#World mothers day : प्रोफेसर केएन व्यास ने सर्वाधिक महिलाओं को पीएचडी करवाई

MI Zahir

Publish: May, 12 2019 07:32:01 PM (IST) | Updated: May, 12 2019 07:32:02 PM (IST)

Jodhpur, Jodhpur, Rajasthan, India

एम आई जाहिर / जोधपुर. शहर के जाने-माने समाजशास्त्री ( sociologist ) और शिक्षाविद ( Educationist ) प्रोफेसर के. एन. व्यास का कहना है कि आज की मां सुरक्षित नहीं है, उसे सुरक्षित कर हम देश की भावी पीढ़ी को सुरक्षा दे सकते हैं। व्यास ने वल्र्ड मदर्स डे ( World Mothers Day ) पर पत्रिका से एक मुलाकात में यह बात कही। जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय ( jainarain vyas university ) समाजशास्त्र विभाग ( Sociology ) के पूर्व अध्यक्ष व शिक्षाविद प्रोफेसर के. एन. व्यास ( Professor K. N. Vyas ) ने सर्वाधिक महिलाओं को पीएचडी करवाई है।

एक चिन्तनीय विषय

उन्होंने कहा कि जिस तरह महिला (जो मां, बहन, बेटी व पत्नी भी है) के साथ घटनाएं रोज-रोज घटित हो रही हैं, वह एक चिन्तनीय विषय है। इसके लिए हम सामान्यत: सरकार, प्रशासन और पुलिस को जिम्मेदार मानते है, उनकी उदासीनता एक कारण हो सकता है, लेकिन वास्वत में एक बच्चे के समाजीकरण में जो सिखाया जाता है और उसे सामाजिक प्राणी बनाने की प्रक्रिया समाजीकरण में सही नही हो रहा है, इस कारण सामाजिक प्राणी बनने के बजाय असामाजिक वह समाज विरोधी बन रहा है।

अपना उतरदायित्व समझना होगा

डॉ. व्यास ने कहा कि सोशल नेटवर्किंग में जो खुलापन आया है उससे मानव, मानव बनने की जगह पशुवत व्यवहार करने लगा है। वैश्वीकरण व उतरआधुनिकता में ऐसा घृणित व्यवहार रोकने के लिए सिखाने की प्रक्रिया, शिक्षा व परिवार इत्यादि को अपना उतरदायित्व समझना होगा।

अपनी मां के प्रति प्यार व्यक्त

उन्होंने कहा कि मातृ-दिवस वह अवसर होता है जब बच्चा अपनी मां के प्रति अपने प्यार को व्यक्त करता है। हालांकि मां के लिए तो हर दिन ही खास होता हैं। परंतु मदर्स डे का भारतीय परंपरा मे अपना एक विशेष महत्व हैं। आजकल लोग अपने काम में इतने व्यस्त हो गए हैं कि अपने माता- पिता के लिए समय नहीं निकाल पाते हैं। यही कारण है कि बच्चे अपने व्यस्त जीवन से कुछ समय निकाल कर अपनी मां को अपना समय देते हैं। कई लोगों को इस बात की भी जानकारी नहीं होती कि मदर्स डे मनाया क्यों जाता है।

अमरीका से शुरू हुआ
समाजशास्त्री डॉ. व्यास ने बताया कि मदर्स डे मनाने के पीछे मां को सम्मान देने के साथ- साथ कुछ कारण भी होता हैं। मदर्स डे को अलग अलग शहरों और देशों में अलग अलग तरीकों से मनाया जाता हैं। मदर्स डे सबसे पहले अमरीका से शुरू हुआ। ऐसा कहा जाता है कि अमरीका में एक एना जार्विस एक्टिविस्ट अपनी मां से बहुत प्यार करती थीं और इस वजह से उन्होने ना कभी शादी की और ना कोई बच्चा। एना ने अपनी मां की मौत होने के बाद इस दिन की शुरुआत की, ताकि हर कोई अपनी मां को प्यार जताए। फि र धीरे-धीरे कई देशों में मदर्स डे सेलिब्रेट करना लोगों ने इसे शुरू कर दिया।

17 महिला शोधार्थी

डॉ. के एन व्यास ने बताया कि उनकी देखरेख में बीस छात्रों ने पीएचडी की डिग्री पूरी की है। उन बीस में से 17 महिला शोधार्थी थीं, ज्यादातर ने अपनी पीएचडी पूरी कर ली है। उन्होंने कई विषयों में शोध किया। महिलाओं और कानून, महिलाओं और विकास, महिलाओं और कानूनी पेशे, महिलाओं और शिक्षण पेशे, अविवाहित कामकाजी महिलाओं और उनकी समस्याओं, भ्रूण हत्या, घरेलू हिंसा, अनुसूचित जाति की महिलाओं और उनके विकास, महिलाओं और स्तनपान जैसे विषयों पर शोध किया। महिलाओं से संबंधित विषय पर और स्वच्छता व वर्तमान में एक महिला मुस्लिम महिलाओं पर कर रही हैं।

ये हैं उनके शोधार्थी
डॉ. उषासूदन व्यास,डॉ. राम अरोड़ा,डॉ. सुनीता बोहरा,डॉ. अनुराधा पाराशर,डॉ. अलका बोहरा,डॉ. शशि पंडत,डॉ. नीलम जोशी, डॉ. मंजू पुरोहित,डॉ. दीपिका, डॉ.दीप शिखा, डॉ. हेमलता शर्मा,डॉ. अमिता चावड़ा, डॉ. दुर्गा सोनी,डॉ. पूजा शर्मा,डॉ. राखी जोशी, डॉ. सोनम खान और डॉ. अनिता जैन।

 

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