Teachers Day पर टीचर्स का कहना है कि आपसी बॉण्डिंग से बदलेगी एजुकेशन की तस्वीर

जोधपुर.टीचर्स डे ( Teachers Day ) पर जोधपुराइट्स टीचर्स ( Jodhpurites teachers ) का पॉइंट ऑफ व्यू है कि टीचर्स ( Teachers ) और स्टूडेंट्स ( Students ) के बीच आपसी बॉण्डिंग से एजुकेशन सिस्टम ( education system ) में बदलाव हो सकता है।

 

 

By: M I Zahir

Updated: 05 Sep 2019, 09:15 PM IST

जोधपुर.आम तौर पर एजुकेशन, ज्ञान, विद्या, तालीम, इल्म या नॉलेज देने वाला टीचर कहलाता है। गुरु आदिकाल से ही शिक्षा के साथ संस्कार देता रहा हैै और शिक्षक भी शिक्षा का संवाहक रहा है। इसके उलट आज व्यावसायिकता ने गुरु और शिक्षक शब्द में फर्क कर दिया है। गुरु को संस्कार देने और शिक्षक को वेतन ले कर शिक्षा देने वाला मान लिया गया है। कुछ शिक्षकों का मानना है कि शिक्षक शिक्षादाता -विद्या दाता है और विद्यार्थी उनसे प्राप्त ज्ञान से आलोकित होता है। आज ट्यूटर व विद्यार्थी संस्कृति और संस्कार के बजाय व्यावहारिकता और व्यावसायिकता को महत्व देने लगे हैं। हकीकत यह है कि शिक्षा और संस्कृति में गहरा संबंध है। उनका मानना है कि टीचर्स और स्टूडेंट्स के बीच आपसी बॉण्डिंग और एजुकेशन विद फन फार्मूले से पढ़ाने से एजुकेशन का स्टेंडर्ड और स्टेटस बदल सकता है। टीचर्स डे ( Teachers day ) पर पत्रिका ने आज की एजुकेशन पॉलिसी ( education policy ) , एजुकेशन सिस्टम( education system ) और रिजल्ट ऑरिएंटेड एजुकेशन ( result oriented education ) के बारे में यूथ टीचर्स से बात की :

हर स्कूल में एक कॉर्डिनेटर हो
बच्चों को केवल किताबी ज्ञान न दें। बल्कि उनकी रुचि के अनुरूप उनका मार्गदर्शन करें। बच्चों को समझने के लिए उनके अभिभावकों और घर का माहौल समझना बहुत जरूरी है। उन्हें बताना चाहिए कि स्कूल क्या है, स्कूल के रूल्स क्या हैं और स्कूल उनसे क्या चाहता है और स्कूल को उनसे क्या सहयोग चाहिए। स्कूल हमेशा अभिभावक के सहयोग और टीचर्स के टेलेंट से चलता है। टीचर जब तक बच्चे के घर की स्थिति नहीं समझेगा, वह बच्चे का उचित मार्गदर्शन नहीं कर सकता। जिन स्टूडेंट्स के पेरेंट्स अशिक्षित हों, टीचर्स को उन विद्यार्थियों से नियमित रूप से मिलते रहना चाहिए, ताकि विद्यार्थी किसी कारण से पीछे न रह जाए। सरकार हर सरकारी और प्राइवेट स्कूल में एक कॉर्डिनेटर नियुक्त करे, जो अभिभावक को उनके स्तर से स्कूल और स्कूल की एजुकेशन के बारे में समझा सके।
-ग्लोरी लाल ( Glory Lall )

प्रिंसिपल, इंग्लिश मीडियम स्कूल,जोधपुर

विद्यार्थी को व्यावहारिक ज्ञान भी दें
पढ़ाई तो हर स्कूल और कॉलेज में होती है। कोर्स भी करीब-करीब वही होता है। बस पढऩे और पढ़ाने के तरीके में फर्क होता है। अध्ययन और अध्यापन को बोझ न समझें और बड़े आराम से पढ़ें और पढ़ाएं तो पढऩे व पढ़ाने में मजा आता है।विद्यार्थी हो या शिक्षक, उस पर किसी तरह का दबाव नहीं होना चाहिए। क्यों कि विद्या बोझ नहीं, वरदान है। इसलिए एक शिक्षक के तौर पर मेरा अनुभव यह है कि विद्यार्थियों को पढ़ाते समय हमें उन्हें किताबी ज्ञान के अलावा व्यावहारिक ज्ञान भी देना चाहिए। इसके लिए व्याख्यानों आदि का सहारा लेना चाहिए।
-अभिषेक चौहान ( Abhishek chouhan )
कॉलेज लेक्चरर, एकाउंटिंग, जोधपुर

स्कूल अपनी नींव पक्की करें
आज के समय में अंग्रेज़ी की एक कहावत 'बी द टीचर यू ऑल्वेज क्रेव्ड फॉर व्हेन यू वर अ स्टूडेंट' के पीछे छुपा संदेश समझना अति आवश्यक है। आज का विद्यार्थी दूरदर्शी है, उसे अपने भविष्य को लेकर कई तरह की अपेक्षाएं हैं। ऐसे में शिक्षा जगत का यह फर्ज है कि वह विद्यार्थियों को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराए। मेट्रो सिटीज और हमारे शहर की स्कूलों के बीच का मोटा अंतर यह है उन शहरों में बच्चे को स्वतंत्रता दी जाती है ख़ुद को खोजने की, अपने सपने हकीकत में बदलने की हिम्मत दी जाती है और इसकी शुरुआत स्कूलों और वहां के शिक्षकों से होती है। हमारे यहां भी इसी की जरूरत है, माता पिता के बाद स्कूल और वहाँ के शिक्षक ही हैं जो सपनों को हकीकत में बदलने के लिए विद्यार्थियों का भरोसा जीत सकते हैं और उनकी मदद कर सकते हैं। इसके लिए स्कूलों को अपनी नींव पक्की करनी होगी।
-डॉ. गरिमा माथुर ( Dr.Garima Mathur )
कॉलेज लेक्चरर, साइकोलॉजी, जोधपुर

शिक्षक विषय के प्रति सजग रहें
शिक्षक को सदैव अपने विषय के प्रति सजग, सतर्क और समर्पित रहना चाहिए। विद्यार्थियों को शिक्षकों का आदर करना नहीं भूलना चाहिए। जब छात्र-छात्राओं में टीचर्स के प्रति आदर का भाव बना रहेगा तो वो भी मन लगा कर पढ़ाएंगे। अगर विद्यार्थी में शिक्षक के प्रति आदर का भाव नहीं होगा तो इससे उनमें आपसी समझ डवलप नहीं होगी। एेसा होने पर संवादहीनता की स्थिति आ सकती है। शिक्षक और विद्यार्थी के अच्छे रिजल्ट के लिए दोनों के बीच अच्छी बॉण्डिंग होना बहुत जरूरी है। एेसा होने पर क्लास के अलावा भी सवाल पूछे जा सकते हैं और समस्या का समाधान भी हो सकता है।
-हेमप्रभा पुरोहित ( Hemprabha Purohit )
असिस्टेंट कॉलेज लेक्चरर, बिजनेस मैनेजमेंट,जोधपुर

पूरे देश में एक ही बोर्ड हो
शिक्षा प्रणाली में हम यह देखते है कि जैसे ही राज्य में सरकार बदलती है तो नई सरकार पाठ्यक्रम को अपनी राजनीतिक विचारधारा के अनुरूप परिवर्तित कर देती है जिससे बड़ी मात्रा में कागज,श्रम व धन की बर्बादी होती है। मेरा सुझाव है कि पूरे देश में एक ही बोर्ड हो और वह पाठ्यक्रम का 75 प्रतिशत हिस्सा तैयार करे, जो पूरे भारत के लिए समान रूप से लागू हो। शेष 25 प्रतिशत राज्य अपनी संस्कृति व इतिहास आदि का समावेशी और आदर्श भाग तैयार करें जिसे बार-बार बदलना न पड़े। इससे शिक्षा का एकीकृत ढांचा तैयार होगा, जो भारत की विविधता में एकता की विचारधारा से मेल खाएगा। साथ ही राष्ट्र व पर्यावरण अनुकूल भी होगा।
-खुशपेंद्र दवे ( khushpendra dave )
सीनियर स्कूल टीचर, साइंस, लूणी, जोधपुर

टीचर्स और स्टूडेंट्स के ओरिएंटेशन प्रोग्राम हों
शिक्षा हर व्यक्ति के जीवन की आधारशिला है, चाहे वह शिक्षा विद्यार्थी को अपने माता पिता से मिले या शिक्षक से, वह सीख उस व्यक्ति के जीवन के निर्माण के लिए आवश्यक होती है। आज की शिक्षा प्रणाली में यह जरूरी है की बच्चों को शिक्षा के लिए पहले कम्फर्ट जोन में ले सकें। जब बच्चे मन से शिक्षा ग्रहण करने के लिए तैयार होंगे तो ही उस शिक्षा और शिक्षण का औचित्य है। आज की शिक्षा प्रणाली सिर्फ मार्कशीट हासिल करने की औपचारिकता रह गई है। जरूरत है स्किल बेस्ड कोर्स करवाने की। साथ ही पूरे देश में एक ही बोर्ड की शिक्षा देनी चाहिए, ताकि बच्चों के मन में सीबीएसई और आरबीएसई जैसी भावना न आये और एक जैसा कोर्स होने से शिक्षात्मक एकरूपता आ पाएगी। राज्यों के बीच स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम होने चाहिए और टीचर्स और स्टूडेंट्स के लिए समय समय पर ओरिएंटेशन प्रोग्राम भी जरूरी हैं। साथ ही शिक्षा का व्यापारीकरण बंद करना सबसे ज्यादा जरूरी है।
-रुचिता मेहता ( Ruchita mehta )
स्कूल टीचर, फाइन आर्ट,जोधपुर

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