छत्तीसगढ़ के किसानों ने कहा-सिंचाई विभाग की लापरवाही के कारण फूटा बांध, अब दें मुआवजा

छत्तीसगढ़ के किसानों ने कहा-सिंचाई विभाग की लापरवाही के कारण फूटा बांध, अब दें मुआवजा

Deepak Sahu | Publish: Sep, 04 2018 03:05:00 PM (IST) Kanker, Chhattisgarh, India

छत्तीसगढ़ के एक गांव मैनखेड़ा का बांध पिछले सप्ताह हुई भारी बारिश के कारण फूट गया था।

धर्मेंन्द्र निर्मलकर@चारामा. छत्तीसगढ़ के एक गांव मैनखेड़ा का बांध पिछले सप्ताह हुई भारी बारिश के कारण फूट गया था। जिससे ग्राम मैनखेड़ा के करीब 33 किसानों की 50 एकड़ फसल खराब होने की बात पीडि़त किसान कह रहें हैं। किसानों का कहना है कि वर्ष 2016 से लगातार सिंचाई विभाग के एसडीओ दफ्तर में इसकी मौखिक व लिखित सूचना दी गई है कि बांध का मेड़ क्षतिग्रस्त हो चुका है, वहां पर भोक निकल आया है। बावजूद सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। इसके चलते 27 अगस्त की रात को बांध का एक हिस्सा फूट गया और बांध का पानी निकल गया।

फसल हुई बर्बाद
किसानों की कई एकड़ फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई। इस मामले पर पत्रिका ने रविवार को मैनखेड़ा बांध व गांव पहुंचकर पड़ताल किया तो प्रभावित किसानों से पता चला कि बांध फूटने के लिए सिंचाई विभाग ही जिम्मेदार है, यहां पर देखा जा सकता है कि किस तरह से सिंचाई विभाग के आलाधिकारी इस बांध का समय रहते हुए मरम्मत कराना जरुरी नहीं समझा। बांध फूटने पर सिंचाई विभाग के अधिकारी पल्ला झाड़ते हुए, यह कह दिया कि बजट होते हुए भी निविदा नहीं हो पाया व पानी भराव के बाद गेट नहीं खुल पाया, जबकि पड़ताल में देखा गया कि अभी गेट खुला हुआ है, जहां से अब भी पानी निकल रहा है। बांध फूटने के सप्ताहभर के बाद भी पानी को रोके जाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था अब तक नहीं की गई है।

इससे देखा जा सकता है कि किस तरह से सिंचाई विभाग के अधिकारी मात्र खानापूर्ति करने में लगे हुए हैं। जबकि बांध फूटने के बाद गेट खोलकर पानी बहाया जा रहा है। बांध फूटने से फसल बर्बाद होने के साथ-साथ खेतों के मेड़ भी टूटकर बह चुके हैं, कई खेत मिट्टी व रेत से पट चुके हैं। इससे मैनखेड़ा के पीडि़त किसानों में सिंचाई विभाग की घोर लापरवाही से बांध फूटने की बात को लेकर आक्रोश है। ग्राम मैनखेड़ा के ईतवारी नेताम, मदन मरकाम, मुकेश बरसेल, गोविंद बारला, विद्या बारला, चंद्रभान बारला, जीवन कुंजाम, टेकराम सीारे, देवनाथ मरकाम, कामिन साहू, राजीम साहू, सुरसिंह नायक, भारत साहू, कन्या साहू, हठियारिन साहू, सेवाराम गोटी, छबिलाल गोटी, रामसाय गावड़े, श्यामलाल गावड़े, जेठूराम गावड़े, जयश्री गावड़े, बृजलाल गावड़े, समारू गावड़े, शंकर गावड़े, रमशिला गावड़े, हेमंत कोरोटिया, जानसिंग मंडावी, बैजनाथ मंडावी, मनई हिड़को, रैमुनबाई, चरणसिंह बेलोदिया सहित करीब 33 पीडि़त किसानों ने बताया कि हम किसानों का लगभग 50 एकड़ फसल व खेत प्रभावित हो गई हैं। पीडि़त किसानों ने शासन-प्रशासन से मुआवजे की मांग की है।

चारामा सिंचाई विभाग के एसडीओ पीके लकरा ने बताया कि ऊपर से ज्यादा पानी के बहाव आने के कारण बांध फूट गया है। मरम्मत के लिए बजट आया हुआ है, जिसके टेंडर प्रक्रिया के लिए मैं पूरी कोशिश कर रहा हूं। मुझे आए केवल 8-10 महीने ही हुए हैं।

पीडि़त किसान रामसाय गावड़े ने बताया कि बांध फूटने का कारण सिंचाई विभाग की लापरवाही है, उनके द्वारा समय रहते बांध का मरम्मत नहीं कराया गया।

पीडि़त किसान छबिलाल गोटी ने बताया कि शासन-प्रशासन को सही जांच करके बांध फू टने से किसानों को हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाना चाहिए।

पीडि़त किसान देवनाथ मरकाम ने बताया कि सिंचाई विभाग की लापरवाही के कारण बांध फूटा है। प्रभावित सभी किसानों को क्षतिपूर्ति दिया जाना चाहिए।

पीडि़त किसान व पंच दशोदा बाई गावड़े ने कहा कि बांध फूटने से किसानों की कई एकड़ फ सल बर्बाद व खेतों के मेड़ बहने से काफी नुकसान हुआ है। मुआवजा मिलना जरुरी है।

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