जोधपुर की कवयित्री डॉ.पद्मजा शर्मा को मिला वागीश्वरी सम्मान, रचनाओं से दे रहीं स्त्री सशक्तिकरण का संदेश

जोधपुर की कवयित्री डॉ.पद्मजा शर्मा को मिला वागीश्वरी सम्मान, रचनाओं से दे रहीं स्त्री सशक्तिकरण का संदेश

कवयित्री और लेखिका डॉ. पद्मजा शर्मा को साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में सृजन सेवा संस्थान और नोजगे पब्लिक स्कूल श्रीगंगानगर की ओर से आयोजित समारोह के दौरान राजस्थान के हिंदी लेखन के क्षेत्र प्रतिष्ठित वागीश्वरी सम्मान से नवाजा गया।

हिन्दी की प्रख्यात कवयित्री शब्द चित्रकार और लेखिका डॉ. पद्मजा शर्मा को साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में सृजन सेवा संस्थान और नोजगे पब्लिक स्कूल श्रीगंगानगर की ओर से आयोजित समारोह के दौरान राजस्थान के हिंदी लेखन के क्षेत्र प्रतिष्ठित वागीश्वरी सम्मान से नवाजा गया। विदेश सेवा की अधिकारी मनीषा स्वामी ने उन्हें 5100 रुपए, स्मृति चिह्न प्रदान और शॉल ओढ़ा कर सम्मानित किया। सृजन संस्थान की ओर से दिविक रमेश दिल्ली, नंद भारद्वाज जयपुर, विमला भंडारी सलूंबर और नीरज दैया को भी इस मौके पर सम्मानित किया गया।


जोधपुर की प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ.पद्मजा शर्मा को कृति हंसो न तारा के लिए मिला घासीराम वर्मा साहित्य पुरस्कार



ज्ञातव्य है कि डॉ. पदमजा शर्मा को उनके शब्द चित्रों की पुस्तक हंसो ना तारा पर इसी वर्ष घासीराम वर्मा साहित्य पुरस्कार देने की घोषणा की जा चुकी है। यह इक्यावन हजार रुपए का पुरस्कार उन्हें प्रयास संस्थान की ओर से सितंबर में चूरू में आयोज्य समारोह में प्रदत्त किया जाएगा। प्रयास संस्थान चूरू के अध्यक्ष दुलाराम सहारण ने बताया कि वार्षिक पुरस्कार सितम्बर माह में चूरू जिला मुख्यालय पर होगा। ध्यान रहे कि डॉ. पद्मजा शर्मा झुंझनूं जिले के गांव बिरमी में जन्मी हैं।


अपनी लेखनी से महिलाओं की पीड़ा बयां करने वाली लेखिका डॉ पद्मजा को महाश्वेता देवी सम्मान



वे हिंदी, इतिहास और पत्रकारिता में एम.ए.और हिंदी में एम फि ल हैं। उन्होंने हिंदी और पत्रकारिता दोनों विषय में पीएचडी. भी की है। वे राजस्थान साहित्य अकादमी की सदस्य रह चुकी हैं। उन्हें शब्द चित्र शृंखला रंग बदरंग जिन्दगी से अपनी कलम का लोहा मनवाया। हिंदी में कविता संग्रह इस जीवन के लिए, सदी के पार, हारूंगी नहीं, मैं बोलूंगी, पहाड़ नदी फूल और प्रेम, खामोशी, जिंदगी को मैंने थामा बहुत और शब्दचित्र संग्रह इस दुनिया के अगल-बगल, रमता जोगी बहता पानी, नासिर के तीन सपने, हंसो ना तारा, घर से दूर घर के लिए पद्मजा की उल्लेखनीय पुस्तकें हैं। लघुकथा संग्रह बेटी व अन्य लघुकथाएं और आलोचना पुस्तकें आचार्य चतुरसेन शास्त्री के उपन्यासों का सांस्कृतिक अध्ययन, पंडित झाबरमल्ल शर्मा व समय से संवाद भी महत्वपूर्ण किताबें हैं।


जोधपर के गढ़ मेहरानगढ़ से राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए यूं भरी गई हुंकार



स्त्रियों के संघर्ष को शब्द देती हूं


इस अवसर पर डॉ. पद़्मजा शर्मा ने कहा कि पुरस्कार आपकी जिम्मेदारियां बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि मेरे लेखन के केंद्र में स्त्रियां होती हैं। और मैं उनकी पीड़ा और संघर्ष को शब्द देती हूं। इससे मुझे सुकून मिलता है।

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