Tourist Guide for jodhpur : खूबसूरत और कलात्मक है गुलाबसागर

MI Zahir

Publish: May, 20 2019 04:19:31 PM (IST)

Jodhpur, Jodhpur, Rajasthan, India

जोधपुर. शहर का खूबसूरत पर्यटन स्थल है गुलाबसागर। यह घंटाघर के पास बना हुआ है और सैलानियों को बहुत पसंद आता है। यहां फव्वारे चलते हैं तो बड़ा ही मनोहारी दृश्य होता है। महाराजा विजयसिंह की पासवान गुलाबराय ने गुलाबसागर जैसा खूबसूरत जलाशय बनवाया। यह इतिहास के दृष्टिकोण से ही नहीं, वर्तमान दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।

खुद पालकी में बैठ कर आती थीं
महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश के महानिदेशक एम एस तंवर के अनुसार गुलाबराय ने जनता को पानी के लिए परेशान होते हुए देखा तो सन 1780 ईस्वीं में गुलाबसागर बनवाना शुरू किया था। यह लाल पत्थरों से बना भव्य तालाब है। कागा पहाड़ी से पानी की आवक के लिए तालाब तक नहरें बनी होने का तालाब को लाभ मिला। बाद में गुलाबराय के पुत्र तेजसिंह की याद में इसके पास एक छोटा तालाब गुलाबसागर का बच्चा बनाया गया। गुलाबराय के दिल में अच्छा और गुणवत्तापरक तालाब बनवाने की एेसी ललक थी कि वे खुद पालकी में बैठ कर इसके निर्माण का निरीक्षण करने व निर्देश करने के लिए आती थीं।

लबालब भरा रहता था
इतिहास के अनुसार महाराजा जसवंतसिंह द्वितीय (1873- 1895) के समय पेयजल के लिए बालसमंद झील से एक नहर गुलाबसागर तक बनवाई, जिससे यह तालाब लबालब भरा रहता था। बालसमंद से एक फुट पानी गुलाबसागर में आने की वजह से यह तालाब लबालब भर जाता और इसका पानी पूरे साल शहर के लिए पर्याप्त रहता था। गुलाबसागर 150x90 मीटर क्षेत्र में बना हुआ है। यह 30 फुट गहरा है। राजस्थान पत्रिका ने यहां नौका विहार भी शुरू करवाया था। नगर निगम नौकायन को नियमित नहीं रख सका।

दोनों तालाबों के पास पुल और सौंदर्यीकरण
राजस्थान सरकार ने बाद में 3 अगस्त 2007 को गुलाबसागर के दोनों तालाबों के पास पुल बनवाया। इसके सौंदर्यीकरण, नवीनीकरण और सुधार पर 2 करोड़, 70 लाख 50 हजार रुपए खर्च हुए। सौंदर्यीकरण के तहत चारों ओर दीवार और ऊपर जालियां बनवाई और लगवाई गईं। गुलाबसागर महाराजा विजयसिंह की पासवान गुलाबराय की एक यादगार जलाशय है। यह नगर की शोभा ही नहीं, बल्कि जल संग्रहण का शानदार सागर है। नहरों पर अतिक्रमण और गटर के पानी के रिसाव के कारण इसमें प्रदूषित पानी का स्तर बढ़ रहा है। शहर में जल के लिए नल व्यवस्था के बाद यह तालाब उपेक्षित हो गया। तीज त्योहारों पर देव मूर्तियों के विसर्जन के कारण पानी गंदा होता जा रहा है। अब नहरों पर अतिक्रमण ने गंदगी और बढ़ा दी है।
- मनोहरसिंह राठौड़, इतिहासकार और चित्रकार, जोधपुर

 

 

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