के खतराली नाडी निवासी (३३) वर्षीय महिला की दोपहर ढाई बजे इलाज के दौरान मथुरादास माथुर अस्पताल में मौत हो गई। उल्लेखनीय है कि डॉ.एसएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रो बायलॉजी लैब में इस साल स्वाइन फ्लू की जांच के लिए ३५१ नमूने गए। इसमें ८३ मरीजों में स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि हुई है। जबकि २१ मरीजों की मौत हो गई।

 

एमडीएमएच में रिपोर्ट पॉजिटिव, निजी अस्पताल में नेगेटिव


स्क्रब टाइफस के रोगी की जांच रिपोर्ट डॉ.एसएन मेडिकल कॉलेज की माइक्रो बायलॉजी लैब में पॉजिटिव आई थी, जबकि जयपुर के निजी अस्पताल में जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई है। यानी मथुरादास माथुर अस्पताल की जांच रिपोर्ट के अनुसार बच्चा स्क्रब टाइफस की बीमारी से संक्रमित है, लेकिन जयपुर के निजी अस्पताल में आई रिपोर्ट के मुताबिक बच्चा स्क्रब टाइफस बीमारी से नहीं, बल्कि किसी और ही बीमारी से ग्रसित है। निजी अस्पताल में बच्चे का इलाज कर रहे डॉक्टरों का मानना हैं कि बच्चे को स्क्रब टाइफस की बीमारी नहीं है, लेकिन संभावना अभी भी इस बीमारी की इसीलिए जताई जा रही है, क्योंकि तीन संदिग्ध रोगी भी सामने आए हैं। हालांकि डॉ.एसएन मेडिकल कॉलेज ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है। उल्लेखनीय है कि बच्चे के इलाज में कोताही का आरोप लगाकर परिजन बच्चे को इलाज के लिए निजी अस्पताल लेकर चले गए थे। एमडीएमएच के चिकित्सकों के मुताबिक बच्चे में जो बीमारी के लक्षण पाए गए, वह स्क्रब टाइफस के ही थे। जबकि डॉक्टरों ने रिपोर्ट के आधार पर ही बच्चे का इलाज शुरू किया था। जिम्मेदारों का यह भी कहना है कि बिना बताए अस्पताल छोड़कर जाना भी गलत है। गौरतलब है कि सरकारी लैब में भी इसी बीमारी की पुष्टि हुई। फिर भी परिजनों ने चिकित्सा सुविधा पर आरोप लगाकर बच्चे के लेकर चले गए।

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