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CG Tourism : छत्तीसगढ़ के इस पहाड़ में सोना चांदी का तालाब… 1000 हजार साल पुरानी है इसकी कहानी, देखिए तस्वीरें

CG Tourism: छत्तीसगढ़ के इस पहाड़ में सोना चांदी का तालाब... 1000 हजार साल पुरानी है इसकी कहानी, देखिए तस्वीरें

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CG Tourism: छत्तीसगढ़ के इस पहाड़ में सोना चांदी का तालाब... 1000 हजार साल पुरानी है इसकी कहानी, देखिए तस्वीरें

कांकेश्वरी मंदिर: कांकेरवासियों ने श्रीश्री योगमाया कांकेश्वरी देवी ट्रस्ट का गठन करके पहाड़ी पर मंदिर का निर्माण कराया एवं 2 जुलाई 2002 को विधिवत पूजा अर्चना करके मां योगमाया दुर्गा की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा शहर के गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में की गई। कांकेर वासियों की अराध्य देवी होने के इसका नामकरण मां योगमाया कांकेश्वरी देवी किया गया। जिसका आशय है कांकेरवासियों की देवी मां योगमाया।  

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फांसी भाठा: राजशाही के जमाने में फांसी भाठा अपराधियों को मृत्यु दंड दिया जाता था। अपराधियों काे ऊंचाई से नीचे फेंका जाता था। झण्डा शिखर के पास ही यह स्थित है। इस स्थान से अपराधियों को राजा के द्वारा सजा-ए-मौत का फरमान जारी करने के बाद उन्हे पहाड़ी के नीचे धक्का दे दिया जाता था।

झंडा शिखर: गढ़िया पहाड़ को दूर से देखने में जो सबसे ज्यादा आकर्षित करता है वह है पहाड़ का मुकुट "झण्डा शिखर"। इस स्थान पर राजा का राजध्वज फहराया जाता था। जिस लकड़ी के खंम्बे में झण्डा फहराया जाता था उसके अवशेष वहां आज भी मौजूद है। कहा जाता है कि जब राजा किले में रहते थे तो झण्डा शिखर पर ध्वज लहराता रहता था। ध्वज के कारण प्रजा को मालूम हो जाता था कि राजा किले में हैं या नही।

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- ग्राउंड लेवल से 660 फीट की ऊंचाई पर है पहाड़ की चोटी।- 1955 से हर साल यहां महाशिवरात्रि पर मेला लगता है।- 1972 में पहली बार गढ़िया पहाड़ पर पहुंची बिजली।- 1994 में पहाड़ तक पहुंचने के लिए कंक्रीट की सीढ़ियों का निर्माण हुआ।

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गढ़िया पहाड़, कांकेर: कांकेर से लगे गढ़िया पहाड़ का इतिहास हजारों साल पुराना है। इस पहाड़ पर सोनई-रुपई नाम का एक तालाब है जिसका पानी कभी नहीं सूखता है। इस तालाब की एक खासियत यह भी है कि सुबह और शाम के वक्त इसका आधा पानी सोने और आधा चांदी की तरह चमकता है।

CG Tourism: छत्तीसगढ़ के इस पहाड़ में सोना चांदी का तालाब... 1000 हजार साल पुरानी है इसकी कहानी, देखिए तस्वीरें

जानिए क्या है इस तालाब की कहानी: गढ़िया पहाड़ पर पहले करीब 700 साल पहले धर्मदेव कंडरा नाम के एक राजा का किला हुआ करता था। यहाँ के तालाब का निर्माण राजा धर्मदेव कंडरा ने ही करवाया था। राजा की 2 बेटियाँ थी एक का नाम सोनई और एक का रुपई था। वह दोनों बहने इसी तालाब के पास खेला करती थीं। खेलते-खेलते वे दोनों उसमे डूब कर मर गईं। तब से यह माना गया है की सोनई-रुपई की रूह इस तालाब की रक्षा करती हैं इसलिए इसका पानी कभी सूखता नहीं और ख़ास बात यह है की पानी का सोने-चांदी की तरह चमकना यह इशारा करता है की वे दोनों यहाँ आज भी मौजूद हैं।

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खजाना पत्थर: राजा का महल जिस जगह पर था वहां एक विशाल ऊॅचा पत्थर मौजूद है। उस पत्थर को देखने में ऐसा प्रतीत होता है कि उसमें पत्थर का ही दरवाजा बना हुआ हैं जिसे खोल कर भीतर जाया जा सकता हैं। ऐसा कहा जाता है की इस पत्थर के नीचे राजा ने अपना खजाना छुपाया हुआ है। इसी कारण इसे खजाना पत्थर कहते हैं।