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मजदूर और ठेला चालकों के बेटे पढ़ेंगे आइआइटी में

- सुपर-30 के तीस में से 29 छात्रों का आइआइटी में चयन
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मजदूर और ठेला चालकों के बेटे पढ़ेंगे आइआइटी में

मजदूर और ठेला चालकों के बेटे पढ़ेंगे आइआइटी में

जोधपुर. देश के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आइआइटीज) में प्रवेश के लिए होने वाली संयुक्त प्रवेश परीक्षा जेईई-एडवांस के शुक्रवार को घोषित परिणाम में जोधपुर स्थित ऑयल इंडिया के सुपर-30 के तीस में से 29 छात्रों का चयन हुआ है। सुपर-30 के नरेंद्र सिंह ने देशभर में 444 वी रैंक हासिल की। सिरोही के आबूरोड तहसील के पास एक गांव में रहने वाले नरेंद्र सिंह के पिता गांव में ही एक निजी स्कूल में पढ़ाकर अपना गुजर-बसर करते हैं। बच्चे को अब पढ़ा-लिखाकर ऊंचे ओहदे पर देखना चाहते हैं।
सुपर-30 के राहुल अग्रवाल ने बताया कि अधिकांश बच्चे बेहद गरीब परिवार से हैं। कोटा निवासी सूरज बैरवा ने 820 कैटेगरी रैंक हासिल की। उसके पिता दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। अरुण घोष के पिता की गांव में ही परचून की छोटी सी दुकान है। कुछ के पिता ठेके पर सब्जी बेचते हैं। सभी तीस बच्चों को सुपर-30 में एक साल तक नि:शुल्क कोचिंग, रहना-खाना सब ऑयल इंडिया की ओर से दिया गया।

गौरतलब है कि सुपर-30 की ओर से हर साल तीस गरीब बच्चों का कोचिंग के लिए चयन किया जाता है। उसके बाद साल भर उन्हें सारी सुविधाएं नि:शुल्क दी जाती है। जोधपुर में सुपर-30 के शुरू हुए सात साल से अधिक हो गए हैंं। दो साल पहले लड़कियों के भी सुपर-30 संस्थान जयपुर में शुरू किया गया।