मास्टर प्लान मामले में हाईकोर्ट ने पूछा, बाईपास पर अतिक्रमण हटाने से कैसे सुलझेंगी ट्रैफिक की समस्याएं

Nidhi Mishra

Publish: Nov, 15 2017 10:02:24 (IST)

Jodhpur, Rajasthan, India

मास्टर प्लान मामले में सरकार ने पेश की पालना रिपोर्ट- न्यायमित्र ने कहा, आईवॉश कर रही सरकार

 

राजस्थान हाईकोर्ट में मंगलवार को पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी व अन्य की ओर से छह शहरों के मास्टर प्लान को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई में सरकार की ओर से पालना रिपोर्ट पेश की गई। न्यायाधीश संगीत लोढा व न्यायाधीश अरुण भंसाली की विशेष खंडपीठ ने रिपोर्ट की सघन जांच के बाद असंतोष जताया। खंडपीठ ने एएजी से पूछा कि आप बाईपास से अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही करने की रिपोर्ट पेश कर रहे हो, जब कि जहां ट््रैफिक प्रॉबल्म्स हैं, जैसे सरदारपुरा या शास्त्रीनगर आदि, वहां क्यों नहीं हटाते अतिक्रमण ? इस तरह की मौखिक टिप्पणी के अलावा सुनवाई के दौरान बिल्डर्स व डवलपर्स एसोसिएशन की ओर से पेश किए गए आवेदन पर भी समय अभाव के कारण हाईकोर्ट में बहस अधूरी रही। अब मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।
प्रशासन सिर्फ ठेले और थड़ी वालों को परेशान कर रहा है

रिपोर्ट पर जहां न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता एमएस सिंघवी ने अपने सहयोगी विनीत दवे के साथ टिप्पणी करते हुए आईवाश बताया और कहा कि प्रशासन सिर्फ ठेले और थड़ी वालों को परेशान कर रहा है, ना तो पक्के अतिक्रमण हटा रहा है और ना ही पार्किंग आदि के लिए प्रयास कर रहा है। रिपोर्ट पर ही अन्य याचिकाकर्ताओं पीसी भंडारी व लोक सम्पत्ति संरक्षण समिति के पीएन मेंदोला ने भी जयपुर में अतिक्रमण नहीं हटाने और हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद सहकारी समितियों के नाम पर नई कॉलोनियां बनाने की इजाजत देने का आरोप लगाया।

 

सहकारी समितियों की 12 फाइलें मंगवाईं, लाए एक

पिछली बार इस सम्बन्ध में जिक्र करने पर जेडीए जयपुर के अधिकारियों को खंडपीठ ने उन सभी एक दर्जन मामलों का रिकॉर्ड पेश करने का आदेश दिया था, जिनमें जेडीए ने हाईकोर्ट का आदेश एक तरफ रखते हुए कॉलोनियों का नियमन करने की इजाजत दे दी थी, लेकिन मंगलवार को जेडीए की ओर से सिर्फ एक फाइल पेश की गई। इस पर खंडपीठ ने नाराजगी जताते हुए सभी 12 फाइलें कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया।

जयपुर में 350 से अधिक अतिक्रमण का जवाब नहीं दिया

सुनवाई के दौरान जहां एक अन्य याचिकाकर्ता पूनमचंद भंडारी ने जयपुर में हाईकोर्ट के आदेश की पालना नहीं करने का आरोप लगाया , वहीं राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित नियमन की खबरों की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका क्यों नहीं दायर की जाती ? जबकि मेंदोला ने कहा कि उन्होंने जेडीए को जयपुर में 350 से अधिक अतिक्रमणों की लिस्ट दे रखी है, जिसका कोई जवाब नहीं आ रहा।

उदयपुर नगर निगम ने बनाई वेबसाइट

न्यायमित्र सिंघवी के साथ अधिवक्ता विनीत दवे ने कहा कि उदयपुर नगर निगम की ओर से हाइ्रकोर्ट के आदेश की पालना में वेबसाइट का निर्माण कर उसमें सूचनाएं डाली गई हैं। यह सराहनीय है, जबकि इसमें नगर निगम की ओर से जारी की गई सभी तरह की स्वीकृतियां, आवेदन और नोटिस आदि भी अपलोड करना चाहिए। साथ ही उसमें मास्टर प्लान सहित बायलॉज आदि की जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी वेबसाइट पूरे राजस्थान के लिए तैयार होनी चाहिए। इस पर खंडपीठ ने एएजी राजेश पंवार से पूछा तो उन्होंने कहा कि सरकार पहले से ही ऐसी वेबसाइट पर काम कर रही है।

बिल्डर्स व डवलपर्स की ओर से आवेदन

सुनवाई के दौरान प्रदेश के बिल्डर्स व डवलपर्स की एसोसिएशन क्रेडाई राजस्थान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरएन माथुर और उनके सहयोगियों संदीप पाठक व मुक्तेश माहेश्वरी ने पैरवी करते हुए कहा कि हाईकोर्ट के आदेश की वजह से जयपुर जेडीए उनकी ओर से पेश बहुमंजिला रिहाइशी बिल्डिंग्स के प्रोजेक्ट्स अटका कर बैठा है। उन्होंने कॉमर्शियल के बजाय रिहाइशी प्रोजेक्ट्स के लिए शिथिलता देने का आग्रह किया। इस पर खंडपीठ ने कहा कि यदि आप मास्टर प्लान बाबत जारी आदेशों की व्याख्या करने के लिए आए हैं तो वह हो चुकी। सभी आदेश कानून सम्मत हैं और उनकी पालना के लिए और आदेश जारी किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके सभी प्रोजेक्ट्स में बिजली पानी आदि मूलभूत सुविधाओं की पूर्ण व्यवस्था रहती है। इस पर हस्तक्षेप करते हुए मेंदोला ने कहा कि गरीबों के लिए पीने का पानी नहीं है और प्रशासन शहर से 20 बीस किलोमीटर दूर मल्टीस्टोरी तक पानी पहुंचा रहा है।

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned