video धींगा गवर : 'भोळावणी की रात देसी विदेशी सैलानियों ने भी मेले का आनंद लिया

MI Zahir

Publish: Apr, 04 2018 06:00:00 AM (IST)

Jodhpur, Rajasthan, India

जोधपुर .दुनिया भर में मशहूर जोधपुर परकोटे में रात को सजे महिलाओं के धींगा गवर मेले में गीत संगीत, हंसी ठिठोली और बेंत मारने के नजारों ने रोमांच पैदा कर दिया। मेले के दौरान रात भर तीजणयांे का राज रहा। उन्होंने जम कर मेले का आनंद लिया। खास बात यह रही कि इस बार शहर से बाहर के लोगों और देसी विदेशी सैलानियों ने भी मेले का आनंद लिया।

जगह जगह लगे डीजे स्टेज

जगह जगह लगे डीजे स्टेज पर परकोटे के लोगों और कलाकारों ने गीत और संगीत के संग डांस का लुत्फ लिया। आलम यह था कि परकोटे में तीजणियां ब्रह्म मुहूर्त तक धींगा मस्ती करती रहीं। राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश की वजह से इस बार पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारियों ने हर जगह पर सुरक्षा व यातायात के पुख्ता बंदोबस्त किए थे।


शहरो माइलो शहर भलो जोधानो रे
धोरा धरती के सिंहद्वार जोधाणे के बेंतमार धींगा गवर मेले के दर्शन के लिए भीतरी शहर में जैसे रात में दिन उग गया। जालोरी गेट से लेकर फतेहपोल, आडा बाजार से लेकर सिटी पुलिस, चाचा की गली व सुनारों की घाटी तक कुल 11 मोहल्लों में गवर माता की स्थापना की गई।

रौनक देखते ही बनती थी
धींगा गवर के नाम से मशहूर इस मेले में खांडा फालसा क्षेत्र की रौनक देखते ही बनती थी। पुष्टिकर स्कूल के बाहर स्थापित गवरमाता की मूर्ति के पास बने स्टेज पर अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमो के साथ ही सूरसागर विधायक
सूर्यकांता व्यास जीजी राजस्थानी मधुर गीत झल्ला गा रही थी...झल्ला रे शहरो माइलो शहर भलो जोधनो रे....। आगे थोड़ी दूरी पर राजस्थान हाईकोर्ट में एएजी शिवकुमार व्यास वहां से गुजरने वालों की आवभगत कर रहे थे। यहां मोचियों की गली के बाहर लगे स्टेज पर भी सांस्कृतिक कार्यक्रम जारी थे। खांडा फलसा से कुम्हाररिया कुआं के बीच लड्ढों की गली की ओर से गवर की स्थापना की गई थी। कुम्हारिया कुआं से आडा बाजार तक भीड़ इतनी थी कि। वहां तक पहुंचना बहुत ही मुश्किल था। पुलिस मुस्तैदी के बावजूद बेंत खा कर अपनी शादी सुनिश्चित करवाने वालों की गजब भीड़ थी।

 


मेले मेंं कई रंग नजर आए
मेले के दौरन कहीं परंपरागत गीत गाए जा रहे थे तो कहीं डीजे पर फिल्मी गीतों और पैरोडी के साथ नृत्य की धूम थी। इस दौरान मेला देखने आने वालों की भी रौनक रही। राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी जोधपुर में मनाए गए अनूठे लोकपर्व धींगा गवर के दौरान मंगलवार रात विविध स्वांग रची तीजणियों ने परम्पराओं का निर्वाह करते हुए मेले को बहुरंगी बनाया।

इधर-उधर भागते नजर आए

परकोटे में सोलह दिवसीय अनुष्ठान के अंतिम दिन रात को अलग-अलग स्वांग रची तीजणियां देर रात को जब गवर प्रतिमाओं के दर्शन करने के लिए हाथों में बेंत लिए निकलीं तो युवकों का हुजूम उनसे बचने के लिए इधर-उधर दौड़ते-भागते सुरक्षित ठोर ढूंढते हुए नजर आए। इस भागमभाग के दौरान स्वांग रची तीजणियों के शृंगार, वीर, वीभत्स, रौद्र, हास्य, करुणा, अद्भुत, शांत, वात्सल्य और भक्ति के रंग नजर आए।

आभूषणें पर पहरा रहा
शहर के विभिन्न क्षेत्रों में विराजित गवर प्रतिमाओं पर 100 किलो से अधिक आभूषणों पर तीजणियों का पहरा रहा। धींगा गवर मेले के दौरान नख से शिख तक शृंगारित गवर प्रतिमा के दर्शन के लिए तीजणियों में क्रेज रहा। आडा बाजार कुम्हारियां कुआं, खाण्डा फलसा, हटडि़यों का चौक, जालप मोहल्ला, ब्रह्मपुरी, आसोप की पोल, चाचा की गली, सुनारों की घाटी, नवचौकिया, सुनारों का बास, जूनी धान मंडी व आडा बाजार आदि जगहों पर स्थापित गवर प्रतिमाओं पर करीब 199 किलो से अधिक आभूषणों से सजावट की गई। सुनारों की घाटी में नख से शिख तक 15 किलो आभूषणों से शृंगारित गवर प्रतिमा सर्वाधिक आकर्षक रही।

गजब का उत्साह दिखा
धींगा गंवर मेले में स्वांग रचने के लिए महिलाओं में जबरदस्त उत्साह दिखा। धींगा गवर के मेले के दौरान तीजणियां कई अद्भुत व लुभावने अंदाज मंे सजने के लिए दशक से झांकियों के पात्र को सजाने-संवारने में अहम भूमिका निभाने वाले जालोरीगेट के अंदर स्थित ड्रेस वाले के यहां अपने स्वांग के लिए पहुंची चांदपोल निवासी मोनिका पुरोहित और हिमांशी पुरोहित ने बताया कि दो दशक पहले मम्मी ललिता पुरोहित सपेरा बनी थी। इस बार उन्होंने लीक से हट कर नाग-नागिन का स्वांग रचना तय किया। ब्रह्मबाग निवासी माधुरी व दीपिका व्यास ने बताया कि इंटरनेट पर सर्च कर अपने मातंगेश्वर महादेव और मातंगी देवी का स्वांग रचना तय किया। मेकअप मैन हरिओम, देवेंद्र और कमलकिशोर सैन ने बताया कि दोपहर से शाम तक ७५ अलग अलग पात्रों का मेकअप किया गया।

गवर गीतों पर झूम उठी तीजणियां
गवर विराजित स्थलों पर ़हे ऊंची मेड़ी ऊजली, रूणझुणियो लै जठै बाजणिया कींवाड़, जाजौ मरवौ लै ....म्हारै सौळा दिन रौ आळम रे ईसर ले चाल्यो गणगौर म्है तो पूजर रोटी खाती रे..और जल्ला गीत म्हारे जोड़ी रो जलाल व मिरगा नैनी रा जलाल आदि की धूम रही। रसिया गीतों दळ बादळ बिच चमकै जी तारा सांझ पड़यां पिव लागै जी प्यारा, कांई रे मिजाज करुं रसिया, जवाब करुंली मिजाज करुंली, आलीजा री सेजां में रीझ रहूंली, कांई रे जबाब करुं रसिया, गोरी-अे-गणगौर माता खोल किवाड़ी बायर तो ऊबी थ्हारे पूजन वालीपूजौ ..... आदि पारम्परिक गीत प्रस्तुत किए। कई तीजणियों ने पारम्परिक गवर गीतों पर नृत्य भी प्रस्तुत किया।


स्वांग में शामिल हुए बाहुबली -पदमावत भी
धींगाणे की रात्रि स्वांग बनने के लिए महिलाओं-युवतियों और नन्ही बच्चियों में भी उत्साह नजर आया। इस बार धार्मिक स्वांग में तीजणयां ईसर-गवर, हनुमान , विक्रमादित्य, झांसी की रानी, शिव-पार्वती, सेठ-सेठानी, नाग नागिन, विष्णु, अभिमन्यु, रामदेव, शनिदेव, राम, श्रीनाथ, ब्रह्मा-विष्णु-महेश, इंद्र, शिवाजी व महाराणा प्रताप के साथ बाहुबली और पदमावत के रूप में तीजणियां नजर आई।

 

 

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