शिक्षकों की ट्रेनिंग है या पिकनिक

 शिक्षकों की ट्रेनिंग है या पिकनिक

| Updated: 16 Jan 2015, 11:56:00 AM (IST) Jodhpur, Rajasthan, India

जोधपुर।समय दोपहर साढ़े बारह बजे। करीब सौ से ऊपर अंग्रेजी के शिक्षक गार्डन में बैठ...

जोधपुर।समय दोपहर साढ़े बारह बजे। करीब सौ से ऊपर अंग्रेजी के शिक्षक गार्डन में बैठकर धूप सेक रहे हैं, वहीं कुछ और हॉल में बैठकर नाश्ता करने में मशगूल हैं। आधे से ज्यादा शिक्षक अपना कमरा बदलने की शिकायत लेकर इधर-उधर ही भटकते नजर आ रहे हैं। यह नजारा किसी पिकनिक स्पॉट का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अंतर्गत अंग्रेजी के वरिष्ठ अध्यापकों के दस दिवसीय अभिनवन प्रशिक्षण का है।


शिक्षा विभाग ने यह शिविर शिक्षकों के जरिए विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिहाज से प्रत्येक जिले में आयोजित किए हैं। लाखों रूपए के बजट से तैयार होने वाला यह प्रशिक्षण कार्यक्रम यह स्थिति देखकर बेमानी ही लग रहा है।


14 में से पहले दिन सात अंग्रेजी प्रशिक्षक ही जोधपुर पहुंचे थे। राजस्थान पत्रिका ने मंगलवार से जोधपुर के अलग-अलग स्थानो पर राजस्थान लोक सेवा आयोग से नवचयनित वरिष्ठ अध्यापकों के लिए डॉ. भीमराव अंबेडकर आवासीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मंडोर व मधुबन पब्लिक सीनियर सैकंडरी स्कूल में शुरू हुए आवासीय प्रशिक्षण का जायजा लिया तो कुछ ऎसी तस्वीर सामने आई।

व्यवस्था में व्यस्त रहे


कई शिक्षक बाड़मेर-जैसलमेर से आ रहे हैं। अधिकांश लोग उपस्थित हैं। कोई जानबूझ कर लापरवाही कर रहे हो तो देखेंगे। पहला दिन व्यवस्था करने में लग जाता है। अंग्रेजी प्रशिक्षकों की कमी है। वैसे 14 में से 7 ही पहुंच पाए हैं।- युधिष्ठर गौड़, अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक, राष्ट्रीय माशि अभियान

समय : दोपहर 1.15


स्थान : डॉ. अंबेडकर स्कूल



मंडोर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर आवासीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मंडोर में बाड़मेर, पाली, सिरोही व जैसलमेर जिले से आए अंग्रेजी विषय के नवपदस्थापित शिक्षकों का संभागी शिविर है। यहां जैसलमेर से आए अंग्रेजी के वरिष्ठ अध्यापक राकेश कुलहरि अपने साथी के साथ बगीचे में सो रहे हैं। इस दौरान टीम ने उन्हें शिविर का प्रशिक्षार्थी बताकर पूछा कि क्या यहां व्यवस्थाएं पूरी हैं। कुलहरि झट से बोल पड़े कि सुबह आए थे, इनकी यहां कोई गाइडलाइन तो है नहीं। अब आगे क्या होगा, देखते हैं। वहीं यहां दोपहर 1 बजे तक तो शिक्षकों के आने का सिलसिला ही चल रहा था। जबकि दोपहर को 246 में से 130 शिक्षक ही ट्रेनिंग लेने पहुंचे थे। इन शिक्षकों को जहां रूकवाया गया, वहां अंदर विश्राम गृह में बिस्तर भी कटे-फटे हैं। यहां कई शिक्षक दिन में ही ओढ़ने के लिए रजाइयों की मांग कर रहे थे।

समय - दोपहर 2 बजे

स्थान - मधुबन सीनियर सैकंडरी स्कूल


यहां शिक्षक अंदर प्रशिक्षण की कक्षाएं छोड़ बाहर बैठे आराम से बैठे गपशप लगाते दिखे। यह शिविर जोधपुर जिले के अंग्रेजी वरिष्ठ अध्यापकों का है। धूप में बैठी तीन-चार महिला शिक्षक अपना मोबाइल और टेबलेट देख मनोरंजन कर रही हैं। जबकि एक ट्रेनर अंदर कुछेक प्रशिक्षार्थियों को प्रशिक्षण दे रहा है। यहां बैठे शिक्षक पन्नाराम चोयल और जुगराज प्रजापत से पत्रिका संवाददाता ने अपनी पहचान छुपाकर बातचीत की और कहा कि आपको यहां परेशानी तो नहीं। वो भी बोल दिए कोई परेशानी नहीं। हमने उनसे सवाल किया कि क्या आप यहां रूके हैं, यहां ठहरने की समुचित व्यवस्था है। दोनों अध्यापकों ने दो टूक कह दिया कि हम तो यहां रात में सोएंगे ही नहीं। हमारा घर तो यहीं है। इस शिविर में 76 में से 70 शिक्षक पहुंच गए थे। जबकि यह शिविर आवासीय है, ऎसे में कई शिक्षकों को दस दिन तक यहीं रहकर प्रशिक्षण लेना है।

अभिषेक बिस्सा

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