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MILLET-----देश में भेड़-बकरी के रिसर्च सेन्टर, घोषणा के डेढ़ साल बाद भी इस प्रमुख फसल का सेन्टर नहीं

- डेढ़ साल बाद भी धरातल पर नहीं देश का पहला बाजरा रिसर्च सेंटर
- प्रदेश के बाड़मेर जिले में सेंटर की हुई थी घोषणा

- देश में सर्वाधिक उत्पादन राजस्थान में
- ज़मीन भी चिन्हित की जा चुकी है

जोधपुर

Published: April 16, 2022 10:18:01 am

जोधपुर।

राजस्थान के अन्नदाताओं के लिए सोना या आजीविका की प्रमुख फसल बाजरा के लिए राजस्थान में अनुसंधान संस्थान की सौगात मिली थी, लेकिन करीब डेढ़ साल बाद भी यह संस्थान धरातल पर नहीं उतरा है। इससे प्रदेश के किसानों को बाजरा उत्पादन में फायदा नहीं मिल रहा है। क्षेत्रफल व उत्पादन की दृष्टि से देश में पहला स्थान होने के बावजूद राजस्थान में राष्ट्रीय स्तर का अनुसंधान संस्थान नहीं होने पर पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर जिले में रिसर्च सेंटर खोलने की घोषणा की गई थी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से जोधपुर में केवल अखिल भारतीय समन्वित बाजरा अनुसंधान परियोजना (पीसी यूनिट) है, जिसके अधीन देशभर में 13 केन्द्र कार्य कर रहे है। देशभर में बाजरा पर हो रहे अनुसंधान, नई किस्मों का निर्धारण आदि जोधपुर से हो रहा है।
MILLET-----देश में भेड़-बकरी के रिसर्च सेन्टर, घोषणा के डेढ़ साल बाद भी इस प्रमुख फसल का सेन्टर नहीं
MILLET-----देश में भेड़-बकरी के रिसर्च सेन्टर, घोषणा के डेढ़ साल बाद भी इस प्रमुख फसल का सेन्टर नहीं
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गुड़ामालानी में जमीन चिन्हित हो चुकी

रिसर्च सेंटर के लिए बाड़मेर के गुड़ामालानी में 100 एकड़ जमीन भी चिन्हित भी हो चुकी है। इसके लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) ने इसके लिए 100 एकड़ जमीन मांगी थी। इसकी विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी जा चुकी है।
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कुल उत्पादन का 42 प्रतिशत उत्पादन राजस्थान में
देश में कुल 9.8 मिलियन हैक्टेयर क्षेत्रफल में बाजरा बोया जाता है। जिसका उत्पादन करीब 9.4 मिलियन टन है। इसमें अकेले राजस्थान में 3.75 मिलियन टन उत्पादन होता है, जो देश का करीब 42 प्रतिशत हिस्सा है। राजस्थान में करीब 4.15 मिलियन हैक्टेयर में बाजरा बोया जाता है, जो पूरे देश का करीब 56 प्रतिशत क्षेत्रफल में है।
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संस्थान का यह फायदा होगा
यह अनुसंधान संस्थान प्रदेश को बाजरे के बीज और उत्पादन को लेकर स्वावलंबी बनाने का बड़ा कदम होगा। बाजरा मारवाड़ का प्रमुख खाद्य है। प्रदेश में बाजरा अनुसंधान संस्थान खोलने से बाजरे की जैव विविधता उच्च गुणवत्तायुक्त वाजिब दाम, प्रमाणित बीज, मूल्य संवर्धन आधारित बाजरा बीज व जैविक प्रमाणीकरण संस्थान, बीजों के व्यापार संबंधित उद्योग व कृषि आधारित कुटीर उद्योग का विकास होगा। बाजरे का अलग से अनुसंधान संस्थान बनने से न केवल राजस्थान बल्कि बाजरा उत्पादक हरियाणा, उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश के किसानों को भी फायदा होगा। साथ ही, किसान नकली बीज विक्रेताओं के चंगुल से भी बच जाएंगे।
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देश में भेड़-बकरी संस्थान, बाजरा का ही नहीं
भारत सरकार, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद व विभिन्न राज्य सरकारों की ओर से अन्य अनाज, दलहन व पशुओं के अनुसंधान संस्थान है। बाजरा के बहुआयामी प्रायोगिक संस्थान नहीं होने के कारण बाजरा उत्पादक किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। देश में मक्का, धान, गन्ना, गेहूं, जई, मसालें, आलू, तंबाकू, कपास,भेड़, बकरी, घोड़ा आदि संस्थान है। अन्य संस्थानों की तरह बाजरे का अलग से अनुसंधान संस्थान बने तो न केवल राजस्थान बल्कि बाजरा उत्पादक हरियाणा, उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश के किसानों को भी फायदा होगा।
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इंडियान काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च की साइज सलेक्शन कमेटी ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) को रिपोर्ट पेश कर दी। अब आईसीएआर राज्य सरकार से जमीन के बारे में चर्चा कर अंतिम निर्णय लेगी।
डॉ विलास तोनापी, डायरेक्टर
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मिलेट रिसर्च, हैदराबाद

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