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CARROT---मारवाड़ के खेतों से निकलकर देश-दुनिया में छाई गाजर की मिठास


- जिले में 50 हजार हेक्टेयर में हो रही गाजर की खेती

जोधपुर

Published: December 31, 2021 10:35:45 pm

जोधपुर।
मथानिया की मिर्ची व जीरे से मिली प्रसिद्धी के बाद अब मारवाड़ की गाजर की मिठास देश-दुनिया में छाने लगी है। जोधपुर के मथानिया व आसपास के इलाकों में हो रही गाजर अपने चमकदार रंग व मिठास के कारण देश भर की मंडियों में पहुंच रही है। गाजर के भाव ठीक-ठाक मिल जाने से किसानों का भी रुझान बढ़ा है। नतीजन करीब एक दशक पहले कुछ हैक्टेयर में बोई जाने वाली गाजर का रकबा बढ़कर लगभग 50 हजार हैक्टेयर तक पहुंच गया है। जिले के मथानिया-तिंवरी क्षेत्र ने कभी मिर्ची उत्पादन व गुणवत्ता के चलते वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई थी। अब यही इलाका गाजर की मिठास के कारण भी पहचाना जाने लगा है। क्षेत्र के प्रगतिशील किसान रतनलाल डागा का कहना है कि मिर्ची का उत्पादन घटने से किसानों ने गाजर की फ सल की ओर रुख किया और इसमें अच्छी सफ लता भी मिल गई।
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15 से अधिक राज्यों में पहुंची
जिले के मथानिया क्षेत्र विशेषकर रामपुरा भाटियान् की गाजर ने देशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है। वर्तमान में करीब 15 से अधिक राज्यों में गाजर सप्लाई हो रही है। जिनमें प्रमुख गुजरात, महाराष्ट, दिल्ली, पं बंगाल, पंजाब, जम्मू कश्मीर, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश आदि शामिल है। इसके अलावा, निर्यात के क्षेत्र में भी दुबई, बांग्लादेश्, आस्ट्रेलिया, अमरीका आदि देशों में मारवाड़ी गाजर निर्यात हो रही है। गाजर उत्पादक किसानों के अनुसार वर्तमान में प्रतिदिन करीब 400-450 ट्रक गाजर सप्लाई की जा रही है (इसमें स्थानीय मंडी की सप्लाई अलग है)।
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मुम्बई से पैठ बनी, देशभर में छाई
गाजर उत्पादन के बाद स्थानीय मंडिय़ों में सप्लाई की जाती रही। इससे किसानों को अच्छे भाव नहीं मिलते, इस पर कुछ किसान अपनी गाजर ट्रेनों से मुम्बई ले जाते, जहां मारवाड़ी गाजर रंग, मिठास, जूस की अधिकता की वजह से महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों की तुलना में अधिक पसंद की जाने लगी। कुछ ही समय में महाराष्ट्र सहित देश के अन्य राज्यों में मारवाड़ी गाजर की मांग बढऩे लगी और वर्तमान में पूरे देश में अपनी एक अलग पहचान बना ली है।
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1980 के दशक में शुरू हुई गाजर की खेती
मथानिया क्षेत्र शुरू से ही मिर्च के लिए प्रसिद्ध रहा और देशभर में अपनी धाक जमाई। लेकिन वर्ष 1980 के दशक में छोटे स्तर पर गाजर की खेती शुरू की गई। बाद के वर्षो में गाजर उत्पादन, क्वालिटी, रंग व स्वाद के अच्छे परिणाम मिलने पर किसानों का रुझान बढऩे लगा। वर्तमान में जिले में करीब 50 हजार हैक्टेयर में गाजर की खेती हो रही है। जिससे करीब 8-10 लाख मीट्रिक टन गाजर पैदावार हो रही है।
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गाजर ने दिलाया राष्ट्रीय सम्मान
देशभर में अलग पहचान बनाने के लिए मथानिया की गाजर ने गाजर उत्पादक किसान को राष्ट्रीय सम्मान भी दिलाया। रामपुरा भाटियान् के गाजर उत्पादक किसान दो बार राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजे जा चुके है। वर्ष 2017 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी व वर्ष 2018 में केन्द्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया।
CARROT---मारवाड़ के खेतों से निकलकर देश-दुनिया में छाई गाजर की मिठास
CARROT---मारवाड़ के खेतों से निकलकर देश-दुनिया में छाई गाजर की मिठास
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क्षेत्र की मिट्टी, जलवायु व किसानों की मेहनत से गाजर के अच्छे परिणाम मिल रहे है। रकबा भी बढ़ता जा रहा है। क्वालिटी व रंग के कारण राष्ट्रीय-अन्तराष्ट्रीय पहचान मिली है।
मदनलाल देवड़ा, नेशनल अवार्डी
गाजर उत्पादक किसान
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फैक्ट फाइल
- 1 बीघा में 60-70 क्विंटल औसत पैदावार
- 10 लाख मीट्रिक टन उत्पादन
- 400-450 ट्रक वर्तमान में प्रतिदिन देशभर में हो रहे सप्लाई
- 15 से ज्यादा राज्यों में जा रही मारवाड़ी गाजर
- 5 से अधिक देशों में हो रही निर्यात
- अप्रेल तक आती है फसल
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